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एमजीएम कॉलेज इटारसी में विश्व मानसिक स्वास्थ्य दिवस पर विशेष व्याख्यान

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  • भारतीय ज्ञान परंपरा पर जोर, ‘मोबाइल तनाव का बड़ा कारण’, कहा वक्ताओं ने

इटारसी। शासकीय महात्मा गांधी स्मृति स्नातकोत्तर महाविद्यालय इटारसी में आज विश्व मानसिक स्वास्थ्य दिवस के अवसर पर भारतीय ज्ञान परंपरा प्रकोष्ठ के तत्वावधान में एक विशेष व्याख्यान का आयोजन किया गया।

कार्यक्रम का शुभारंभ प्राचार्य डॉ. राकेश मेहता, जनभागीदारी समिति के अध्यक्ष एवं मुख्य अतिथि डॉ. नीरज जैन, तथा मुख्य वक्ता डॉ. मेजर पंकज मणि पहारिया ने मां सरस्वती की प्रतिमा के समक्ष दीप प्रज्वलित कर किया। प्राचार्य डॉ. राकेश मेहता ने अपने अध्यक्षीय उद्बोधन में मानसिक स्वास्थ्य के महत्व पर प्रकाश डालते हुए कहा कि अच्छा मानसिक स्वास्थ्य विद्यार्थी जीवन में ही विकसित होता है, जिससे शारीरिक, मानसिक और आध्यात्मिक स्वास्थ्य में संतुलन स्थापित होता है। उन्होंने चिंता व्यक्त करते हुए कहा कि समाज में मानसिक स्वास्थ्य को लेकर एक ‘स्टिग्मा’ (कलंक) है, जिसके कारण लोग अपनी मानसिक स्थिति किसी से साझा नहीं कर पाते। उन्होंने बताया कि राष्ट्रीय शिक्षा नीति में इस बात पर विशेष जोर दिया गया है कि विद्यार्थी विपरीत परिस्थितियों में स्वयं को संभाल सकें।

मुख्य अतिथि डॉ. नीरज जैन ने श्रीमद्भागवत गीता और ऋग्वेद का उल्लेख करते हुए बताया कि मानसिक स्वास्थ्य की बात प्राचीन भारतीय ग्रंथों में भी कही गई है। उन्होंने इंद्रियों को वश में रखकर शारीरिक और मानसिक संतुलन बनाए रखने पर जोर दिया। मुख्य वक्ता डॉ. मेजर पंकज मणि पहारिया ने मानसिक रूप से स्वस्थ रहने के लिए ‘पांच गुरुओं’ की सहायता लेने पर बल दिया। उन्होंने इमोशन (भावना), साइकोलॉजी (मनोविज्ञान), और सोशल फ्रेमवर्क (सामाजिक ढांचा) जैसे पहलुओं पर विस्तार से बात की। उन्होंने सलाह दी कि हर व्यक्ति को अपनी नियमित दिनचर्या में योग, कसरत, डांस आदि को शामिल करना चाहिए ताकि पारिवारिक संबंध मजबूत हों और मानसिक तनाव कम हो। डॉ. पहारिया ने आज के समय में मोबाइल के अत्यधिक उपयोग को तनाव का सबसे बड़ा कारण बताते हुए, इसके उपयोग को कम करने का आह्वान किया।

भारतीय ज्ञान परंपरा प्रकोष्ठ प्रभारी डॉ. रश्मि तिवारी ने विषय प्रवर्तन करते हुए कहा कि प्राचीन भारतीय परंपरा में मानसिक स्वास्थ्य का विचार केवल रोग की अनुपस्थिति नहीं, बल्कि मन, शरीर और आत्मा के संतुलन पर आधारित एक समग्र दृष्टिकोण है। उन्होंने कहा कि आज के तनावपूर्ण जीवन में प्राचीन भारतीय अवधारणाएँ मानसिक स्वास्थ्य के संरक्षण का प्रभावी साधन बन सकती हैं। कार्यक्रम का संचालन डॉ. दिनेश कुमार ने किया और अंत में डॉ. अर्चना शर्मा ने उपस्थित सभी लोगों का धन्यवाद ज्ञापन किया। इस अवसर पर डॉ. अरविंद शर्मा, डॉ. ओपी शर्मा, डॉ. जेपी चौरे, डॉ. सुसान मनोहर, सुशीला बरबड़े सहित अनेक प्राध्यापक उपस्थित रहे।

Rohit Nage

रोहित नागे वरिष्ठ पत्रकार एवं समाचार संपादक हैं, जिन्हें प्रिंट, इलेक्ट्रॉनिक और डिजिटल मीडिया में तीन दशक से अधिक का अनुभव है। उन्होंने माखनलाल चतुर्वेदी राष्ट्रीय पत्रकारिता विश्वविद्यालय, भोपाल से पत्रकारिता में स्नातक किया है तथा लोक प्रशासन में स्नातकोत्तर उपाधि प्राप्त की है। अपने पत्रकारिता जीवन में उन्होंने दैनिक भास्कर, दैनिक जागरण, राज एक्सप्रेस, पीपुल्स समाचार, नवभारत सहित अनेक प्रतिष्ठित समाचार संस्थानों में रिपोर्टर, उप-संपादक, ब्यूरो प्रमुख एवं न्यूज़ इंचार्ज के रूप में कार्य किया है। वे Narmadanchal.com के रिपोर्टर, उप-संपादक, एवं न्यूज़ इंचार्ज के रूप में कार्य कर रहे हैं और नर्मदांचल क्षेत्र की निष्पक्ष, तथ्यपरक एवं जनहित से जुड़ी पत्रकारिता के लिए जाने जाते हैं। वर्तमान में वे मध्य प्रदेश की राजनीति, प्रशासन, सामाजिक मुद्दों और स्थानीय समाचारों पर विशेष रूप से लेखन एवं संपादन कार्य कर रहे हैं।

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