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सावन, संगीत और बॉलीवुड: जब झमाझम बारिश में घुला रोमांस और यादों का जादू

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लेखक: अखिलेश शुक्ला (सेवानिवृत्त प्राचार्य, लेखक एवं ब्लॉगर)

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जब ज्येष्ठ और आषाढ़ की तपिश से झुलसी धरती पर सावन की पहली बूंद पड़ती है, तो केवल मिट्टी से सोंधी खुशबू ही नहीं उठती, बल्कि जन-मन में एक अजीब सी बेकरारी और मिठास भी घुल जाती है। सावन सिर्फ एक मौसम नहीं, बल्कि अनुभूतियों का पूरा एक समंदर है। और जब इस मौसम की फुहारों में भारतीय सिनेमा का संगीत घुल जाए, तो जादू होना लाजिमी है।

सावन और बॉलीवुड का रिश्ता सदियों पुराना और अटूट है। कजरारे बादलों की उमड़-घुमड़, ठंडी हवा के झोंके और झमाझम बरसती बूंदों को हमारे गीतकारों ने ऐसे पिरोया है कि ये नगमे हर पीढ़ी के दिल की धड़कन बन गए। आइए, सावन के इन्हीं सुनहरे नगमों की एक सुहानी यात्रा पर चलते हैं।

1. सावन का अमर आह्वान: “सावन का महीना, पवन करे शोर”

सावन की बात चले और फिल्म मिलन (1967) का यह सदाबहार गीत जेहन में न आए, यह मुमकिन ही नहीं।

  • सुर-संगीत: मुकेश और लता मंगेशकर की जादुई आवाज, लक्ष्मीकांत-प्यारेलाल का संगीत और आनंद बख्शी के शब्द।
  • अंदाज: नाव पर सवार सुनील दत्त और नूतन पर फिल्माया गया यह गीत देहाती सरलता, प्राकृतिक सुंदरता और निश्छल प्रेम का अद्भुत संगम है। आज भी बारिश की पहली आहट पर हर भारतीय के जुबां पर यही गीत सबसे पहले आता है।

2. विरह और तड़प का नगमा: “हाय-हाय ये मजबूरी”

सावन जहां मिलन की खुशी लाता है, वहीं अपनों से दूरी का दर्द भी बढ़ा देता है। फिल्म रोटी कपड़ा और मकान (1974) का यह गीत इसी जज्बात को शिद्दत से बयां करता है।

“तेरी दो टकियाँ दी नौकरी में, मेरा लाखों का सावन जाए…”

  • सुर-संगीत: लता मंगेशकर की खनकती आवाज, लक्ष्मीकांत-प्यारेलाल का संगीत और वर्मा मलिक के बोल।
  • अंदाज: जब सावन का सुहाना मौसम सामने हो और प्रियतम पास न हो, तो वह दूरी कितनी दर्दनाक होती है—इसे इस गीत से बेहतर भला कौन समझा सकता है!

3. बिना बारिश के भी भिगोता रूपक: “दीवाना हुआ बादल”

फिल्म कश्मीर की कली (1964) का यह गाना सावन का ऐसा शाहकार है जिसमें बिना स्क्रीन पर बारिश दिखाए भी दर्शक पूरी तरह भीग जाता है।

  • सुर-संगीत: मोहम्मद रफी और आशा भोसले की सुरीली जुगलबंदी, ओ.पी. नैयर की थिरका देने वाली धुन और एस.एच. बिहारी के नफीस बोल।
  • अंदाज: डल झील की वादियों में शम्मी कपूर और शर्मिला टैगोर पर फिल्माया गया यह गीत बादलों के दिवानेपन और सावन की घटाओं के जरिए प्यार का इजहार करता है।

4. इंतज़ार की इंतहा: “अजहूं ना आए बालमा, सावन बीता जाए”

सावन की फुहारों के बीच जब प्रियतम का इंतजार लंबा होने लगे, तो दिल का दर्द आंखों से बह निकलता है। फिल्म सांझ और सवेरा (1964) का यह क्लासिक गाना इसी पीड़ा को छूता है।

  • सुर-संगीत: मोहम्मद रफी और सुमन कल्याणपुर के भावुक सुर, शंकर-जयकिशन का संगीत और हसरत जयपुरी की कलम।
  • अंदाज: यह गाना भारतीय शास्त्रीय संगीत के स्पर्श के साथ सावन में बिछड़न के अहसास को अमर बना देता है।

