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ओणम : जानें शुभ मुहूर्त, पूजन विधि, महत्‍व सम्‍पूर्ण जानकारी 2022

ओणम : जानें शुभ मुहूर्त, पूजन विधि, महत्‍व सम्‍पूर्ण जानकारी 2022

ओणम त्‍यौहार क्यों मनाया जाता है ? जाने तिथि, शुभ मुहूर्त, पूजा विधि, कथा सम्‍पूर्ण जानकारी  

ओणम त्‍यौहार (Onam Festival)

ओणम त्‍यौहार केरल राज्य में मनाये जाने वाले प्रमुख हिंदू त्‍यौहारों में से एक है। हिंदी पंचांग के अनुसार यह त्‍यौहार श्रावण शुक्ल की त्रयोदशी को मनाया जाता है, जोकि अगस्त या सितम्बर माह में आता है। यह त्‍यौहार राजा महाबली के याद में मनाया जाता हैं।

इस दिन को लेकर ऐसी मान्‍यता है कि ओणम के दिन राजा बलि की आत्मा केरल आती है। इस त्‍यौहार पर पूरे केरल राज्य में सार्वजनिक अवकाश होता है और इस दिन कई प्रकार के सांस्कृतिक तथा मनोरंजक कार्यक्रम आयोजित किये जाते है।

ओणम त्‍यौहार शुभ मुहूर्त 2022 (Onam Festival Auspicious Time 2022)   

  • इस वर्ष ओणम त्‍यौहार दिनांक 30 अगस्त, 2022 दिन मंगलवार से 9 सितंबर 2022, शुक्रवार तक मनाया जायेगा ओणम त्यौहार में थिरुवोनम दिन सबसे महत्वपूर्ण होता है, जो 8 सितम्बर को हैं।
  • पंचांग के अनुसार, थिरुवोणम् नक्षत्र का प्रारंभ 07 सिंतबर दिन बुधवार को शाम 04:00 बजे से होगा और 08 सितंबर गुरुवार को दोपहर 01: 46 बजे तक रहेगा।
  • हिंदू कैलेंडर के अनुसार इस दिन भाद्रपद माह के शुक्ल पक्ष की त्रयोदशी तिथि होगी, जो रात 09 : 02 बजे तक हैं त्रयोदशी तिथि के प्रतिनिधि देव भगवान शिव हैं।

ओणम पूजा विधि (Onam Worship Method) 

  • ओणम के दिन सुबह स्नानादि के बाद मंदिर जाकर भगवान विष्णु की पूजा की जाती है।
  • इस व्रत में नाश्ते में केवल केला पापड़ खाया जाता है।
  • ओणम के हर दिन का एक खास महत्व हैं इस त्योहार में लोग अपने घरों को 10 दिनों तक फूलों से सजा कर रखते हैं।
  • पूरे विधि-विधान से भगवान विष्णु और बलि की पूजा की जाती हैं।
  • दक्षिण भारत के लोग यह मानते हैं कि ओणम के पहले दिन राजा बलि पाताल लोक से धरती पर आते हैं और अपनी प्रजा के सभी कष्‍टों को दूर करते हैं।

ओणम त्‍यौहार क्यों मनाया जाता है (Why is Onam Festival Celebrated)

ओणम

ओणम मलयाली के प्रमुख त्‍यौहारों में से एक है। इस त्‍यौहार को मलयाली लोगों के द्वारा बहुत ही उत्साह के साथ मनाया जाता है। इस त्‍यौहार पर सबसे सुंदर कार्यक्रम केरल में होता है, लेकिन करेल के साथ अन्‍य राज्‍यो मे भी इस त्‍यौहार को बडी धूम-धाम के साथ मनाया जाता है। साथ ही इस त्‍यौहार की एक विशेषता यह भी है कि इस दिन लोग मंदिरों में नही, बल्कि की अपने घरों में पूजा-पाठ करते।

ओणम त्यौहार का महत्व (Importance of Onam Festival)

ओणम

पौराणिक मान्यताओ के अनुसार जिस राजा महाबलि से भगवान विष्णु ने वामन अवतार लेकर तीन पग में तीनों लोको को माप लिया था। वह असुरराज राजा बलि केरल के ही राजा थें और ओणम का यह पर्व उन्हीं को समर्पित है। ऐसी भी मान्यता है कि इन त्योंहार में तीन दिनों के लिए राजा महाबलि पाताललोक से पृथ्वी पर आते है और अपनी प्रजा के नई फसल के साथ उमंग तथा खुशियां लाते है।

यहीं कारण है इस त्योहार पर लोग अपने घरों के आंगन में राजा बलि की मिट्टी की मूर्ति भी बनाते है। लोगों का मानना है कि ओणम त्यौहार के दौरान राजा महाबली अपनी प्रजा से मिलने, उनके हाल चाल, खुशहाली जानने के लिए हर साल केरल राज्य में आते है। राजा बलि के सम्मान में यह त्यौहार प्रतिवर्ष मनाया जाता है।

ओणम त्यौहार के 10 दिन (10 Days of Onam Festival)

ओणम

अथम : इस त्‍यौहार का सबसे पहला दिन अथम होता है। इस दिन राजा महाबलि के स्वागत के लिये फूलों की रंगोली बनाई जाती है।

