इटारसी। सतपुड़ा टाइगर रिजर्व के एक करीब 3 वर्षीय नर बाघ को दूसरी बार सफलतापूर्वक रेस्क्यू कर लिया गया है। मानव-वन्यजीव संघर्ष को रोकने के लिए अब इस बाघ को भोपाल के वन विहार भेजने का निर्णय लिया गया है।
यह बाघ पिछले छह महीनों से नर्मदापुरम वनमंडल के रहवासी इलाकों के आसपास लगातार मूवमेंट कर रहा था। इससे पहले 1 अप्रैल 2026 को भी इसे रेस्क्यू कर एसटीआर के कोर क्षेत्र में छोड़ा था, लेकिन वह फिर से आबादी के नजदीक लौट आया। सुरक्षा के मद्देनजर प्रधान मुख्य वन संरक्षक (वन्यजीव) की अनुमति के बाद यह कदम उठाया गया।
ऑपरेशन की मुख्य बातें
बड़ा अभियान: बाघ को सुरक्षित पकड़ने के लिए 5 प्रशिक्षित हाथियों, रेडियो कॉलर तकनीकी ट्रैकिंग और मैदानी अमले की मदद से एक बड़ा संयुक्त ऑपरेशन चलाया गया।
विशेषज्ञों की टीम: इस रेस्क्यू ऑपरेशन में वन्यजीव विशेषज्ञ डॉ. गुरुदत्त शर्मा, डॉ. प्रशांत देशमुख और डॉ. हमजा फारूकी की मुख्य भूमिका रही। वन विभाग ने इस पूरे अभियान के दौरान स्थानीय ग्रामीणों द्वारा रखे गए धैर्य और दिए गए सहयोग के प्रति आभार व्यक्त किया है।











