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प्रताड़ना के खिलाफ एकजुट पंचायत कर्मचारी, धरना पर बैठे

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इटारसी। पंचायत एवं ग्रामीण विकास विभाग (Panchayat and Rural Development Department)अधिकारी-कर्मचारी संयुक्त मोर्चा के बैनर तले जिला प्रशासन के

अधिकारियों की कार्यप्रणाली के विरोध में पिछले ती दिनों से धरना जारी है। आज केसला ब्लॉक मुख्यालय पर मोर्चा के अध्यक्ष नरेन्द्र सिंह राजपूत (Chairman Narendra Singh Rajput) ने अपनी मांगों के समर्थन में धरना दे रहे आंदोलनकारियों की हौंसला अफजायी की। पंचायत समन्वय अधिकारियों, सहायक विकास विस्तार अधिकारियों, विकास विस्तार अधिकारी, उपयंत्रियों, पंचायत सचिवों एवं रोजगार सहायकों में तीव्र रोष है। मामलों का निराकरण नहीं होने पर और मनरेगा (Manrega) में अनावश्यक कार्यवाही का सिलसिला नहीं रुकता है तो संयुक्त मोर्चा का आंदोलन जारी रहेगा। संयुक्त मोर्चा ने आज जिला पंचायत अध्यक्ष कुशल पटेल (District Panchayat President Kushal Patel)और विधायक डॉ.सीतासरन शर्मा (MLA Dr. Sitasaran Sharma) को ज्ञापन सौंपकर मांगों पर विचार कर पूर्ण करने की मांग की है। आंदोलनकारियों ने स्पष्ट किया है कि उनकी लड़ाई केवल जिला प्रशासन के साथ है, सरकार के साथ वे अब भी पहले की तरह ही खड़े हैं। आज विधायक को सचिव संगठन के ब्लॉक अध्यक्ष सुरेन्द्र सिंह चौहान के नेतृत्व में कर्मचारियों ने ज्ञापन सौंपा है जबकि जिला पंचायत अध्यक्ष कुशल पटेल को उनके गांव पांजराकलॉ में जिलाध्यक्ष संयुक्त मोर्चा नरेन्द्र सिंह राजपूत, सुरेन्द्र तोमर, संतोष जिंझोरे, जय यादव पहुंचे थे।

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ये हैं मोर्चा की मांगें
– मनरेगा में जिले द्वारा बनाये गये माइक्रोप्लान को तत्काल बंद किया जाए, क्योंकि माइक्रो प्लान में उस पंचायत को भी शामिल कर लिया गया है जिसने लेबर बजट सौ फीसद से 130 फीसद या 200 फीसद कर लिया है। ऐसे में उक्त पंचायतों के सचिव, रोजगार सहायकों को जिला पंचायत में पेशी पर बुलाया जा रहा है।
– मनरेगा मांग आधारित योजना है। यदि मजदूर काम की मांग करता है तो निश्चित रूप से उसे काम दिया जाएगा। लेकिन, देखने में आ रहा है कि पंचायतों के सचिव, रोजगार सहायक पर जबरन लेबर लगाने का अत्यधिक दबाव बनाया जा रहा है तथा सस्पेंड, सेवा समाप्ति की धमकी दी जा रही है।
– मनरेगा में प्रतिदिन निश्चित लेबर लगाने का दबाव न डाला जाये, क्योंकि यदि पंचायत में 5 लेबर का काम है तो यह पंचायत 50 लेबर कैसे लगा सकती है? यह समझ से परे है। फिर भी जनपद एवं जिले द्वारा लगातार इस बाबत दबाव बनाया जा रहा है, जो कि सर्वथा अनुचित है।
– मनरेगा में प्रगति को आधार बनाकर वेतन राजसात करना, वेतन काटने के आदेश किये जा रहे हैं, जबकि प्रत्येक कर्मचारी अपनी पूरी निष्ठा एवं लगन से समस्त योजनाओं के काम को अंजाम दे रहा है।
– एडीईओ, पीसीओ एवं उपयंत्रियों की प्रति गुरुवार आयोजित होने वाली मीटिंग को तत्काल बंद कर मासिक अथवा पाक्षिक बैठक की जाए जिससे उन्हें फील्ड पर कार्य करने का अधिक समय मिल सके।
– खाद्यान्न पर्ची के लिए सबसे ज्यादा जिम्मेदार खाद्य विभाग है अत: आरडी के कर्मचारियों को खाद्यान्न पर्ची संबंधी कार्यों में अनावश्यक दबाव न बनाया जाये तथा अन्न उत्सव में महिला सचिवों की ड्यूटी हटायी जाए।
– मनरेगा को लेकर सचिव एवं रोजगार सहायकों को जिला पंचायत में पेशी के दौरान अभद्रता पूर्वक व्यवहार किया जाता है तथा उन्हें निलंबित, सेवा समाप्ति करने का भय दिखाकर मानसिक रूप से प्रताडि़त किया जाना बंद हो।
– आर्थिक अनियमिमता संबंधी मामलों के अतिरिक्त अन्य मामलों में सस्पेंड सचिवों एवं सेवा समाप्ति किये रोजगार सहायकों को तत्काल बहाल किया जाए।
अवकाश के दिन तथा कार्यालयीन समय के पश्चात वाट्सअप से मैसेज न किये जायें, ना ही अवकाश के दिन किसी प्रकार की बैठक की जाए, किसी भी कर्मचारी का पक्ष सुने बिना कोई कार्रवाई न की जाए।

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