नज़्म: जैसे ही…तुम प्यार से

नज़्म: जैसे ही…तुम प्यार से

जैसे ही
तुम प्यार से

नाम लिखते हो हमारा
देखो न
ये पल कैसे थम जाते हैं

चांदनी रात में
जब तुम
सितारों भरा आंचल
थामते हो
देखो न
कैसे ये कदम रुक जाते हैं

जब तुम
यह कहते हो कि
अब्र – ए – हिज्र
न बरसेंगे अब तो
देखो न
शबनम के कतरे
कैसे जम जाते हैं

हमसाया बन कर
साथ रहने का वादा
जब तुम करते हो
देखो न
कैसे ये रास्ते ठहर जाते हैं।

अदिति टंडन
आगरा 

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