नहर के तट पर मनाया उत्तर भारतीय समाज ने छठ पूजा का महापर्व

नहर के तट पर मनाया उत्तर भारतीय समाज ने छठ पूजा का महापर्व

जलधारा में खड़े होकर अस्तांचल सूर्य को दिया जल अघ्र्य

इटारसी। लोक आस्था और सूर्य उपासना (Surya Upasna) का पर्व सूर्यषष्ठी के मौके पर आज पथरोटा नहर पर हिंदू धर्म संस्कृति में जनआस्था के प्रमुख त्यौहारों में से छठ पूजा (Chhath Puja) का महापर्व आज शुक्रवार को उत्तर भारतीय समाज अस्तांचल सूर्य को अघ्र्य दिया।
पथरोटा के पास से निकलने वाली तवा नहर पर बिहारी कालोनी में शुक्रवार की शाम को इटारसी और आसपास के उत्तर भारतीय परिवारों का सामाजिक समागम हुआ। पथरोटा नहर तट पर बने छठी मैया के चबूतरों को आज बड़े बड़े पूजा पंडालों के रूप में सजाया था, जहां बैठकर छठ व्रत धारण करने वाली महिलाएं फल-फूल और मिष्ठानों से छठ मैया की पूजा अर्चना कर रही थीं तो अनेक उपासक नहर की बहती जलधारा में खड़े होकर अस्त होते सूर्य को अघ्र्य दे रहे थे।


अनेक श्रद्धालुओं ने गन्ने के पूजा पंडाल पानी में ही बना रखे थे और पानी में खड़े होकर विधि विधान से भगवान भास्कर की आराधना की जा रही थी। सूर्य अस्त के समय पथरोटा नहर का यह पावन तट आस्था का स्थल भी नजर आ रहा था। इस संबंध में छठ उपासक सरस्वती देवी ने बताया कि हम अपने मालिक यानी पति, अपने पुत्र व पौत्रों के दीर्घायु जीवन की कामना के लए तीन दिन तक उपवास रखकर पूजा करते हैं। सीता देवी सिन्हा ने बताया कि सभी सुहागिन महिलाएं व्रत धारण सुहाग की डलिया सजाते हैं। इस डलिया में यहां छठी मैया के चबूतरे पर अपर्ण कर पूजा करते हैं। जल में खड़े होकर अघ्र्य देे रही साधना ठाकुर ने बताया कि छठ पूजा का यह पर्व पारिवारिक सुख शांति के साथ ही वंश की वृद्धि के लिए किया जाता है। छठ पूजा के चार दिवसीय त्योहार का आज तीसरा और मुख्य दिवस था। शनिवार को उगते हुए सूर्य को अघ्र्य देने के साथ यह महापर्व संपन्न होगा।

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