न्यूज़ अपडेट : शहर के हर प्रवेश द्वार पर है पुलिस का प्रहरा

किसान आंदोलन के मैसेज ने उड़ाई प्रशासन की नींद

किसान आंदोलन के मैसेज ने उड़ाई प्रशासन की नींद
इटारसी। कृषि उपज मंडी, पथरोटा सहित शहर में प्रवेश के लगभग हर रास्ते पर पुलिस का सख़्त प्रहरा है, रेलवे स्टेशन पर पुलिस चौकस है और पुलिस के स्थानीय स्तर के सभी आला अधिकारी स्थिति पर नजरें जमाए हुए हैं। सुबह से एसडीएम अभिषेक गेहलोत और एसडीओपी अनिल शर्मा पूरे शहर में एक ही वाहन में पाइंट चेक भी कर रहे और स्थिति का आकलन भी कर रहे हैं। कृषि उपज मंडी में भी बड़ी संख्या में पुलिस जवानों को तैनात किया है तो पुलिस थाने के सामने फायर ब्रिगेड, जेसीबी मशीन, क्रेन तैनात है तो नगर सुरक्षा समिति, वन विभाग का अमला, नगर पालिका का अमला तैनात है जो किसी भी प्रकार के आदेश मिलने पर बताए गए स्थान पर पहुंचने के लिए तत्पर है।
सिटी पुलिस थाना, जीआरपी थाने में बैठकर हर पहलू पर गौर भी किया है। बता दें कि किसान आंदोलन की 10 जून की घोषणा को लेकर प्रशासन पूरी तरह से सजग और चौकस है। एक सोशल मीडिया पर वायरल हुए मैसेज ने प्रशासन की चिंता अधिक बढ़ा दी थी, यही कारण है कि प्रशासन किसी प्रकार का जोखिम नहीं उठाना चाहता है। प्रशासन किसान नेताओं से भी संपर्क में है और वास्तविकता को जानने का प्रयास भी किया जा रहा है। मैसेज वायरल होने के बाद सुरक्षा के लिए कल शाम हुई बैठक के बाद रेलवे स्टेशन सहित पूरी शहर में सुरक्षा व्यवस्था पर निगरानी रखी जा रही है। रेलवे सुरक्षा बल, शासकीय रेल पुलिस, वन विभाग, नगर सुरक्षा समिति को अलर्ट कर दिया है। एसडीएम अभिषेक गेहलोत के नेतृत्व में पूरा अमला काम कर रहा है। इटारसी हाईअलर्ट पर है। अनुविभागीय अधिकारी पुलिस अनिल शर्मा, टीआई भूपेन्द्र सिंह मौर्य, नायब तहसीलदार एनपी शर्मा, आबकारी उपनिरीक्षक आदि तैयार हैं। दमकल कर्मियों को भी तैयार रहने को कहा है।

रेल जंक्शन पर भी रेल सुरक्षा बल और जीआरपी को अलर्ट किया गया है। डीएम के निर्देश पर एसडीएम और तहसीलदार विभिन्न किसान संगठनों की गतिविधि पर नज़र रखे हुए हैं। पूरे प्रशासनिक अमले की कोशिश है कि कहीं भी तोडफ़ोड़, एनएच, राजकीय मार्ग और ट्रेन रोकने जैसी घटनाएं न हों। इन्हीं सब व्यवस्थाओं के लिए पुलिस थाने में पूरा अमला जमा हो गया है। सबको उच्च अधिकारी निर्देश दे चुके हैं, इस अमले को चिह्नित स्थानों की जानकारी दे दी गई है। सारा दिन प्रशासनिक अमले के लिए कठिन परीक्षा के रहेंगे, क्योंकि किसानों के आंदोलन का पिछले दिनों का इतिहास दोहराने नहीं दिया जाएगा।

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