झरोखा : कहीं ना कहीं कोई ना कोई होता है…
Jharokha: Somewhere there is someone or the other...

झरोखा : कहीं ना कहीं कोई ना कोई होता है…

– पंकज पटेरिया :
छत्तीसगढ़ रायगढ़ निवासी मशहूर शिशु रोग विशेषज्ञ डॉ एमएम श्रीवास्तव और उनकी पत्नी प्रसिद्ध स्त्री रोग विशेषज्ञ डा चंद्रकला श्रीवास्तव ख्याति दूर तक है। अत्यंत धार्मिक और परोपकारी प्रवृत्ति के डॉक्टर दंपत्ति उस दिन पुरी गए थे। समुद्र दर्शन कर रहे थे, तभी समुद्र में डाला एक नारियल बार-बार किनारे आ जाता था। उन्होंने दो-तीन बार उसे उठाकर समुद्र में फेंक दिया लेकिन वह हर बार लौट आता था। अंत में डॉ श्रीवास्तव ने नारियल को उठाकर अपने बैग में रख लिया और अन्य धार्मिक स्थलों के दर्शन कर अपने निवास पर आ गए। सब सामान यथा स्थान रखने के बाद उन्होंने वह नारियल पूजा स्थल पर रख दिया।
भोजन आदि करके नीचे अपने शयनकक्ष में सोने चले गए। सोने तो गए थे पर नींद नहीं आ रही थी, अजीबो-गरीब विचार दिमाग में आ जा रहे थे। आधी रात के बाद ऊपर पूजा स्थल से जोरदार बम फटने जैसी धमाके की आवाज आई और आग की लपटें दिखी। हड़बड़ा कर डॉ श्रीवास्तव ऊपर पूजा स्थल पहुंचे तो देख कर दंग रह गए कि वह नारियल धू धू कर जल रहा है। उसकी बहुत ऊंची लपटें उठ रही है। डॉ साहब ने अपने इष्ट का ध्यान कर साहस से काम लिया और आग को बुझाया। आग शांत हो गई तो डॉ साहब नीचे आकर बिस्तर पर लेट कर लेकिन आंखों में नींद नहीं थी। बेहतर था की सुबह का इंतजार किया जाए और किसी जानकार को बुलाकर सलाह ली जाए।
सुबह हुई और डॉक्टर श्रीवास्तव ने एक जानकार अपने परिचित पंडित जी को बुलाया और सारा घटनाक्रम उन्हें बताया कि यह नारियल बार-बार किनारे आ रहा था। मैं फेंकता रहा फिर भी लौट आता था। अंत में मैं उठाकर से घर ले आया और पूजा के स्थान पर रख दिया तो यह अग्निकांड हो गया। ईश्वर की महान कृपा कि कोई बड़ी हानि नहीं हुई। लिहाजा पंडित जी कृपा कर बताइए ऐसा क्यों हुआ। पंडित जी ने डॉ साहब को समझाया, डॉक्टर साहब दरअसल आपकी कोई गलती नहीं। नारियल में एक बहुत बड़ी बला प्रेत कैद था, उसे जहां था वहां से पकड़ कर एक जानकार ने नारियल में बंद किया था और समुद्र में विसर्जित कर दिया था। बाहर आने के लिए छटपटा रहा था। तभी आप उसके चक्कर में आ गए और उसे लेकर घर ले आए। वह तो आपके ईश्वर, माता-पिता के पुण्य आपके रक्षा कवच बन गए। आपका पूजा स्थल सिद्ध है, मां शक्ति विराजी है उसी के प्रभाव से उसे अंतत मुक्ति मिली।
आज के विज्ञान युग में जब तक ऐसी घटनाएं आसपास सुनाई देती हैं, तो यह कहने में आ ही जाता है कि कहीं ना कहीं कोई ना कोई होता है। डॉक्टर श्रीवास्तव दंपत्ति शासकीय की सेवा से रिटायरमेंट लेकर अब रायगढ़ में ही निःस्वार्थ भाव से लोगों की सेवा कर रहे हैं।
नर्मदे हर।(जैसा डॉक्टर श्रीवास्तव साहब ने मुझे बताया)

पंकज पटेरिया (Pankaj Pateriya)
वरिष्ठ पत्रकार साहित्यकार
ज्योतिष सलाहकार
9893903003
9340244352
(नोट: झरोखा की इस सीरीज की किसी कड़ी का बगैर संपादक अथवा लेखक की इजाजत के बिना कोई भी उपयोग करना कानूनन दंडनीय है। सर्वाधिकार सुरक्षित हैं।)

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