दस साल बाद शुभ योग में होगी पितरों की विदाई
अज्ञात तिथि के साथ श्राद्ध पक्ष का समापन होगा, दान विशेष लाभ देगा
इटारसी। भोपाल मां चामुण्डा दरबार के पुजारी गुरु पं. रामजीवन दुबे ने बताया कि आश्विन कृष्ण पक्ष पितृ मोक्ष अमावस्या (Pitru Moksha Amavasya) बुधवार सर्वार्थ सिद्धि योग 6 अक्टूबर को श्राद्ध पक्ष का समापन रहेगा। गया जी, प्रयागराज, नर्मदा घाट पर भक्तों की भीड़ रहेगी। घर-घर में पितरां को विदाई दी जाएगी। पितरों की आत्म शांति और प्रसन्न करने के उद्देश्य से इन दिनों शहर के लोग तर्पण, पिंडदान व श्राद्ध क्रियाएं कर रहे हैं। दस साल बाद शुभ योग में पितरों को विदाई दी जाएगी। श्राद्ध में ब्राह्मण भोजन, दक्षिणा का विशेष महत्व है। इसे सर्वपितृ मोक्ष अमावस्या कहा जाता है। इस तिथि पर उन मृत लोगों के लिए पिंडदान, श्राद्ध और तर्पण कर्म किए जाते हैं, जिनकी मृत्यु तिथि मालूम नहीं है। साथ ही, इस बार अगर किसी मृत सदस्य का श्राद्ध करना भूल गए हैं तो उनके लिए अमावस्या पर श्राद्ध कर्म किए जा सकते हैं। इस अमावस्या पर सभी ज्ञात-अज्ञात पितरों के पिंडदान आदि शुभ कर्म करना चाहिए। मान्यता है कि पितृ पक्ष में सभी पितर देवता धरती पर अपने-अपने कुल के घरों में आते हैं और धूप-ध्यान, तर्पण आदि ग्रहण करते हैं। अमावस्या पर सभी पितर अपने पितृलोक लौट जाते हैं। अगर कोई व्यक्ति अपने परिवार से अलग रहता है, सभी भाइयों के घर अलग-अलग हैं, तो सभी को अपने-अपने घरों में पितरों के लिए श्राद्ध कर्म करना चाहिए।
अमावस्या तिथि पर ये शुभ कर्म भी जरूर करें
पितृ पक्ष की अमावस्या पर जरूरतमंद लोगों को धन और अनाज का दान करना चाहिए। आप चाहें तो वस्त्रों का दान भी कर सकते हैं। किसी मंदिर में, किसी गौशाला में भी दान करना चाहिए। अमावस्या की शाम सूर्यास्त के बाद घर में मंदिर में और तुलसी के पास दीपक जलाएं। मख्य द्वार पर और घर की छत पर भी दीपक जलाना चाहिए। अमावस्या तिथि पर चंद्र दिखाई नहीं देता है। इस वजह से रात में अंधकार और नकारात्मकता बढ़ जाती है। दीपों की रोशनी से घर के आसपास सकारात्मक वातावरण बनता है। इसलिए अमावस्या की रात दीपक जलाने की परंपरा है।









