राकिम महासंघ में इस्तीफों की झड़ी, नया संगठन बनेगा

राकिम महासंघ में इस्तीफों की झड़ी, नया संगठन बनेगा

इटारसी। राष्ट्रीय किसान मजदूर महासंघ के मध्य प्रांत और होशंगाबाद जिला इकाई ने न सिर्फ पदों से इस्तीफा दे दिया बल्कि संगठन को भी छोडऩे की घोषणा कर दी है। एक साथ इतने सारे पदाधिकारी राष्ट्रीय किसान मजदूर महासंघ से अलग हुए हैं तो निश्चित रूप से एक नये संगठन की बुनियाद जल्द ही डाली जाएगी, ऐसे संकेत मिल रहे हैं।
दरअसल, जिन भी पदाधिकारियों के नाम जिलाध्यक्ष हरपाल सिंह सोलंकी ने जारी किये हैं, वे सब संगठन की कार्यप्रणाली से संतुष्ट नहीं हैं। श्री सोलंकी को कहना है कि न तो किसानों के हित में संगठन कोई कार्यक्रम चला रहा है और ना ही कोई आंदोलन हो रहा है, जबकि किसान इस समय सबसे ज्यादा परेशान है।

इन्होंने छोड़ा है संगठन
राष्ट्रीय किसान मजदूर महासंघ के जिलाध्यक्ष हरपाल सिंह सोलंकी ने बताया कि संगठन से मध्य भारत प्रांत के प्रांतीय अध्यक्ष लीलाधर राजपूत सहित प्रांतीय संगठन मंत्री बृजमोहन पटेल, प्रांतीय प्रवक्ता संतोष नागर ने भी अपने पदों से इस्तीफा देकर संगठन की सदस्यता भी छोड़ दी है। सभी ने संगठन के प्रदेश अध्यक्ष रविदत्त सिंह को अपना इस्तीफा भेज दिया है। इसके अलावा जिला संरक्षक रामेश्वर प्रसाद मीना, जिला प्रवक्ता केशव साहू, जिला सदस्य गौरीशंकर कुशवाह, जगदीश रघुवंशी, सिवनी मालवा ब्लाक अध्यक्ष संतोष पटेल, होशंगाबाद ब्लाक अध्यक्ष गणेश सिंह चौहान, केसला ब्लाक अध्यक्ष मनोज पटेल, इटारसी तहसील अध्यक्ष बृजेश चौरे, डोलरिया तहसील अध्यक्ष जयप्रकाश रघुवंशी, शिवपुर टप्पा तहसील अध्यक्ष विनोद रघुवंशी, ब्लाक उपाध्यक्ष अर्जुन पटेल, ब्लाक प्रभारी सिवनी मालवा प्रमोद गौर, सिवनी मालवा ब्लाक उपाध्यक्ष गणेश जाट, केसला ब्लाक उपाध्यक्ष गौरव मालवीय, इटारसी उपाध्यक्ष अरुण पटेल, होशंगाबाद राधेश्याम साहू, भूपेन्द्र चौरे, वीर सिंह चौहान, सरमन चौरे, जैविक कृषि प्रकोष्ठ से रूप सिंह राजपूत, गुलाब सिंह, देवेन्द्र पटेल ने संगठन से नाता तोड़ लिया है।

ये रहीं वजह
किसान नेता हरपाल सिंह सोलंकी ने बताया कि लगातार प्रदेश नेतृत्व से किसानों के हित में काम करने को कहा जाता रहा है। इन दिनों किसान काफी परेशान है। हमें संगठन की ओर से ईमानदारी और कर्मठता की उम्मीद थी जो पूरी नहीं हो सकी। जब से कमलनाथ सरकार बनी है, किसानों की परेशानी के बावजूद कोई आंदोलन नहीं, कोई मांग नहीं की गई। केवल अधिवेशन ही किये जा रहे हैं, जबकि अधिवेशन से किसानों की समस्याएं हल होने वाली नहीं हैं। ठंड के सीजन में खेतों में पंद्रह-पंद्रह दिन का बिजली का शेड्यूल रहा, किसान ठंड में पंद्रह दिन रात में परेशान हो गया, कोई सुनवाई नहीं की गई। श्री सोलंकी से जब पूछा गया कि क्या नया संगठन बनेगा? तो जवाब मिला कि निश्चित ही बनेगा। कुछ दिन में हम अपनी रणनीति तैयार करेंगे क्योंकि हमें तो किसानों के हित में संघर्ष करना ही है, घर तो नहीं बैठेंगे।

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