इटारसी। मोबाइल पर प्रेम-प्रसंग, परिवार से संवाद की कमी और कम उम्र में विवाह की जिद के कारण किशोरियों के घर और संरक्षण संस्थाओं से भागने के मामले लगातार बढ़ रहे हैं। कई मामलों में लड़कियां न तो परिवार के साथ और न ही बालिका गृह के अनुशासन में रहना चाहती हैं। वहीं, परिवार भी उन्हें अपनाने से इनकार कर रहे हैं। इन जटिल परिस्थितियों के कारण इटारसी स्थित ‘मुस्कान बालिका गृह’ का प्रबंधन अब संस्था के संचालन को बंद करने पर गंभीरता से विचार कर रहा है।
हालिया प्रमुख मामले
उज्जैन से किशोरी की बरामदगी : पूर्व में मुस्कान बालिका गृह से बिना अनुमति उज्जैन चली गई एक बालिका को इटारसी पुलिस (थाना प्रभारी सौरभ पांडे की टीम) ने सकुशल खोज निकाला। 18 वर्ष की आयु पूर्ण होने पर बाल कल्याण समिति के आदेश से पुलिस और संस्था ने उसे बनखेड़ी स्थित उसके परिजनों के सुपुर्द कर दिया। संस्था ने पुलिस के सहयोग की सराहना की है।
विदिशा की 17 वर्षीय किशोरी का मामला : प्रेम-प्रसंग के चलते परिवार में विवाद होने पर माता-पिता ने अपनी 17 वर्षीय बेटी को साथ रखने से इनकार कर दिया। अब बाल कल्याण समिति के आदेश पर उसे पुनर्वास के लिए मुस्कान बालिका गृह भेजा गया है।
संस्था के सामने आ रहीं चुनौतियां
- किशोरियों का संस्थागत अनुशासन मानने से इनकार करना और बार-बार भागने का प्रयास करना।
- माता-पिता द्वारा अपनी ही बच्चियों को वापस घर ले जाने से मना कर देना।
- पलायन की घटनाओं के बाद खोज, पुलिस कार्रवाई और वैधानिक प्रक्रियाओं के कारण संस्था पर बढ़ता दबाव।
इन चुनौतियों के चलते संस्था ‘मुस्कान बालिका गृह’ का संचालन बंद करने के विकल्प पर विचार कर रही है, हालांकि वर्तमान में निवासरत बालिकाओं की देखभाल जारी है।
अभिभावकों से अपील
मुस्कान संस्था ने स्पष्ट किया है कि बाल संरक्षण संस्थाएं परिवार का स्थायी विकल्प नहीं हो सकतीं। संस्था ने माता-पिता से अपील की है कि किशोरावस्था के भावनात्मक आकर्षण को विवाह का अंतिम निर्णय न मानें। बच्चों को घर से अलग करने या उनके साथ कठोर व्यवहार करने के बजाय संवाद और सकारात्मक परामर्श का रास्ता अपनाएं। नाबालिग का विवाह गैर-कानूनी है और यह उनके भविष्य को अंधकार में डाल सकता है।









