नज़्म: हमराह बनने की चाहत…

नज़्म: हमराह बनने की चाहत…

हमराह बनने की चाहत
दिल में रही
पर एक इनायत कर
कि…
तेरे अश्कों के
हकदार हम बनें

हमदम तो न बन सके
पर एक आरजू है
कि…
तेरे गमगुसार हम बनें

हमनवां की ख्वाहिश
अधूरी रही
पर एक तमन्ना है
कि…
तेरी हर गुफ्तगू में
ज़िक्र – ए – यार हम बनें ।

– गमगुसार _ हमदर्द

अदिति टंडन
आगरा

 

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