लिया संकल्प, इस वर्ष से खेतों में नहीं जलायी जाएगी नरवाई

लिया संकल्प, इस वर्ष से खेतों में नहीं जलायी जाएगी नरवाई

इटारसी। होशंगाबाद जिले ने पिछले वर्ष खेतों में नरवाई की आग का विकराल रूप देखा था। इसकी पुनरावृत्ति न हो, इसके लिए किसान कल्याण तथा कृषि विकास विभाग ने अभी से तैयारी प्रारंभ कर दी है। इसके लिए सबसे जरूरी काम किसानों को जागरुक करने का है, उसके लिए पहल की है। इसी श्रंखला में शनिवार को कृषक तीर्थ पवारखेड़ा में जिला स्तरीय कार्यशाला का आयोजन किया। डिप्टी डायरेक्टर जितेन्द्र सिंह की पहल पर कृषक प्रशिक्षण केन्द्र में आयोजित कार्यक्रम में जिले से बड़ी संख्या में किसानों अपनी उपस्थित दर्ज करायी और सुझाव भी प्रस्तुत किये। वक्ताओं ने जनअभियान की जरूरत बतायी तो प्रशासन ने भूसा मशीन या एसएमएस को अनिवार्य बताया। जनप्रतिनिधियों ने किसानों से नरवाई नहीं जलाने का संकल्प लेने को कहा।
जिला पंचायत अध्यक्ष कुशल पटेल ने जिले के किसानों से कहा कि इसे जन अभियान बनायें, सभी लोग मिलकर काम करें तभी सफल हो सकेंगे। इस दौरान किसानों से जैविक खेती अपनाने पर भी जोर दिया। उन्होंने सुझाव दिया कि अंतवर्तीय फसलें लगाकर नरवाई जलने से रोका जा सकता है। पूर्व जिला पंचायत सदस्य चंद्रगोपाल मलैया ने कहा कि पिछले वर्ष की घटना से सबक लेकर इस वर्ष नरवाई जलाने से रोकने के अभियान को सफल बनायें। प्रत्येक पंचायत में ट्रैक्टर, पानी के टेंकर, स्प्रे पंप आदि से तैयारी रखें। जिला पंचायत सदस्य विजय चौधरी बाबू ने कहा कि अभियान में जिला प्रशासन, राजस्व विभाग, पुलिस, पंचायत, कृषि, विद्युत, जलसंसाधन, शिक्षा, पशु पालन, उद्यानिकी, सहकारिता विभाग सहित अन्य विभागों के सहयोग से किसान संगठनों, मीडिया और पंचायत स्तर पर समितियां गठित करके इसमें सफलता प्राप्त की जा सकती है। उन्होंने पिछले वर्ष ग्राम पांजराकलॉ, रैसलपुर, तारारोड़ा सहित अन्य गांवों में हुई भीषण आगजनी को याद करते हुए कहा कि उस वक्त ऐसा लग रहा था जैसे हम शिव के दोनों रूप सौम्य और रूद्र देख रहे हैं। यदि उस दिन बारिश नहीं होती तो कई गांव और इसकी चपेट में आ सकते थे। उन्होंने कहा कि अच्छे उत्पादन में जिले को कृषि कर्मण अवार्ड मिला है, हम इस बार नरवाई नहीं जलाकर पर्यावरण, जीव की जान और मृदा को बचाने जैसे पुरस्कार प्राप्त कर सकते हैं। उन्होंने कहा कि अधिकांश घटनाएं बिजली के तारों से होती है, बिजली अधिकारी उन तारों को व्यवस्थित कराएं, भूसा मशीन हार्वेस्टर के एक दिन बाद चलाने की अनुमति हो।
उप संचालक कृषि जितेन्द्र सिंह ने बताया कि यह अभियान आयुक्त एवं कलेक्टर के निर्देश पर चलाया जा रहा है। इसका मुख्य उद्देश्य नरवाई में लगने वाली आग को रोकना है, जिसके लिए जिला प्रशासन की समस्त टीम कार्य कर रही है। इस प्रकार की कार्यशालाएं अनुविभाग स्तर, ब्लाक स्तर एवं ग्राम पंचायत स्तर पर आयोजित कर किसानों को जागरुक किया जाएगा।

एसएमएस सिस्टम से रोकेंगे
श्री सिंह ने कहा कि जिला प्रशासन के निर्देशानुसार हार्वेस्टर चालकों को हार्वेस्टर के साथ एसएमएस (एक्स्ट्रा मैनेजमेंट सिस्टम) या भूसा मशीन (स्ट्रारीपर) को लगाना होगा। साथ ही रोटावेटर, बेलर, मल्चर, टर्मिनेटर, हैप्पी सीडर आदि उन्नत कृषि यंत्रों का उपयोग करके भी नरवाई जलाने से रोका जाएगा। इसके अलावा भारतीय कृषि अनुसंधान परिषद पूसा नई दिल्ली से निकली पूसा डीकंपोजर कैप्सूल का उपयोग करके नरवाई को खेत में गलाकर खाद बनायी जा सकेगी।
राष्ट्रीय किसान मजदूर संघ के प्रांताध्यक्ष लीलाधर सिंह राजपूत ने जिला प्रशासन की इस पहल की सराहना कर इसे ग्राम पंचायत स्तर तक जोडऩे का सुझाव दिया। कृषि महाविद्यालय पवारखेड़ा के डीन एवं जोनल कृषि अनुसंधान केन्द्र के संचालक डॉ.पीसी मिश्रा ने कहा कि किसान यदि इसी तरह आग लगाते रहे तो वह दिन दूर नहीं जब एशिया की सबसे उपजाऊ मिट्टी धीरे-धीरे ईंट जैसे कड़ी हो जाएगी और खेती करने लायक नहीं बचेगी। कार्यशाला में किसान कांग्रेस के राष्ट्रीय संयोजक कुलदीप पटैल, राकिमसं के जिलाध्यक्ष राकेश गौर, भारतीय किसान संघ के रामेश्वर जाट, राकेश दुबे, प्रगतिशील कृषक हेमंत दुबे जमानी, अशोक पटेल बनाड़ा, संजीव मल्हानी बनखेड़ी, महेश पटैल पांजराकलॉ, दीपक दुबे, अभिषेक दुबे, शंभूदयाल पटेल, प्रशांत चौधरी जमानी, बालकृष्ण पालीवाल बनापुरा ने भी संबोधित किया। इस अवसर पर आत्मा परियोजना संचालक एमएल दिलवारिया, जिला व्यापार एवं उद्योग केन्द्र जीएम मंसूरी, एसडीओ एसटीआर यादव, पशु चिकित्सा विभाग से डॉ. संजय अग्रवाल, कृषक प्रशिक्षण केन्द्र के सहायक संचालक उपेन्द्र शुक्ला, दीपक बासवानी, कार्यपालन यंत्री तवा आईडी कुमरे, इंडियन पोटाश लिमिटेड के प्रबंधक नीतिश शर्मा, विजेन्द्र सिंह, सहायक संचालक कृषि जेएल कासदे, योगेन्द्र बेड़ा, राजीव यादव, अर्चना परते सहित अनेक अधिकारी और किसान उपस्थित थे।

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