वकीलों ने क्यों कहा कि वे 24 को न्यायालयीन कार्य नहीं करेंगे

वकीलों ने क्यों कहा कि वे 24 को न्यायालयीन कार्य नहीं करेंगे

इटारसी। लॉ कमीशन की सिफारिशों के विरोध में शुक्रवार 24 मार्च को राज्य के अधिवक्ता अपने न्यायालयीन कार्य से विरत रहेंगे।
इटारसी में भी अभिभाषक संघ ने अपने सदस्यों को इसकी सूचना देकर कहा है कि मप्र राज्य अधिवक्ता परिषद जबलपुर के आह्वान पर वे अपने कार्य से विरत रहें। संघ के अध्यक्ष आरबी पांडेय ने कहा है कि लॉ कमीशन की सिफारिशों का विरोध किया जाएगा। सरकार ने अधिवक्ताओं की स्वतंत्रता समाप्त करने के आशय से लॉ कमीशन से सिफारिश करायी है जिसका राज्य अधिवक्ता परिषद द्वारा विरोध किया जा रहा है परंतु सरकार ने विरोध को स्वीकार नहीं किया है इसलिए प्रदेश के समस्त अधिवक्ता सरकार की इस सिफारिश का विरोध करते हुए अपने न्यायालयीन कार्य से विरत रहेंगे।
राज्य अधिवक्ता परिषद की ओर से अभिभाषक संघ को मिले पत्र में कहा गया है कि अधिवक्ताओं की स्वतंत्रता को छीनने के लिए अधिवक्ताओं के विरुद्ध अनुशासनात्मक कार्यवाही हेतु सरकार के स्वतत्रता आयोग बनाने का निर्णय व उनकी प्रक्रिया के विरुद्ध मप्र राज्य अधिवक्ता परिषद ने लॉ कमीशन के पास अपना विरोध दर्ज कराके यह निवेदन किया था कि अधिवक्ताओं के अनुशासन के आदेश अधिवक्ता अधिनियम 1961 की धारा 35 के तहत पारित किए जाते हैंख् उसकी अपील अंतिम तौर पर उच्चतम न्यायालय निराकृत करती है, इसलिए इसमें काई हस्तक्षेप की जरूरत नहीं है। न्यायपालिका व विधायिका दोनों को अभिभाषक की स्वतंत्रता में हस्तक्षेप करने की विधि एवं नैतिक आवश्यकता नहीं है, लेकिन उक्त सुझा को लॉ कमीशन ने न मानते हुए अधिवक्ताओं की स्वतंत्रता को छीनने के लिए एक न्यायपालिका व विधायिका से जुड़े व्यक्तियों का आयोग बनाने का सुझाव दिया है। इसके विरोध में 24 मार्च को प्रदेश के समस्त अधिवक्ता न्यायालयीन कार्य से विरत रहेंगे तथा अपने-अपने मुख्यालय के प्रमुख न्यायालयीन अधिकारी के माध्यम से राष्ट्रपति को ज्ञापन भेजेंगे। ज्ञापन में राष्ट्रपति से मांग की जाएगी कि वे अभिभाषकों की स्वतंत्रता को छीनने के प्रयास को रोकें और लॉ कमीशन की रिपोर्ट तुरंत वापस करने की सलाह संबंधित को दें।

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