इटारसी। भारत सरकार ने बिजली के बिलिंग सिस्टम में एक बड़ा बदलाव किया है, जिसे ‘टाइम ऑफ डे’ टैरिफ सिस्टम कहा जाता है। इस सिस्टम के तहत, बिजली की कीमत अब पूरे दिन एक जैसी नहीं रहेगी, बल्कि आपके उपयोग के समय के आधार पर बदल जाएगी।
कब से होगा लागू?
- व्यावसायिक और औद्योगिक उपभोक्ताओं (10 किलोवाट से अधिक मांग वाले) के लिए : 1 अप्रैल 2024 से।
- अन्य सभी उपभोक्ताओं (कृषि उपभोक्ताओं को छोडक़र, जिसमें घरेलू उपभोक्ता शामिल हैं) के लिए : 1 अप्रैल 2025 से।
- जिन उपभोक्ताओं के यहां स्मार्ट मीटर लगे हैं, उनके लिए यह टैरिफ मीटर लगने के तुरंत बाद प्रभावी हो जाएगा।
समय के हिसाब से कीमत
- Tod टैरिफ सिस्टम में दिन को मुख्य रूप से तीन हिस्सों में बांटा गया है, जिसकी दरें इस प्रकार होंगी।
- पीक आवर्स (Peak Hours) : सामान्य टैरिफ से 10 प्रतिशत से 20 प्रतिशत तक अधिक 7 बिजली की मांग सबसे ज़्यादा होने पर
- सोलर आवर्स (Solar Hours) : सामान्य टैरिफ से 10 प्रतिशत से 20 प्रतिशत तक कम, दिन के समय जब सौर ऊर्जा भरपूर होती है (आमतौर पर 8 घंटे)
- सामान्य आवर्स (Normal Hours) : सामान्य टैरिफ दर, शेष समय
- राज्यों और स्थानीय बिजली नियामक आयोगों द्वारा तय किए जाएंगे।
- उपभोक्ताओं को लाभ : 15-20 प्रतिशत की बचत संभव
केंद्रीय बिजली मंत्री के अनुसार, ToD सिस्टम उपभोक्ताओं और पावर ग्रिड दोनों के लिए फायदेमंद है।
- बिल में कमी : यदि उपभोक्ता अपने ज़्यादा बिजली खपत वाले कामों को पीक आवर्स (महंगे समय) से सोलर आवर्स या ऑफ-पीक आवर्स (सस्ते समय) में स्थानांतरित करते हैं, तो वे अपने बिजली बिल में 10 प्रतिशत से 20 प्रतिशत तक की बचत कर सकते हैं।
- ग्रिड पर दबाव कम : दिन के महंगे समय में बिजली का कम उपयोग होने से ग्रिड पर दबाव कम होगा और सिस्टम की दक्षता बढ़ेगी।
- नवीकरणीय ऊर्जा को बढ़ावा : सोलर आवर्स में कम टैरिफ होने से उपभोक्ता सौर ऊर्जा के उपयोग को प्रोत्साहित करेंगे।
स्मार्ट मीटर की भूमिका
इस सिस्टम को प्रभावी ढंग से लागू करने के लिए स्मार्ट मीटर जरूरी हैं। ये मीटर हर समय के हिसाब से बिजली की खपत को रिकॉर्ड करेंगे, जिससे सही टैरिफ लगाया जा सकेगा। सरकार का लक्ष्य 2026 तक 250 मिलियन स्मार्ट मीटर लगाने का है।








