देसी जुगाड़ से चारा काटने की मशीन चलेगी

ग्रामीण महिलाओं को दिया महिला दिवस पर विशेष तोहफा

ग्रामीण महिलाओं को दिया महिला दिवस पर विशेष तोहफा
इटारसी। ग्राम सुपरली के किसान योगेंद्र पाल सोलंकी ने अंतर्राष्ट्रीय महिला दिवस के अवसर पर खेत खलियानों में काम करने वाली ग्रामीण महिलाओं को विशेष तोहफा दिया है। उन्होंने ऐसा तरीका इजात किया है जिससे खलियानों में पंखा चलाने एवं पशुओं के लिए हरा चारा काटने की मशीन पर महिलाओं को मेहनत करने की ज़रूरत नहीं पड़ेगी।
श्री सोलंकी ने स्कूटी में देशी जुगाड़ का इस्तेमाल कर उससे चारा काटने की मशीन को घुमाने और खलिहानों में लगे पंखों को चलाने लायक बनाकर महिलाओं की मेहनत कम कर दी है। प्राय: देखा जाता है कि ग्रामीण क्षेत्रों में खलिहानों में काम करने के लिए महिला मजदूरों को काम पर लगाया जाता है या स्वयं खेत मालिक की घर की महिलाएं ही खलियानों में कार्य करती हैं। उन्होंने कहा कि हमारे देश की इंजीनियरिंग कृषि के मामले में दोष पूर्ण है. भारत देश गांवों में बसता है, इंजीनियरिंग देशकाल के अनुरूप होनी चाहिए। देखने में आता है कि घर में ट्रैक्टर, जीप, मोटरसायकिल सारी सुविधाएं हैं, लेकिन खेतों में पंखा या चारा मशीन चलाना हो या बिजली के अभाव में अन्य छोटे उपकरण चलना हो तो मजदूरों की राह देखो या बिजली आने का इंतजार करो। उन्होंने टू व्हीलर बनाने वाली कंपनियों से यह मांग की है कि वे वाहनों में ऐसी सुविधा दें जिससे यह तकनीक सीधे इस्तेमाल में लाई जा सके और महिला श्रम की बचत हो।

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