भोपाल। मध्यप्रदेश पंचायत सचिव संगठन ने अपनी लंबे समय से लंबित मांगों को लेकर राज्य के मुख्यमंत्री मोहन यादव से संगठन के प्रदेशाध्यक्ष नरेन्द्र सिंह राजपूत के नेतृत्व में मुलाकात की और उनको एक अनुरोध पत्र सौंपा है। संगठन ने प्रदेश के ग्रामीण विकास की रीढ़ कहे जाने वाले पंचायत सचिवों की समस्याओं पर ध्यान देने और उनकी 6 प्रमुख मांगों को पूरा करने की अपील की है।
संगठन की 6 मुख्य मांगें
- संविलियन की मांग : पंचायत सचिवों का पंचायत एवं ग्रामीण विकास विभाग में संविलियन (विलय) किया जाए और उन्हें राज्य शासन का कर्मचारी घोषित किया जाए।
- समयमान वेतनमान : नियुक्ति दिनांक से सेवा को मानते हुए उन्हें समयमान वेतनमान का लाभ दिया जाए।
- सेवा निवृत्ति पर लाभ : सेवा निवृत्ति पर ग्रेच्युटी और अंशकालिक नकदीकरण (अंशकालीन/कम्यूटेशन) का लाभ दिया जाए।
- वेतन का स्थाई बजट : पंचायत सचिवों के वेतन भुगतान के लिए जनपद स्तर पर स्थाई बजट का प्रावधान किया जाए।
- क्षतिपूर्ति भत्ता : कर्मचारियों की सेवा की देखरेख का दायित्व पूरा करने वाले शासकीय कर्मचारियों को अत्यधिक क्षतिपूर्ति हेतु एक्सग्रेसियाका प्रावधान किया जाए।
- अनुकंपा नियुक्ति में वसूली पर रोक : पंचायत सचिव की मृत्यु के पश्चात् प्रदान की जाने वाली 1,50,000 (एक लाख पचास हजार रुपए) की अनुग्रह राशि को अनुकंपा नियुक्ति के बाद आश्रित से वापस न लेने का आदेश जारी किया जाए।
- अनुग्रह राशि बढ़ाना और समान लाभ : पंचायत सचिवों की मृत्यु पर मिलने वाली अनुग्रह राशि को बढ़ाकर न्यूनतम दस लाख रुपये किया जाए।
संगठन का तर्क
संगठन ने अनुरोध में कहा है कि पंचायत सचिव प्रदेश में विभिन्न कल्याणकारी योजनाओं को धरातल पर पूरी निष्ठा और ईमानदारी से क्रियान्वित कर रहे हैं। वे पंडित दीनदयाल उपाध्याय के ‘अंत्योदयÓ वाक्य के अनुसार समाज के अंतिम छोर तक सरकारी योजनाओं का लाभ पहुंचा रहे हैं।
शासन द्वारा अध्यापक संवर्ग की सेवाएं नियुक्ति दिनांक से मानते हुए पेंशन की घोषणा की गई है। चूंकि पंचायत सचिव और अध्यापक संवर्ग की भर्ती प्रक्रिया एक ही समय में और एक समान थी, इसलिए पंचायत सचिवों को भी अध्यापक संवर्ग के समान समस्त लाभ प्रदान किए जाएं। संगठन ने इस संबंध में जल्द से जल्द उचित निर्णय लेने और इन मांगों को पूरा करने के लिए निवेदन किया है।




























