इटारसी। भगवान बिरसा मुंडा शासकीय महाविद्यालय सुखतवा में विभाजन विभीषिका स्मृति दिवस पर एक विशेष कार्यक्रम और विचार गोष्ठी का आयोजन किया। प्राचार्य डॉ. नीता राजपूत के मार्गदर्शन में आयोजित इस कार्यक्रम में विद्यार्थियों और स्टाफ ने विभाजन के दौरान अपनी जान गंवाने वाले लोगों को नमन किया और सामाजिक सद्भाव का संदेश दिया।
डॉक्यूमेंट्री फिल्म का प्रदर्शन और दी गई श्रद्धांजलि
कार्यक्रम के दौरान विभाजन की त्रासदी से प्रभावित लोगों पर आधारित एक डॉक्यूमेंट्री फिल्म का प्रसारण किया गया, जिसने सभी को इतिहास के उन दर्दनाक पलों से अवगत कराया। इसके पश्चात, उपस्थित सभी लोगों ने दो मिनट का मौन रखकर विभाजन की विभीषिका में शहीद हुए लोगों को भावभीनी श्रद्धांजलि अर्पित की।
गोष्ठी में वक्ताओं ने दिए सामाजिक समरसता के संदेश
विचार गोष्ठी में महाविद्यालय के स्वयंसेवकों ने भी विभाजन के सामाजिक और मानवीय प्रभावों पर अपने विचार साझा किए।
प्राचार्य डॉ. नीता राजपूत ने कहा कि यह दिन हमें इतिहास के उस अध्याय को स्मरण करने का अवसर देता है, जिसने देश को गहराई से प्रभावित किया। हमें अतीत की पीड़ा से सीख लेकर वर्तमान और भविष्य में राष्ट्र की शांति, एकता और अखंडता को सर्वोच्च प्राथमिकता देनी चाहिए।
अनिल रजक ने बताया कि विभाजन केवल भौगोलिक सीमाओं का परिवर्तन नहीं था, बल्कि इसने आम जनजीवन को बुरी तरह झकझोर दिया था। उन्होंने उपस्थित स्वयंसेवकों से भाईचारे और सद्भाव की भावना को बनाए रखने का आह्वान किया। डॉ. प्रवीण कुशवाहा ने उद्बोधन में डॉ. कुशवाहा ने कहा कि विभाजन की यादें हमें एकता और अखंडता का महत्व समझाती हैं। उन्होंने विद्यार्थियों को आपसी सम्मान और सामाजिक समरसता को प्राथमिकता देने के लिए प्रेरित किया।
राष्ट्रीय एकता का संकल्प और वंदे मातरम से समापन
कार्यक्रम में कामधेनु पटोदिया, जोसलिन कुजूर, दिशा ठाकुर और आयुष सादराम सहित महाविद्यालय का समस्त स्टाफ और बड़ी संख्या में विद्यार्थी उपस्थित रहे। कार्यक्रम में सक्रिय सहभागिता करते हुए राष्ट्रीय एकता का संकल्प लिया।











