धर्म की स्थापना में अधर्म का भी योगदान : पांडे

धर्म की स्थापना में अधर्म का भी योगदान : पांडे

इटारसी। संसार में धर्म की स्थापना में झूठ रूपी अधर्म का भी अहम योगदान है, जो सतयुग से लेकर वर्तमान कलयुग तक चला आ रहा है। उक्त उद्गार भागवत कथा वाचक पं. जगदीश पांडे (Pt. Jagdish Pandey) ने ग्राम घाटली (Village Ghatli) में व्यक्त किए।दुर्गा मंदिर (Durga Mandir) प्रांगण घाटली में सार्वजनिक सहयोग से आयोजित श्रीमद् भागवत कथा (Shrimad Bhagwat Katha) समारोह ज्ञान यज्ञ के चतुर्थ दिवस में श्री राम (Shri Ram) एवं श्री कृष्ण (Shri Krishna) जन्म प्रसंग के माध्यम से धर्म की महत्वता का सकारात्मक वर्णन करते हुए श्री पांडे ने कहा कि हर युग में बढ़ते अधर्म और अत्याचार के विनाश के लिए परमात्मा श्री हरि (Shri Hari) ने विविध स्वरूपों में अवतार धारण किया है और अधर्म का नाश कर धर्म की स्थापना की है लेकिन यह भी सच्चाई है कि अधर्म के विनाश में अधर्म का ही सहयोग स्वयं परमात्मा को भी लेना पड़ा है जिसका प्रत्यक्ष उदाहरण भस्मासुर वाली एवं महाभारत युद्ध में तो कौरव सेना के सभी सेनापति के बाद में अधर्म की ही भूमिका रही है। अत: धर्म की स्थापना के लिए अधर्म का सहारा लिया जा सकता है, परंतु जीवन पथ संचलन के लिए अधर्म को अपनाना उचित नहीं है। इस ज्ञान पूर्ण प्रसंग के साथ ही पंडित जगदीश पांडे ने सांसारिक ज्ञान के भजन भी अपनी संगीत समिति के माध्यम से मधुर आवाज में प्रस्तुत किए।

चतुर्थ दिवस की कथा के अंतिम प्रहर में श्री कृष्ण जन्मोत्सव हर्षोल्लास पूर्वक मनाया गया। भगवान बालकृष्ण की भव्य शोभायात्रा गाजे बाजे के साथ गांव की गलियों से निकाली गई। महिलाओं ने लोकगीत गाकर एवं सामूहिक नृत्य कर भगवान श्री कृष्ण जन्मोत्सव की खुशियां मनाई वृंदावन रूपी कथा पंडाल में दही माखन की मटकी फोड़ी गई इसमें समस्त ग्राम वासियों का अनुकरणीय योगदान रहा।
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AUTHORRohit

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