मेला आधिपत्य पर आदिवासियों को आपत्ति

मेला आधिपत्य पर आदिवासियों को आपत्ति

एसडीएम के नाम तहसीलदार को सौंपा ज्ञापन
इटारसी। तिलक सिंदूर में महाशिवरात्रि के अवसर पर लगने वाले मेले के आयोजक आधिपत्य पर मप्र आदिवासी संगठन ने आपत्ति लगाई है। एसडीएम के नाम तहसीदार को दिए ज्ञापन में संगठन ने कहा कि मेले का संचालन जनपद पंचायत केसला वर्षों से करती आयी है। इसका वनभूमि पट्टा भी ग्राम पंचायत डोबीतालपुरा के ग्राम खटामा के तहत आता है। यह आदिवासियों के कुलदेवता बड़ा देव का मंदिर है जिस पर उनके पूर्वज़ पीढ़ी-दर-पीढ़ी पूजा-अर्चना सेवा चाकरी, साफ-सफाई, पुताई करते आए हैं। यहां आयी चढ़ोतरी पर भी हमारे भोमका का ही अधिकार रहता है, परंतु कुछ समय से तिलकसिंदूर मंदिर निर्माण समिति ने भोमका को हटा दिया है जिसकी शिकायत प्रशासन को लिखित और मौखिक रूप से कई बार की जा चुकी है।
आदिवासियों की मांग है कि मेला आयोजन व संचालन जनपद केसला के माध्यम से ग्राम पंचायत करे, भोमका को वर्षभर पूजा-अर्चना, चढ़ोतरी राशि व सामग्री का अधिकार मिले साथ ही मंदिर के परंपरागत रीति-रिवाजों को यथावत रखा जाए, तिलक सिंदूर का एक ट्रस्ट बनाया जाए जिसके सर्वेसर्वा कलेक्टर और एसडीएम हों तथा क्षेत्रीय लोग सदस्य बनें। भोमका को मानदेय मिले, विकास के नाम पर हो रही चंदा वसूली बंद हो, चंदे को सार्वजनिक किया जाए और अब तक हुए विकास कार्यों का निरीक्षण हो ताकि पता चले कि ये किसने कराए हैं।
इनका कहना है…!
शुक्रवार 17 फरवरी को तिलक सिंदूर में विधायक सरताज सिंह द्वारा बैठक ली जा रही है। बैठक में सभी विभाग, मंदिर समिति भी शामिल होगी। वहां सभी बिंदुओं पर चर्चा होगी तो आदिवासियों की इस मांग को भी बैठक में रख दिया जाएगा। अभी भी एसडीएम ही अध्यक्ष हैं और उन्हीं के नेतृत्व में मेला लगता है। इससे पहले जनपद या किसी निजी समिति का अनुभव कड़वा रहा है।
कदीर खान, तहसीलदार

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