प्रकृति का असीमित दोहन घातक : रवींद्र सक्सेना

प्रकृति का असीमित दोहन घातक : रवींद्र सक्सेना

पर्यावरण संरक्षण पर बेबीनार सम्पन्न
सोहागपुर (राजेश शुक्ला)। गंगोत्री ग्लेशियर लगभग एक किलोमीटर पीछे चला गया है ।ऋतु चक्र अनिश्चित होता जा रहा है । वनस्पतियां विलुप्त हों रहीं हैं ये सब मानव के लिए चेतावनी हैं। यदि अब भी प्रकृति का असीमित दोहन करते रहे तो समझो हम अपनी ही कब्र खोद रहे हैं। उक्त उदगार सेवा निवृत प्रधान वन संरक्षक श्री रवींद्र सक्सेना ने विश्व प्रकृति निधि भारत राज्य कार्यालय मध्यप्रदेश द्वारा आयोजित राष्ट्रीय स्तर की वेबिनार मेँ व्यक्त किए ।

विश्व प्रकृति निधि भारत से जुड़े पर्यावरण प्रेमी मित्र कन्या शाला प्राचार्य डॉ .संजीव शुक्ला ने बताया अनुसार 5 जून विश्व पर्यावरण दिवस के अवसर पर राज्य कार्यालय द्वारा राष्ट्रीय स्तर की वेबिनार का आयोजन किया गया जिसकी शुरुआत राज्य संचालक श्रीमती संगीता सक्सेना ने करते हुए पर्यावरण की सामान्य जानकारी पर प्रकाश डाला। उसके बाद मुख्य विशेषज्ञ वक्ता के रूप मेँ रवींद्र सक्सेना ने विस्तार से अपनी बात रखी । कार्यक्रम मेँ राज्य स्काउट्स एवँ गाइड्स मध्यप्रदेश के प्रमुख श्री मुकादम , छतीसगढ़ प्रमुख चंद्रा उपाध्याय , बरकतुल्लाह वि वि राष्ट्रीय सेवा योजना प्रमुख अनन्त सक्सेना एवँ अन्य लगभग 400 प्रतिभागियों ने भाग लिया।

वह दिन दूर नहीं ,जब पोर्टेबिल ऑक्सीजन सिलेंडर मानव की पीठ पर होगा: बेबीनार में डॉ संजीव शुक्ला ने बताया कोरोना महामारी मेँ ऑक्सीजन पर हमारी निर्भरता हमारे सामने आ गयी हैं यदि हम जागृत नहीं हुए और वन संपदा का संरक्षण नहीं किया तो वो दिन दूर नहीं जब आने वाली पीढ़ी को अपनी पीठ पर पोर्टेबल ऑक्सीजन सिलिंडर लेकर चलना पड़ेगा । इस अवसर पर वेस्ट मटेरियल से बेस्ट बनाने वाले विजेता प्रतिभागियों की भी घोषणा की गयी । कार्यक्रम का संचालन अजय मिश्रा ने किया ।

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