इटारसी। खेल प्रतिभाएं अक्सर सुविधाओं और संसाधनों के अभाव में दम तोड़ देती हैं, लेकिन अगर उन्हें सही समय पर सहयोग मिले तो वे देश का नाम रोशन कर सकती हैं। ऐसा ही एक मामला नर्मदापुरम जिले के डोलरिया तहसील के ग्राम भीलाखेड़ी से सामने आया है, जहाँ की होनहार तीरंदाज (आर्चर) कु. कीर्ति यादव अपनी आर्थिक तंगहाली के कारण खेल को जारी रखने के लिए संघर्ष कर रही हैं।
उपलब्धियों का लंबा सफर, लेकिन संसाधन पड़े कम
कीर्ति यादव ने अपनी मेहनत के दम पर तहसील से लेकर राष्ट्रीय स्तर तक अपनी पहचान बनाई है। उनके पास उपलब्धियों की एक लंबी सूची है, जिसमें मुख्य रूप से शामिल हैं खेलो एमपी यूथ गेम्स जबलपुर में मिक्स्ड टीम में स्वर्ण पदक, नेशनल रैंकिंग आर्चर टूर्नामेंट जयपुर में द्वितीय और भोपाल में तृतीय स्थान, ऑल इंडिया इंटर साई टूर्नामेंट कोलकाता में मिक्स्ड टीम में ब्रोंज मेडलके अलावा कीर्ति ने रायपुर, रांची, धार और अरुणाचल प्रदेश में आयोजित राष्ट्रीय व राज्य स्तरीय प्रतियोगिताओं में शानदार प्रदर्शन किया है।
पिता के कंधों पर बड़ा बोझ
कीर्ति के पिता दीनदयाल यादव ने अपनी सीमित आय के बावजूद अब तक कीर्ति को हर संभव संसाधन उपलब्ध कराए हैं। हालांकि, तीरंदाजी एक महंगा खेल है और आधुनिक (मॉडर्न) उपकरण बेहद कीमती होते हैं। परिवार पर दादा-दादी और अन्य भाई-बहनों की जिम्मेदारी होने के कारण पिता के लिए अब और अधिक आर्थिक बोझ उठाना मुश्किल हो गया है।
प्रशासन और समाज से सहयोग की अपील

कीर्ति यादव ने आवेदन के माध्यम से प्रशासन और सक्षम समाजसेवियों से गुहार लगाई है कि उन्हें आधुनिक खेल संसाधन उपलब्ध कराने में आर्थिक सहयोग प्रदान किया जाए। कीर्ति का कहना है कि यदि उन्हें सही उपकरण मिल जाएं, तो वे अपनी कौशल क्षमता का और बेहतर प्रदर्शन कर देश के लिए बड़े मेडल जीत सकती हैं। इस बेटी को जल्द से जल्द मदद मिल सके इसके लिए समाजसेवी सुधीर गोठी, अनिल मिहानी, सन्नी छाबड़ा और बालिका के परिवार के सदस्य मंत्री से मिले और मदद की मांग की। मंत्री सारंग ने हर संभव सहयोग का भरोसा दिया है।
कीर्ति ने कहा कि मैंने अब तक कई पदक जीते हैं, लेकिन आधुनिक संसाधनों की कमी के कारण अब अपनी पूरी क्षमता से प्रदर्शन नहीं कर पा रही हूं। अगर थोड़ा सहयोग मिले तो मैं अंतरराष्ट्रीय स्तर पर जिले का नाम रोशन करना चाहती हूं।