5. लोक-संस्कृति और मस्ती का उत्सव: “आया सावन झूम के”

सावन बिना झूलों और लोक-उत्सव के अधूरा है। 1969 की फिल्म आया सावन झूम के का यह टाइटल ट्रैक इसी जश्न का गवाह है।

  • सुर-संगीत: मोहम्मद रफी और लता मंगेशकर की आवाज, आनंद बख्शी के लिखे गीत।
  • अंदाज: धर्मेंद्र और आशा पारेख पर फिल्माया गया यह गाना गांव-देहात के सावन उत्सव, पेड़ों पर पड़े झूले और बादलों की गर्जना को एक ऊर्जावान लय में पेश करता है।

6. जब दिल के रेगिस्तान प्यासे रह जाएं: “मेरे नैना सावन भादों”

सावन की बारिशों के बीच भी मन की प्यास कैसे अधूरी रह सकती है, इसे फिल्म महबूबा (1976) के इस कालजयी गीत में उकेरा गया है।

  • सुर-संगीत: आर.डी. बर्मन (पंचम दा) की अमर धुन, आनंद बख्शी की उत्कृष्ट शायरी, और किशोर कुमार व लता मंगेशकर के दो अलग-अलग यादगार संस्करण।
  • अंदाज: राजेश खन्ना और हेमा मालिनी पर फिल्माया गया यह गीत बताता है कि जब तक आत्मा से आत्मा का मिलन न हो, आँखों के सावन-भादों भी मन की प्यास नहीं बुझा पाते।

7. बारिश और शहर का रोमांस: “रिमझिम गिरे सावन”

फिल्म मंजिल (1979) का यह गीत बारिश के गानों का ‘सरताज’ माना जाता है।

  • सुर-संगीत: किशोर कुमार (और लता मंगेशकर) की आवाज, पंचम दा का संगीत और योगेश के जादुई बोल।
  • अंदाज: मुंबई की सड़कों पर भीगते हुए अमिताभ बच्चन और मौसमी चटर्जी पर फिल्माया गया यह गाना शहरी परिवेश में सावन की बूंदों और मोहब्बत की गर्माहट को बड़ी खूबसूरती से पेश करता है।

उपसंहार: सावन केवल मौसम नहीं, जज्बात है!

पंडित नरेंद्र शर्मा ने एक बार कहा था—“सावन सिर्फ बरसात नहीं, यह जज्बात का भाव है।”

बॉलीवुड ने इस मौसम को सिर्फ देखा नहीं, बल्कि जिया है। सावन का हर रूप—चाहे वह मिलन की खुशी हो, झूलों की मस्ती हो, या फिर विरह की तड़प—गीतकारों और संगीतकारों ने हमारी संस्कृतियों से चुनकर गीतों में ढाल दिया है।

तो देर किस बात की? इस सावन जब भी आपके शहर या गांव में बदरा घिर आएं, खिड़की के पास बैठिए, एक कप कड़क चाय लीजिए, हेडफोन लगाइए और इन नगमों के साथ बीते जमाने की उन सुहानी यादों में बह जाइए।

  • आपकी बारी: इस बारिश में आपका सबसे पसंदीदा सावन गीत कौन-सा है, जो आपको हमेशा तरोताजा कर देता है? कमेंट में जरूर शेयर करें!

Manju Thakur

मंजू ठाकुर वरिष्ठ पत्रकार एवं Narmadanchal.com के संस्थापक-संपादक हैं। वे वर्ष 2004 से नर्मदांचल क्षेत्र और मध्य प्रदेश की स्थानीय, सामाजिक, प्रशासनिक एवं जनहित से जुड़ी खबरों का संपादन और प्रकाशन कर रही हैं। उन्होंने बरकतउल्लाह विश्वविद्यालय, भोपाल से संस्कृत में स्नातकोत्तर, माखनलाल चतुर्वेदी राष्ट्रीय पत्रकारिता विश्वविद्यालय से पत्रकारिता में स्नातक तथा डॉ. हरिसिंह गौर विश्वविद्यालय, सागर से लोक प्रशासन में स्नातकोत्तर उपाधि प्राप्त की है। पत्रकारिता के साथ-साथ वे डिजिटल मीडिया, समाचार संपादन एवं सूचना प्रौद्योगिकी के क्षेत्र में भी अनुभव रखती हैं। उनका उद्देश्य पाठकों तक सटीक, निष्पक्ष और विश्वसनीय समाचार पहुँचाना है।

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