तीन साल में किसान, मजदूर, आमजन परेशान

प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष ने पत्रकार वार्ता में केन्द्र को घेरा

प्रदेश  युवक   कांग्रेस अध्यक्ष ने पत्रकार वार्ता में केन्द्र को घेरा
इटारसी। प्रदेश  युवक   कांग्रेस अध्यक्ष कुणाल चौधरी ने कहा है कि तीन साल में एनडीए के सरकार अपनी जवाबदेही तय नहीं कर सकी है। जिन मुद्दों पर सरकार बनाई है, कितने सफल हुए यह सब जानते हैं। उन्होंने कहा कि सरकार तीन साल का जश्न मना रही है, जबकि यदि ये तीन साल सफल होते तो सरकार नहीं जनता जश्न मना रही होती। उन्होंने कहा कि जब से एनडीए की सरकार बनी है, किसान, मजदूर, आमजन सभी परेशान हुए हैं। आतंकवाद बढ़ा, नक्सलवाद बढ़ा, महंगाई बढ़ी, रोजगार घटे, नए रोजगारों का सृजन नहीं हुआ, किसान परेशान, दूध उत्पादक परेशान, प्याज का उत्पादन करके किसान परेशान, ये किसान अपनी मेहनत से पैदा की चीजें सड़क पर फैंकने को मजबूर है, क्योंकि उनको उपज का उचित दाम नहीं मिल रहा है।
श्री चौधरी यहां ईश्वर रेस्टॉरेंट सभागार में तीन साल, जनता बेहाल कार्यक्रम के अंतर्गत प्रेस को संबोधित कर रहे थे। इस अवसर पर पूर्व मंत्री विजय दुबे काकूभाई, संजय पाठक, जिलाध्यक्ष पुष्पराज पटेल, जिला पंचायत सदस्य विजय चौधरी बाबू, युवक कांग्रेस विधानसभा क्षेत्र अध्यक्ष मयूर जैसवाल, राजकुमार उपाध्याय केलू, केसला ब्लाक अध्यक्ष हेमचंद्र कश्यप, अर्जुन भोला, प्रतीक मालवीय सहित युवक कांग्रेस और एनएसयूआई के अनेक नेता मौजूद थे। श्री चौधरी ने कहा कि नोटबंदी के वक्त कहा था कि इससे आतंकवाद घटेगा, कालाधन खत्म होगा, नक्सलवाद घटेगा, लेकिन कुछ नहीं हुआ बल्कि जनता परेशान हो गई, पाकिस्तान सिर उठा रहा है, और सरकार कुछ नहीं कर पा रही है।
खेती नहीं रेती को लाभ
कुणाल चौधरी ने कहा कि प्रदेश सरकार खेती को लाभ का धंधा बनाने की बात कर रही थी, लेकिन यहां तो खेती की बजाए रेती को लाभ का धंधा बना दिया है। भाजपा नेता लाभ उठा रहे हैं। हरदा में कमल पटेल और कलेक्टर श्रीकांत बनोट के विवाद पर उन्होंने कहा कि यह केवल रेत की कमाई की बंदरबांट का परिणाम है, और कुछ नहीं।
हमें भी दें प्रशिक्षण
मप्र युवक कांग्रेस अध्यक्ष ने कहा कि सीएम द्वारा विदिशा में की जाने वाली खेती के विषय में कहा जा रहा है कि उन्होंने ऐसी खेती की है कि एक एकड़ में दस लाख का मुनाफा हुआ है। यदि इस तरह की खेती की जा रही है तो फिर हमें भी ऐसा प्रशिक्षण दिला दिया जाए और प्रदेश में चल रहे कौशल उन्नयन केन्द्रों को बंद कर देना चाहिए।

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