शिव ने तीसरा नेत्र खोला तो ये कहीं के नहीं रहेंगे : शास्त्री

शिव ने तीसरा नेत्र खोला तो ये कहीं के नहीं रहेंगे : शास्त्री

इटारसी। श्री पशुपतिनाथ धाम परिसर में श्री शिव महापुराण में कथा को विस्तार देते हुए आचार्य मधुसूदन शास्त्री ने कहा कि जीवन में सत्य को पाना बहुत सरल है, अमल कठिन है। सत्य पर अमल करने के कारण राजा हरीशचंद को क्या-क्या नहीं भोगना पड़ा, प्रभु श्रीराम को राजा दशरथ के दिए वचन पर 14 वर्ष वन को जाना पड़ा और पांडवों को भी सत्य के राह पर चलते हुए हस्तनापुर छोडऩा पड़ा।
उन्होंने कहा कि जीवन में न्याय और अन्याय को समझने में बहुत ज्यादा समय नहीं लगता है, लेकिन न्याय प्रिय राजा से भी यदि भूलवश भी अन्याय हो जाए जिसे हम अधर्म भी कह सकते हैं, उसका परिणाम उसे भोगना पड़ता है। राजा परीक्षित को यह भोगना पड़ा। हमें कब, कहां और क्या बोलना चाहिए इसे लेकर भी जुबान पर नियंत्रण रखना चाहिए। मंथरा के द्वारा केकई को समझाना बुद्धिमत्ता नहीं थी और उसका परिणाम रघुवंश ने भोगा। द्रोपदी के केशलोचन में दुर्योधन को हस्तनापुर खोना पड़ा। शिशुपाल को जीवन से हाथ धोना पड़ा और मथुरा के राजा कंस को अपनी सत्ता के अंहकार के कारण कृष्ण के हाथों मरना पड़ा।
इस महापुराण में 12 ज्योर्तिलिग सोमनाथ, मल्लिकार्जुन, महाकालेश्वर, ओमकारेश्वर, केदारनाथ, भीमाशंकर, वैद्यनाथ, त्रयम्बकेश्वर, काशी विश्वनाथ, नागेश्वर, रामेश्वर, घृष्णेश्वर ज्योर्तिलिगों की कथाओं का संक्षिप्त में वर्णन किया। महाशिवरात्रि पर्व के संबंध में कहा कि फाल्गुन कृष्ण चतुर्दशी को पर्व मनाया जाता है। सृष्टि का प्रारंभ अग्नि लिंग के उदय से इसी दिन हुआ था। भगवान शिव सृष्टि के पालक और संहारक दोनों हैं। 108 फीट ऊंचे भगवान पशुपतिनाथ मंदिर के प्राण प्रतिष्ठा के एक वर्ष पूर्ण होने के अवसर पर यजमान मेहरबान सिंह चौहान ने कहा कि भगवान पशपतिनाथ के गर्भगृह में द्वादश ज्योर्तिलिंगो की स्थापना शीघ्र ही की जाएगी। उन्होंंने कहा कि भगवान प्शुपतिनाथ की 108 फीट ऊंची प्रतिमा पूरे नर्मदापुरम संभाग में कहीं भी नहीं है। पशुपतिनाथ धाम के संबंध में उन्होंने कहा कि निकट भविष्य में यहां पर गौशाला, वृद्धाश्राम एवं गुरूकुल की स्थापना की जाएगी। गुरूवार को प्रात: 9 बजे से लगभग 1000 महिलाओं ने पार्थिव रूद्री निर्माण किया एवं दोपहर 2 बजे से उनका पूजन और अभिषेक किया। शुक्रवार को आयोजन स्थल पर सांयकाल 6 बजे से कृष्ण की महारासलीला का मंचन होगा एवं 22 फरवरी को शिवलीला शिव चरित्र एवं भगवान शंकर एवं कृष्ण के मोहक नृत्य होंगे।

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