सियासी बाग में अनुमानों के आम फलेंगे क्या…
Will mangoes bear fruit in the political garden?

सियासी बाग में अनुमानों के आम फलेंगे क्या…

झरोखा – पंकज पटेरिया :
फलों के राजा आम का मौसम बाय बाय कर गया, लेकिन सियासी बाग मे अनुमानों के आम का मौसम सदाबहार रहता है। कम ही ऐसा होता कि अनुमान के किसी दरख़्त आम फले ही नही ओर इधर की सियासी अमराई में कोयल की कुहू कुहू भी बरकरार रहती है। लिहाज राजधानी भोपाल के खबर खाने में इस एक ख़बर की कुहू कुहू गूंज रही है वह यह कि पूर्व मुखयमंत्री और राज्यपाल रहे दिग्गज राजनेता स्व श्री अर्जुन सिंह के पुत्र पूर्व कांग्रेस प्रतिपक्ष नेता अजय सिंह राहुल भैया (Ajay Singh Rahul Bhaiya) भाजपा में आ रहे है। दरअसल हिचकोले खाते पार्टी के जंगी जहाज को छोड़ कर गए कई कद्दावर नेताओ को लेकर, जो ये सिलसिला शुरू हुआ है उसके नेपथ्य कारण भी उन्ही धाकड़ राजनेताओं ने खुद ब खुद सार्वजनिक तौर पर अपने वक्तव्य में दर्ज किए ही है।
बतौर मसलन निरंतर उपेक्षा, व्यक्तिपूजा, वादा खिलापी आदि खैर। बरहहाल अपने बुंदेलखंड के भाजपा के वरिष्ठ स्तंभ और राज्य के प्रभावी गृहमंत्री नरोत्तम मिश्रा के निवास पर राहुल भैया (Rahul Bhaiya)का जाना, फिर जन्मदिन की बधाई देने भाजपा राष्ट्रीय महामंत्री कैलाश विजयवर्गी के साथ अपने मिश्रा जी का राहुल भैया की कोठी पर पहुचना, उन खबरों से उठ रहे खमीर से खबर के चटकारे चलना बेजा या खालिश गाशिव कहकर खारिज नही किया जा सकता, क्योंकि साहब सियासत मे कुछ भी स्थाई नहीं होता रातों रात तर्ज, तेवर, तापमान और टोपी बदल जाना हैरानी की बात नही है। हम भी कोई बहुत बड़े सियासी दा तो है नहीं जो भविष्यवाणी कर दे। अदने अखबार नबीज है ।लिहाजा बुजुर्गो की सीख को मानते है बकोल उस फिल्मी गाने की रोशनी में “परदे मे रहने दो” आज कल में कभी पर्दा उठेगा ही, तबई भैया सई सई रुखसार हो जे। अभी धीरज रखना बेहतर होगा। नर्मदे हर।


पंकज पटेरिया
वरिष्ठ पत्रकार साहित्यकार
9340244352

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