नज़्म: ये तन्हाई का आलम

नज़्म: ये तन्हाई का आलम

ये तन्हाई का आलम
ये दर्द के साए
कितना तड़पाते हैं
दिल – ए – नादान को .

ये इंतजार का सितम
ये आंखों से गिरते मोती
कितना बेबस करते हैं
दिल – ए – रंजूर को .

ये अब्र से बरसती उदासी
ये बेकसी बढ़ाती शामें
कितना बैचैन करते हैं
दिल – ए – नाशाद को.

अदिति टंडन (Aditi Tandan)
आगरा 

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