समर्पित भाव से ही पाया जा सकता है परमात्मा को

श्री द्वारिकाधीश बडा मंदिर में श्रीमद् भागवत कथा  
इटारसी। जो भी मनुष्य समर्पित भाव से परमात्मा की भक्ति करते हैं, जीवन उन्हीं का सफल होता है। उक्त ज्ञानपूर्ण उद्गार संदलपुर के आचार्य पं. विवेकानंद तिवारी ने श्री द्वारिकाधीश बड़े मंदिर में आयोजित श्रीमद् भागवत कथा महोत्सव के प्रथम दिन में व्यास गादी से व्यक्त किये।
आषाढ़ माह के पावन अवसर पर नगर के सामाजिक कार्यकर्ता प्रमोद पगारे, रमेश सेठी कल्लू भैया, नारायण सेन, नारायण दुन्धवी, कादर जैन, धनराज कुशवाह, शंकर तिवारी एवंं राजेश वर्मा मुन्ना भट्टी द्वारा अपने-अपने पूवर्जों की स्मृति में सार्वजनिक रूप से आयोजित श्रीमद् भागवत कथा के शुभारंभ अवसर पर सर्वप्रथम एक शोभायात्रा निकाली। सभी आयोजकों एवं यजवानों ने व्यास पीठ की पूूजा अर्चना कर आचाय विवेकानंद तिवारी का स्वागत किया। व्यास पूजन और स्वागत पश्चात आचार्य श्री तिवारी ने प्रथम दिवस में श्री हरिकथा को विस्तार देते हुए कहा कि जब भी कोई सत्संग रूपी भक्ति कार्य होता है, परमात्मा वहा अपने होने का प्रमाण देता है, जो अचानक हुई तेज बारिश के रूप मे दिखाई दे रहा है।
आचार्य विवेकानंद ने कहा कि जब तक जीव ईश्वर के प्रति समर्पित नहीं होगा, तब तक वह ईश्वर को पा नहीं सकता। संतों और ऋषि मुनियों ने भी कहा है कि जिस पर ईश्वर परमात्मा श्री हरि की कृपा होती है, वही जीवन में सफल भी होता है। इस प्रकार परमात्मा की भक्ति के और भी प्रसंग आचार्य विवेेकनंद ने अपनी मधु वाणी से उपस्थित श्रोताओं को संगीतमय भजनों के साथ श्रवण कराये। बड़े मंदिर में यह भागवत कथा समारोह प्रतिदिन दोपहर दो बजे से शाम 6 बजे तक आयोजित होगा।

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