धर्म के द्वारा महाविनाश को रोका जा सकता है : आचार्य मिश्र

पशु पक्षी को जो मानव बना दे वो राम : पाठक

पशु पक्षी को जो मानव बना दे वो राम : पाठक
इटारसी। संपूर्ण विश्व महाविनाश की ओर अग्रसर हो रहा है, लेकिन धर्म से इसे रोका जा सकता है। उक्त आचार्य प्रवर महेन्द्र मिश्र ने श्री द्वारिकाधीश मंदिर में आयोजित राम कथा में व्यक्त किये।
श्री राम जन्म महोत्सव समिति द्वारा आयोजित श्री रामकथा समारोह के पांचवे दिन श्री मिश्र ने कहा की आज संसार सागर को भयमुक्त बनाने का अंतिम विकल्प है, श्री राम कथा को आत्मसात करने समाज को प्रेरित करना। परिस्थितियों ने हमें ऐसी जगह लाकर खड़ा कर दिया है जहां केवल दो ही विकल्प हैं। या तो हम धर्म को चुनें या महाविनाश को। यहां मंथन करने की आवश्यकता है। महाराज श्री ने कहा कि श्रीराम जन्म उत्सव मनाने का एक ही लक्ष्य होना चाहिये श्री राम के आर्दशों का अनुसरण प्रत्येक मनुष्य के अंदर हो। आज पर्यावरण के प्रदूषण से ज्यादा हमारे जीवन मे विचारों का प्रदूषण फैला है। जब तक व्यक्ति परमात्मा की शरण में नहीं जाता तब इससे निवृति नहीं मिल सकती। इस अवसर पर मप्र विधानसभा के अध्यक्ष डॉ सीतासरन शर्मा ने भी प्रमुख श्रोता के रूप में श्री राम कथा श्रवण की।
it01417 (11)संसार सागर में जो पशु को मानवीय रूप प्रदान कर दे वह सर्व जीव प्रेमी श्रीराम है और जो यातना देकर मानव केा पशु बना दे वह रावण है। यह विचार सोनतलाई में आयोजित श्री शतचण्डी महायज्ञ एवं श्रीराम कथा समारोह में सागर के संत आचार्य पं. राकेश पाठक ने व्यक्त किये। उन्होंने कहा कि भगवान श्रीहरि ने अपने इस मर्यादामय अवतार में सबका साथ सबका विकास और सबका उद्धार वाली कार्यशैली को चरितार्थ किया। अयोध्या के योगी संत शषिभूषण दास ने कहा कि परमात्मा ने अपने इस मानव अवतार में सबका विकास और उद्धार करने ही जहां वानर, भालू रूपी सुग्रीव, जामवंत एवं पक्षीराज जटायु से मित्रता कर उन्हें देवीय व मानवीय शक्ति प्रदान की तो वहीं रावण-कुंभकरण व मेघनाद से सकारात्मक शत्रुता कर उनका उद्धार किया। संत महावीर दास ब्रहचारी ने भी राम, रावण के नाम की सुन्दर व्याया करते हुए कहा कि राम वह नाम है जो सबको उनके अधिकार दिलाता है और रावण वह नाम है जो सबके अधिकार छीन लेता है। दतिया की मानसमोधरी ज्योति सामायणी एवं छतरपुर के राघवेन्द्र जी ने भी सुन्दर संगीतमय रूप से विस्तार दिया। श्री शतचण्डी महायज्ञ में तवा नदी के दोनों छोर पर बसे दर्जनों गांव के श्रद्धालु आहुति छोड़ रहे हैं। यहां 2 अप्रैल को पंचमी तिथि की रात देवी जागरण भी होगा। संयोजक राजीव दीवान ने समस्त नर्मदांचलवासियों से उक्त आयोजन में समिलित होने का निवेदन किया है।

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