चिथिरा : ओणम का दूसरे दिन चिथिरा होता है। इस दिन पूजा-पाठ से ही दिन की शुरूआत करते हैं।

चोढ़ी : ओणम के तीसरे दिन घर में कोई खास कार्यक्रम नहीं होता है, इस दिन केवल खरीददारी की जाती है।

विसकम : इस दिन पूरे घर को सजाया जाता है। महिलाएं आचार डालती हैं और पापड़ बनाती हैं।

अनिज़्हम : ओणम का यह दिन सबसे खास होता है। इस दिन केरल मे बोट रेस होती है। इस रेस को वल्लमकली कहा जाता है। और जीतने वाले को इनाम दिया जाता है।

थ्रिकेटा : इस दिन सभी लोग आपस में मिलते हैं। एक-दूसरे को गिफ्ट देते हैं और कई कार्यक्रम भी प्रस्तुत किये जाते हैं।

मूलम : इस दिन मंदिरों में भंडारा का आयोजन किया जाता है साथ ही रंगोली को नए तरीके से सजाया जाता है।

पुरदम : इस दिन भगवान विष्णु के अवतार वामन और राजा महाबलि की मिट्टी की मूर्तियां बनाई जाती है।

उत्तरदम : इसे वास्तम में पहला ओणम कहा जाता है। इस दिन महाराज महाबलि के लिये फूलों का गलीचा सजाया जाता है।

थिरु ओणम : ओणम के अंतिम दिन को दूसरा ओणम भी कहा जाता है। इस दिन पूरे केरल में ओणम की धूम रहती है। लोग सुबह जल्दी उठ कर स्नान करते हैं। नए कपड़े डालते हैं। भगवान की पूजा करते हैं। पूरा दिन खाने पीने और नाचने गाने का कार्यक्रम चलता है।

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ओणम पर्व से जुड़ी कथा (Story Of Onam Festival)

पौराणिक कथा के अनुसारी राजा बलि, पहलाद के पोते थे पहलाद जो असुर हिरन कश्यप के बेटे थे, लेकिन फिर भी वे भगवान विष्णु के भक्त थे अपने दादा की तरह बलि भी बचपन से ही भगवान विष्णु के परम् भक्त थे। राजा बलि पराक्रमी, न्यायप्रिय, और हमेशा प्रजा का भला चाहने वाले राजा थे। राजा महाबलि धरती एवं स्वर्ग पर राज्य किया करते थे।

धरती पर उनकी प्रजा उनसे अत्याधिक प्रसन्न रहती थी, जिसके कारण राजा बलि में घमंड आने लगा था। ब्रह्मांड में बढ़ती असुरी शक्ति को देख बाकि देवी देवता घबरा गए, उन्होंने इसके लिए भगवान विष्णु की मदद मांगी भगवान विष्णु इसके लिए मान गयें। भगवान विष्णु, बलि को सबक सिखाने के लिए, अदिति के बेटे के रूप में ‘वामन’ बन कर जन्म लेते है जो भगवान विष्णु के पांचवें अवतार है।

एक बार बलि अपने सबसे ताकतवर शस्त्र को बचाने के लिए, नर्मदा नदी के किनारे अश्व्मेव यज्ञ करते है इस यज्ञ की सफलता के बाद तीनों लोकों में असुर शक्ति और अधिक ताकतवर हो जाती। बलि बोलते है, इस यज्ञ के दौरान उनसे जो कोई जो कुछ मांगेगा उसे दे दिया जायेगा इस बात को सुन वामन इस यज्ञ शाला में आते है ब्राह्मण के बेटे होने के कारण महाबलि उन्हें पूरे सम्मान के साथ अंदर लाते है।

बलि वामन से बोलता है वे उन्हें उपहार में क्या दे सकता है वामन मुस्कराते हुए कहते है, मुझे ज्यादा कुछ नहीं चाहिए, बस मुझे तो 3 डग जमीन दे दो। ये बात सुन बलि समझ जाते है कि ये कोई साधारण बालक नहीं है, तभी वामन, बलि को उनकी इच्छा पूरी न करने को कहते है लेकिन बलि अपने वचनों के पक्के थे, उन्होंने वामन को हाँ कर वामन से अपनी इच्छा अनुसार भूमि लेने के लिए बोलते है।

यह बात सुनकर वामन अपने विशाल रूप में आ जाते है उनके पहले कदम में सारी धरती, उनके दुसरे कदम में स्वर्गलोक और तीसरे कदम के लिए राजा के पास कुछ नहीं होता है, तो अपने वचन को पूरा करने के लिए, राजा अपना सर वामन के पैर के नीचे रख देते है ऐसा करते ही, राजा बलि पाताल लोक में समां जाते हैंं।

पाताललोक में जाने से पहले बलि से एक इच्छा पूछी जाती है तभी बलि भगवान विष्णु से कहते है कि हर साल धरती में ओणम का त्यौहार उनकी याद में मनाया जाए, और उन्हें इस दिन धरती में आने की अनुमति दी जाये, ताकि वे यहाँ आकर अपनी प्रजा से मिलकर, उनके सुख दुःख को जान सकें।

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