---Advertisement---

पुण्य स्मरण : माहेश्वर तिवारी, धूप में जब भी जले हैं पांव, घर की याद आई

By
Last updated:
Follow Us
Bachpan play school advertisement
  • पंकज पटेरिया
Punya remembrance: Maheshwar Tiwari, fame, whenever his feet burn in the sun, he remembers home

अभी-अभी 22 जुलाई को माहेश्वर तिवारी की जन्म तिथि निकली। पिछले साल ही, देश के प्रतिष्ठित प्रतिनिधि नवगीतकार महेश्वर तिवारी का अपने गृह नगर मुरादाबाद में देवलोक गमन हुआ था। करीब 84 वर्षीय माहेश्वर तिवारी का, नर्मदापुरम-इटारसी से घर आंगन जैसा आत्मीय संबंध था। उनके ना रहने की दुखद खबर मुझे होम साइंस कॉलेज की सेवानिवृत प्रोफेसर डॉ मीना शुक्ला भोपाल ने जब फोन पर दी, तो कुछ पल के लिए मैं भी स्तब्ध रह गया।

दरअसल माहेश्वरी तिवारी मेरे भी प्रिय और प्रेरक कवि रहे हैं। कीर्तिशेष नवगीतकार विनोद निगम जब तक उन्हें नर्मदापुरम बुलाते रहते थे। जब आते थे तो हम लोगों को लगता था एक हमारे प्रिय भाई दूसरे गांव से अपने घर गांव परिवार में आए हैं। 70 के दशक में नर्मदापुरम इटारसी के होठों पर पहले पहल उनके मदिर मधुर गीत आए, तो हमेशा के लिए दिल के मेहमान बन गए। एक वक्त ऐसा भी था जब नर्मदा पुरम में लोग उठते ही उनके गीत गुनगुनाते थे और सोने जाते थे तो उनके गीत गुनगुनाते थे।

उनके गीत याद तुम्हारी जैसे कोई कंचन कलश भरे, जैसे कोई किरण अकेली पर्वत पार करे। यह पीले कुर्ते जैसा दिन सिंदूरी पगड़ी जैसी शाम, आओ लिख दूं तुम्हारे नाम। अथवा एक तुम्हारा होना क्या से क्या कर देता है, बेजुबान छत दीवारों को घर कर देता है। जब वे मंच पर आते थे इन्हीं पंक्तियों की फरमाइश से सभागार का आकाश गूंज उठता था। कवि पत्रकार होने के नाते मेरा भी उनसे बहुत अपनापन का रिश्ता था। शहर के हृदय में उनके विशिष्ट रिश्ते की एक वजह यह भी थी 30 अगस्त 1973 नर्मदा जी की भीषण बाढ़ के दर्द को उन्होंने भी गहरे अनुभव किया था। तब वे यहां व्यंगकार सुरेश उपाध्याय के मकान में रहते थे। मुझे याद है तिलक भवन टाउन हॉल में शहर के हम कुछ मित्रों ने भीषण बाढ़ में बिछड़े लोगों के पुण्य स्मरण में हमने उन्हें याद किया था। यह पैदल आए थे और उन्होंने शोक सभा में अपने मार्मिक विचार व्यक्त किए थे।

इस त्रासदी को शिद्दत से महसूस करते हुए उन्होंने कहा था मैं आपकी वेदना को समझता हूं, क्योंकि मैं भी उत्तर प्रदेश में ऐसे नगर में रहता हूं जहां बाढ़ एक नियमितता है। वे अक्सर कहते थे नर्मदापुरम मेरा दूसरा घर है। नर्मदा पुरम की हमारी बहुत पुरानी संस्था किसलय इसके संस्थापक अध्यक्ष साहित्यकार तेजेश्वर मिश्रा हैं, में उन्हें लेकर आता रहता था। देर रात तक उनके गीतों से मिश्रा निवास दादा कुटी महकती रहती थी। प्रसिद्ध गायक संगीतकार नमन तिवारी ने भी उनके गीतों को स्वरबद्ध किया था। कुछ वर्ष पूर्व उनसे अंतिम भेंट उनकी छात्रा और बहन कवियत्री प्रोफेसर डॉ मीणा शुक्ला के निवास पर जब वे आए थे तब हुई थी।

उनके गीत, धूप में जब भी जले हैं पांव, घर की याद आई। अब ना मोरछली की टहनी झूम करेगी टाटा।
गीत से उन्हें याद करते हुए श्रद्धा सुमन।
अब न लौट कर कभी आयेंगे नगर महेश्वरी जी।
रोज-रोज बहुत याद आएंगे हमको महेश्वरी जी।

पंकज पटेरिया
कवि पत्रकार
संपादक शब्द ध्वज

Rohit Nage

Rohit Nage has 30 years' experience in the field of journalism. He has vast experience of writing articles, news story, sports news, political news.

For Feedback - info[@]narmadanchal.com
Join Our WhatsApp Channel

Advertisement

Rashtra Bharti School, Itarsi
error: Content is protected !!