नपा के छह सौ कर्मचारियों को नहीं मिला दो माह से वेतन, सौंपा ज्ञापन

नपा के छह सौ कर्मचारियों को नहीं मिला दो माह से वेतन, सौंपा ज्ञापन

इटारसी।
एक नजर
नगर पालिका में कुल कर्मचारी – लगभग 600
नियमित कर्मचारियों की संख्या – 221
दैनिक वेतन भोगी कर्मचारी – 03
स्थायीकर्मियों की संख्या – 143
मस्टर पर कार्यरत कर्मचारी – लगभग 250

नगर पालिका के लगभग छह सौ कर्मचारियों ने विगत दो माह से वेतन नहीं मिलने से नाराज होकर आज मुख्य नगर पालिका अधिकारी के कक्ष के सामने नारेबाजी की और कक्ष में जाकर सीएमओ को वेतन दिलाने की मांग का एक ज्ञापन सौंपा। सीएमओ ने बताया कि चुंगी क्षतिपूर्ति की राशि नहीं मिली है, राशि जैसे ही आएगी सबका वेतन किया जाएगा। इसके लिए शासन से पत्राचार किया जा रहा है।
शुक्रवार को सुबह करीब 11 बजे नगर पालिका के कर्मचारियों ने अपनी कुर्सी पर जाने की बजाय सीएमओ कक्ष की तरफ जाकर वेतन दिलाने के समर्थन में जमकर नारेबाजी की। ये कर्मचारी कक्ष में पहुंचे और सीएमओ सीपी राय से मिलकर वेतन दिलाने की मांग का ज्ञापन सौंपा।


इसलिए नहीं मिला है वेतन
नगर पालिका के कर्मचारियों को वेतन का बड़ा हिस्सा राज्य शासन से मिलने वाले चुंगी क्षतिपूर्ति के अनुदान से दिया जाता है। इसके अलावा भी इस राशि से अन्य खर्च किये जाते हैं। विगत माह चुंगी क्षतिपूर्ति की राशि नगर पालिका को नहीं मिली है। इससे पहले भी जो राशि मिली थी, उसमें भारी कटौती करने की जानकारी मिली है। विगत माह राशि नहीं आने से वेतन नहीं मिल सका है और वर्तमान फरवरी माह में भी एक दिन शेष है। इस तरह से दो दिन का वेतन नहीं मिलने से कर्मचारियों के सब्र का बांध टूट गया और वे नारेबाजी करते हुए सीएमओ से मिलने पहुंच गये।

अन्य खर्चे भी हुए प्रभावित
नगर पालिका कर्मचारियों को दो माह के वेतन के अलावा अन्य खर्च भी चुंगी क्षतिपूर्ति अनुदान नहीं मिलने से प्रभावित हुए हैं। मुख्य नगर पालिका अधिकारी सीपी राय ने बताया कि न सिर्फ वेतन बल्कि नगर पालिका विगत चार माह से बिजली का बिल भी जमा नहीं कर सकी है। इसी तरह से कर्मचारियों का जीपीएफ भी जमा नहीं हो सका है। उन्होंने कहा कि जब तक चुंगी क्षतिपूर्ति की राशि नहीं मिलेगी, हम न तो कर्मचारियों का वेतन कर सकते हैं, न ही उनके जीपीएफ जमा कर सकते और ना ही बिजली का बिल जमा कर सकते हैं। हाां, यदि हमारी राजस्व वसूली अच्छी हो जाती है तो इससे कुछ हद तक भुगतान करने में आसानी हो सकती है।

ये बोले कर्मचारी नेता
दो माह होने को आये हैं, कर्मचारियों को वेतन नहीं मिला है। छोटी तनख्वाह वाले कर्मचारियों के सामने बड़ी परेशानियां आ रही हैं। इन दिनों विवाहों का समय चल रहा है, बच्चों की परीक्षा फीस, स्कूल फीस और अन्य बीमारी आदि के खर्च भी नहीं निकाल पाने से कर्ज लेना पड़ रहा है। सीएमओ को ज्ञापन दिया है, उन्होंने शासन से पत्राचार कर जल्द चुंगी क्षतिपूर्ति की राशि भेजने का निवेदन करने को कहा है।
संजय दुबे, कर्मचारी नेता
विगत दो माह से किसी भी कर्मचारी को कोई वेतन नहीं मिला है। नगर पालिका के लगभग हर प्रकार के छह सौ कर्मचारी इससे प्रभावित हुए हैं। वेतन नहीं मिलने से सबके सामने गंभीर आर्थिक संकट है। सीएमओ साहब से कई बार मौखिक निवेदन किया था। लेकिन, जब वेतन नहीं मिला तो हमें आज मजबूरी में आकर उनको ज्ञापन देना पड़ा। उन्होंने आश्वासन दिया है कि चुंगी क्षतिपूर्ति के लिए पत्र लिखेंगे।
ओम प्रकाश मालवीय, कर्मचारी नेता

नहीं बता सकते कब मिलेगा
हम शासन से पत्राचार करेंगे। चुंगी क्षतिपूर्ति की राशि नहीं आने से यह स्थिति बनी है। न सिर्फ वेतन बल्कि बिजली का बिल और कर्मचारियों के जीपीएफ की राशि भी जमा नहीं हो सकी है। कब तक देंगे, इसके विषय में मैं कुछ भी नहीं कह सकता हूं। राज्य शासन से जब भी चुंगी क्षतिपूर्ति की राशि आ जाएगी, कर्मचारियों को वेतन भी कर दिया जाएगा और जीपीएफ भी धीरे-धीरे जमा हो जाएगा।
सीपी राय, सीएमओ

चपरासियों से करा रहे चौकीदारी
नगर पालिका में चौकीदार के तौर पर चार कर्मचारी पदस्थ हैं। लेकिन, वे अपना मूल कार्य न करते हुए राजनीतिक दबाव बनवाकर अपनी ड्यूटी कार्यालय में लगवा लेते हैं और नगर पालिका के चपरासियों को चौकीदारी करनी पड़ रही है। इस स्थिति में यहां पदस्थ चपरासियों में भारी नाराजी है। शुक्रवार को नगर पालिका के चपरासियों ने भी सीएमओ को एक ज्ञापन देकर उनसे चौकीदारी नहीं कराने की मांग की है।
नपा में चौकीदारों का कहना है कि यहां पूर्व से ही चार चौकीदार नियुक्त हैं, किन्तु उनकी ड्यूटी न लगाते हुए भृत्यों की ड्यूटी रात्रिकालीन चौकीदारी कार्य के लिए लगायी जाती है जो कि उचित नहीं है। इनका कहना है कि जब भी इनकी ड्यूटी चौकीदारी में लगायी जाती है तो ये राजनैतिक दबाव बनवाकर अपनी ड्यूटी कार्यालय में लगवा लेते हैं, जबकि हमारी पास कोई भी राजनैतिक सोर्स नहीं है, हमें रात में ड्यूटी करना पड़ता है जिससे हमारे परिवार को भी परेशानी होती है। भृत्यों ने निवेदन किया है कि उनकी ड्यूटी रात्रिकालीन चौकीदार के लिए नहीं लगायी जाए।

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