विशेष आलेख : तस्वीरें, आपकी जिंदगी के हंसी पलों का पिटारा

विशेष आलेख : तस्वीरें, आपकी जिंदगी के हंसी पलों का पिटारा

आज विश्व छायांकन (फोटोग्राफी) दिवस है। फोटोग्राफी का आविष्कार जहां, संसार को एक-दूसरे के करीब लाया, वहीं एक-दूसरे को जानने, उनकी संस्कृति को समझने तथा इतिहास को समृद्ध बनाने में भी उसने बहुत बड़ी मदद की है। आज हमें संसार के किसी दूरस्थ कोने में स्थित द्वीप के जनजीवन की सचित्र जानकारी बड़ी आसानी से प्राप्त होती है, तो इसमें फोटोग्रोफी के योगदान को कम नहीं किया जा सकता।तस्वीरें हमेशा जिंदा रहती हैं। ये आपकी जिंदगी के हंसी पलों का पिटारा होता है, जिसे कभी भी खोलकर उन पलों को न सिर्फ याद करते बल्कि उन्हें देख भी सकते हैं। कैमरे के जरिए उन पलों को अमरत्व मिल जाता है। ये पल कैमरे में कैद होकर वर्षों तक आपके साथ होते हैं। आप अपनी जिंदगी के किसी पल को कैद करके नहीं रख सकते, लेकिन वे तस्वीरों के जरिए हमेशा आपके साथ रह सकते हैं, उन्हें कैमरे में कैद करके रखा जा सकता है।
हर व्यक्ति की ख्वाहिश होती है कि काश! हम अपने हंसी पलों को कैद कर पाते। उनको किताबों की शक्ल देकर रखते ताकि जब मन हुआ देख लें। लेकिन, ऐसा संभव तो नहीं कि पलों को सजीव कैद कर पाएं, अलबत्ता कैमरों में कैद करके रख सकते ताकि उस छाया स्मृति रूपी किताब के पन्नों को हम जब मन हो, पलट कर देख लें, और, स्मृति को ताजा कर सकें। मानव की इन्हीं इच्छाओं को फोटोग्राफी ने किताब की शक्ल दी है।
जब कैमरों का अविष्कार नहीं हुआ था तो पेंटिंग के जरिए चित्रों में स्मृति को संजोया जाता था। गुफाओं, प्राचीन पर्वत मालाओं, किलों में पुरातन कला को लकीरों के जरिए चित्र बनाकर संजोया था, जो आज उस वक्त की समृद्ध चित्रकला को प्रदर्शित करती हैं। इसके बाद कैमरों का आविष्कार हुआ लेकिन, तब भी इंसान के पास आज जितने हाईटेक कैमरे नहीं थे, वह तस्वीरें बनाता था। प्राचीन गुफाओं में उस वक्त की इनसानी कला भित्ति चित्र के तौर पर आज भी गवाही देती हैं। जब कैमरे का आविष्कार हुआ, तो फोटोग्राफी भी इंसान के लिए अपनी रचनात्मकता को प्रदर्शित करने का जरिया बन गया।
अब बात विश्व फोटोग्राफी डे की, तो इस दिवस को मनाने के पीछे भी एक कहानी है। दरअसल फ्रांंसीसी वैज्ञानिक लुईस जेक्स और मेंडे डाग्युरे ने सबसे पहले सन् 1839 में फोटो तत्व की खोज की थी। ब्रिटिश वैज्ञानिक विलियम हेनरी फॉक्सटेल बोट ने निगेटिव-पॉजीटिव प्रोसेस का आविष्कार किया और सन् 1834 में टेल बॉट ने लाइट सेंसेटिव पेपर की खोज करके खींची गई फोटो को स्थायी रूप में रखने में मदद की। फ्रांसीसी वैज्ञानिक आर्गो की फ्रेंच अकादमी ऑफ साइंस के लिए लिखी गई एक रिपोर्ट को तत्कालीन फ्रांस सरकार ने खरीदकर 19 अगस्त 1939 को आम लोगों के लिए फ्री घोषित कर दिया था। इसी उपलब्धि की याद में 19 अगस्त को विश्व फोटोग्राफी दिवस के रूप में मनाया जाने लगा।

उद्देश्य
हर वर्ष 19 अगस्त को ‘विश्व फोटोग्राफी दिवस मनाया जाता है। विश्व फोटोग्राफी दिवस का उद्देश्य विश्वभर के फोटोग्राफरों को एकजुट करना है। वर्ष 2009 में ऑस्ट्रेलियाई फोटोग्राफर कोर्सके आरा ने विश्व फोटोग्राफी दिवस योजना की शुरुआत की। 19 अगस्त 2010 को विश्व फोटोग्राफी दिवस पर पहले वैश्विक ऑनलाइन गैलरी का आयोजन किया गया। फोटोग्राफी शब्द की उत्पत्ति ग्रीक शब्द फोटोज (प्रकाश) और ग्राफीन (खींचने) से मिलकर हुई है। 1839 में वैज्ञानिक सर जॉन एफ डब्ल्यू हश्रेल ने पहली बार इस शब्द का इस्तेमाल किया था।

अब समृद्ध हो गयी कला
फोटोग्राफी एक कला है, यह कहना कोई अतिश्योक्ति नहीं है। विज्ञान ने इसको समृद्ध बनाने में बहुत सहयोग दिया है। कहते भी हैं कि, आवश्यकता आविष्कार की जननी है। आवश्यकता के साथ-साथ मनुष्य ने अपने साधन बढ़ाना प्रारंभ किया और निरंतर आविष्कारों के साथ ही साथ कृत्रिम लैंस का भी आविष्कार हुआ। इससे आगे बढ़ते हुए इस लैंस से प्राप्त छवि को स्थायी रूप से सहेजने के प्रयास के नतीजे में यह कला समृद्ध होती चली गयी।

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