मूंग खरीद व्यवस्था से फिर नाराज़ किसान

मूंग खरीद व्यवस्था से फिर नाराज़ किसान

इटारसी। जुलाई का पूरा महीना मूंग बेचने के लिए मिल जाने से शांत हुए किसान, अब अंतिम तिथि आने के बाद फिर से मंडी में अपनी उपज लेकर पहुंचने लगे हैं और यहां की व्यवस्था से नाराजी भी जता रहे हैं। खरीद व्यवस्था में किसानों की सबसे बड़ी नाराजी ग्रेडिंग को लेकर है। किसानों का कहना है कि खरीद कर रही समिति किसानों से भेदभाव कर रही है। उनकी उपज को गे्रडिंग के नाम पर रिजेक्ट कर दिया जा रहा है जबकि कुछ चहेतों का माल खरीद लिया जा रहा है। खरीद व्यवस्था की मॉनिटरिंग कर रहे तहसीलदार कदीर खान का भी मानना है कि किसानों की नाराजी तो है, लेकिन बातचीत के जरिए समाधान भी निकाल रहे हैं। उनका कहना है कि जिस किसान का माल अधिक खराब है, उसे ग्रेडिंग के लिए कहा जाता है।
प्रशासन की ये है परेशानी
किसान मूंग लेकर मंडी में आता है और यदि उपज में कचरा-मिट्टी अधिक होती है तो उसे इसकी ग्रेडिंग कराने के लिए कहा जाता है, प्रशासन का कहना है कि हम ग्रेडिंग कराने का कहते हैं जिसे किसान रिजेक्ट करना मान जाता है। उस पर जब किसी किसान की उपज को ग्रेडिंग कराने का कहा जाता है कि किसान ट्राली उस जगह से हटाकर दूसरी लाइन में खड़ी करके फिर से बेचने का प्रयास करता है, इसके बाद विवाद की स्थिति बनाने का प्रयास किया जाता है। एक किसान विरोध करता है तो वे सभी साथ आज जाते हैं जिनको ग्रेडिंग कराने का कहा जाता है।
आज भी हो गया असंतोष
कृषि उपज मंडी में आज भी समर्थन मूल्य पर मूंग खरीद के वक्त दोपहर में किसानों के बीच असंतोष हो गया था। दरअसल एक किसान की उपज में कचरा अधिक होने से उसे ग्रेडिंग के लिए कहा गया था। उस किसान ने एक बिके हुए ढेर पर पड़े कचरे की तरफ ध्यान आकर्षित करते हुए कहा कि जब यह माल खरीद सकते हैं तो मेरे माल में तो अधिक कचरा भी नहीं है, उसे क्यों नहीं खरीद रहे। दरअसल जिस ढेर की बात किसान कर रहा था, वह साफ था, लेकिन किसी ने उस पर अलग से कचरे वाली एक बोरी डाल दी थी और किसान ने इसे मुद्दा बना लिया था।
इनका कहना है…!
मैं पिछले 18 दिन से यहां आकर खरीद व्यवस्था पर नजर रख रहा हूं। जो माल अधिक खराब होता है, उसे ही ग्रेडिंग कराने का कहकर वापस किया जाता है। किसानों ने आज जो आरोप लगाए हैं, वे गलत थे। किसी ने ढेर पर अलग से कचरा डाल दिया था। बाद में किसानों ने भी मान लिया है। समिति को आदेश है कि किसानों से नरमी से पेश आएं।
कदीर खान, तहसीलदार

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