श्रीमद् भागवत सकाम भाव से नहीं सुनी जाती : शास्त्री

श्रीमद् भागवत सकाम भाव से नहीं सुनी जाती : शास्त्री

इटारसी। कलचुरी भवन में 7 दिनों से चल रही श्रीमद् भागवत कथा ज्ञानयज्ञ समारोह का समापन शनिवार को हो गया। नालंदा एजुकेशन सोसायटी एवं चौकसे परिवार द्वारा आयोजित श्रीमद् भागवत कथा के सातवे दिन हवन, पूजन, कन्या भोज एवं भंडारे के साथ कथा का विश्राम हुआ।
आयोजकों की ओर से प्रवचनकर्ता पं. मधुसूदन शास्त्री का शॉल श्रीफल से सम्मान किया। नालंदा एजुकेशन सोसायटी के अध्यक्ष अजय चौकसे ने कहा कि हमारी सोसायटी और परिवार का यह सौभाग्य है कि श्रीमद् भागवत कथा के सात दिवसीय आयोजन को ईश्वर की कृपा से हम सफलतापूर्वक कर सकें। जिला पत्रकार संघ के अध्यक्ष प्रमोद पगारे ने अपने संबोधन में कहा कि पूज्य आचार्य पं. मधुसूदन शास्त्री ने कम उम्र में नर्मदांचल में धर्म कथाओं को लेकर अपना नाम स्थापित किया है। पगारे ने कहा कि श्रीमद् भागवत कथा, रामकथा, देवीपुराण, शिवपुराण में आचार्य मधुसूदन शास्त्री ने अपनी योग्यता प्रमाणित की है और 200 से अधिक स्थानों पर सभी धर्म कथाएं नर्मदांचल सहित प्रदेश एवं देश में कर चुके हैं।
व्यासपीठ से विदाई लेते हुए पं. मधुसूदन शास्त्री ने कहा कि न्यास कॉलोनी स्थित श्री सांई मंदिर से उन्होंने कथाओं का प्रवचन प्रारंभ किया था और प्रभु की कृपा और आप सभी लोगों के स्नेह से 200 से अधिक धर्म कथाएं वह कर चुके हैं। उन्होंने कहा कि श्रीमद् भागवत पुराण कलयुग में भगवान का ही रूप है। कथा के विश्राम दिवस पर उन्होंने कहा कि श्रीमद् भागवत का पूजन एवं पाठन सकाम नहीं किया जाता। कर्म के फल की इच्छा किए बगैर जो भी व्यक्ति चाहे वह महिला हो या पुरूष श्रीमद भागवत का श्रवण करते है उन्हें फल की इच्छा नहीं करना चाहिए। आचार्य पं. मधुसूदन शास्त्री ने विश्राम दिवस पर सुदामा चरित्र के प्रसंग के साथ कथा का विश्राम किया और कहा कि मित्रता कृष्ण से सीखना चाहिए। जिसमें सुदामा जैसे निर्धन को भी भगवान कृष्ण ने अपनाया और सुदामा को भी वही एश्वर्य प्रदान किया जो स्वंय उनके पास था। समापन अवसर पर राधाबाई चौकसे सहित अभिनय चौकसे, वैशाली चौकसे, अनुराग एवं दीपिका चौकसे, मनीष एवं सरिता चौकसे, दिनेश एवं भारती चौकसे, अजय चौकसे एवं अंचल चौकसे, उमेश एवं भारती चौकसे ने आचार्य श्री की विदाई की। भंडारे का प्रसाद सभी को वितरित किया।

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