इटारसी। भारतीय डाक विभाग के कर्मचारियों ने केंद्र सरकार की नीतियों, निजीकरण के प्रयासों और मनमाने लक्ष्यों के खिलाफ एक बड़े राष्ट्रव्यापी आंदोलन का बिगुल फूंक दिया है। ‘भारतीय डाक कर्मचारी महासंघ’ (BPEF) और उससे संबद्ध यूनियनों ने अपनी मांगों को लेकर चरणबद्ध आंदोलन और अंततः अनिश्चितकालीन हड़ताल पर जाने का फैसला किया है।
संगठन का आरोप है कि विभाग में लगातार कर्मचारी विरोधी नीतियां लागू की जा रही हैं और मैकिन्से (McKinsey) जैसी निजी कंसल्टेंसी कंपनियों के इशारों पर डाक विभाग के निजीकरण की पृष्ठभूमि तैयार की जा रही है, जिसका पुरजोर विरोध किया जाएगा। डाक कर्मचारियों ने इस आंदोलन के जरिए अपनी प्रमुख मांगें सरकार के सामने रखी हैं।
कर्मचारियों की मांग है कि विभाग में लागू की जा रही सभी कर्मचारी विरोधी नीतियों पर तत्काल रोक लगाई जाए और डाक विभाग के निजीकरण के प्रयासों को बंद कर कॉर्पोरेट कंसल्टेंसी का हस्तक्षेप खत्म किया जाए। इसके साथ ही, कर्मचारियों पर बिना किसी व्यावहारिक आधार के थोपे जा रहे दमनकारी और जबरन लक्ष्यों (Coercive Targets) को समाप्त करने तथा कर्मचारियों की लंबे समय से लंबित गंभीर शिकायतों का तत्काल निवारण करने की मांग भी प्रमुखता से उठाई गई है।
चरणबद्ध आंदोलन और हड़ताल का कार्यक्रम
BPEF के महासचिव अनंत कुमार पाल द्वारा जारी कार्ययोजना के अनुसार, यह आंदोलन पूरी तरह चरणबद्ध तरीके से आगे बढ़ेगा। आंदोलन के पहले चरण में 20 जुलाई से 27 जुलाई तक देश भर के डाक कर्मचारी अपने कर्तव्यों का पालन करते हुए काली पट्टी (Black Badge) बांधकर काम करेंगे और विरोध दर्ज कराएंगे। इसके बाद 28 जुलाई को विरोध प्रदर्शन को तेज करते हुए दोपहर के भोजन के समय (लंच ऑवर) सभी डाक कार्यालयों के बाहर प्रदर्शन और गेट मीटिंग्स आयोजित की जाएंगी।यदि प्रशासन इसके बाद भी नहीं चेता, तो आगामी 05 अगस्त को देशव्यापी एक दिवसीय सांकेतिक हड़ताल की जाएगी, जिससे पूरे देश में डाक सेवाएं ठप रहेंगी।
इसके बावजूद मांगें पूरी न होने की स्थिति में 18 अगस्त से अनिश्चितकालीन हड़ताल शुरू कर दी जाएगी, जो मांगें माने जाने तक जारी रहेगी। इस आंदोलन में ग्रामीण डाक सेवक (GDS), रेलवे मेल सर्विस (RMS) और अन्य संबद्ध विभागों के कर्मचारी बढ़-चढ़कर हिस्सा ले रहे हैं, जिससे आगामी दिनों में रजिस्ट्री, स्पीड पोस्ट और बैंकिंग सेवाएं बुरी तरह प्रभावित होने की आशंका है।










