एस्ट्रो टर्फ मैदान क्‍या होते हैं जानें……
हॉकी एस्ट्रो टर्फ मैदान क्‍या होते हैं जानें......

एस्ट्रो टर्फ मैदान क्‍या होते हैं जानें……

एस्ट्रो टर्फ मैदान क्‍या होते हैं जानें सम्‍पूर्ण जानकारी……..

एस्ट्रो टर्फ इतिहास(Astroturf History)

एस्ट्रो टर्फ स्पोर्टग्रुप की एक अमेरिकी सहायक कंपनी है जो खेलने के लिए कृत्रिम टर्फ का उत्पादन करती है। मूल एस्ट्रोटर्फ उत्पाद 1965 में मोनसेंटो ने इसका आविष्कार किया गया था। जो एक शॉर्ट-पाइल सिंथेटिक टर्फ था ।

2000 के दशक की शुरुआत से, एस्ट्रोटर्फ ने लम्बे पाइल सिस्टम का व्‍यापार  किया जाता था। जो प्राकृतिक टर्फ को सही तरीके से दोहराने के लिए इन्फिल वस्‍तु का उपयोग करते हैं 2016 में, एस्ट्रोटर्फ जर्मन आधारित स्पोर्टग्रुप की सहायक कंपनी बन गई, जो स्पोर्ट्स सरफेसिंग कंपनियों का ही एक परिवार है,

जिसका स्वामित्व निवेश फर्म इक्विस्टोन पार्टनर्स यूरोप के पास है शॉर्ट-पाइल टर्फ के शुरुआत में कई प्रमुख स्टेडियम खराब हो गयें , लेकिन उत्पाद में सुधार की बहुत अधिक आवश्‍यकता थी। दिशात्मकता और कर्षण की फिर्क ने मोनसेंटो के अनुसंधान एवं विकास विभाग को एक बनावट वाले नायलॉन प्रणाली को लागू करने के लिए प्रेरित किया।

1987 में, मोनसेंटो ने डाल्टन, जॉर्जिया में अपने एस्ट्रोटर्फ ने अपनी तकनीकी गतिविधियों को एस्ट्रोटर्फ इंडस्ट्रीज,एसआरआई ने एस्ट्रो टर्फ ब्रांड को ग्रहण किया। 1996 में, एसआरआई को अमेरिकन स्पोर्ट्स प्रोडक्ट्स ग्रुप इंक द्वारा अधिग्रहित किया गया नायलॉन को बाहर निकलते ही उसे एक अच्‍छी बनावट प्रदान की गई। जिसके उत्पाद समान हो गया।

2000 के दशक की शुरुआत से एस्ट्रो टर्फ के मुख्य प्रतियोगी फील्डटर्फ ने पुराने उत्पादों की तुलना में प्राकृतिक घास की नकल करने के लिए इंफिल के साथ लंबे ढेर पॉलीइथाइलीन टर्फ का उत्पाद किया। तीसरी पीढ़ी के इस मैदान, जैसा की ज्ञात हो गया, ने बाज़ार के परिदृश्य को बदल दिया।

हालांकि एसआरआई ने तीसरी पीढ़ी के टर्फ उत्पाद, एस्ट्रोप्ले का सफलतापूर्वक व्‍यापार किया, और बढ़ती प्रतिस्पर्धा ने मुकदमों को रास्ता दिया। 2000 में, एसआरआई को एक मुकदमे में $1.5 मिलियन का पुरस्कार दिया गया था, जब यह समझा गया था कि एस्ट्रोटर्फ  ने अपने स्वयं के उत्पाद के बारे में झूठे बयान देकर और एस्ट्रोटर्फ और एस्ट्रोप्ले उत्पादों के बारे में झूठे दावे करके जनता से झूठ बोला है।

टेक्सास में यूएफसीयू डिस्क-फ़ॉक फील्ड , एक पुरानी शैली की एस्ट्रो टर्फ सतह का उपयोग कर दिया जिसे बाद में बदल दिया गया है उनकी कानूनी जीत के बावजूद, बढ़ी हुई प्रतिस्पर्धा ने इसका असर डाला। और 2004 में, एसआरआई ने दिवालिया घोषित कर दिया।

दिवालियेपन की कार्यवाही में से, डाल्टन, जॉर्जिया के टेक्सटाइल मैनेजमेंट एसोसिएट्स, इंक. टीएमए ने एस्ट्रोटर्फ ब्रांड और अन्य संपत्तियों का अधिग्रहण किया। टीएमए ने एस्ट्रो टर्फ, एलएलसी कंपनी के तहत एस्ट्रो टर्फ का व्‍यापार शुरू किया।

2006 में, जनरल स्पोर्ट्स वेन्यू जीएसवी अमेरिकी बाजार के लिए एस्ट्रो टर्फ ब्रांड के लिए टीएमए का मार्केटिंग पार्टनर बन गया। एस्ट्रोटर्फ, एलएलसी ने शेष विश्व में एस्ट्रोटर्फ की मार्केटिंग को संभाला। और 2009 में, टीएमए ने प्रत्यक्ष विक्रेता के रूप में बाज़ार में प्रवेश करने के लिए GSV का अधिग्रहण किया।

एस्ट्रो टर्फ, एलएलसी ने अपने प्रयासों को अनुसंधान और विकास पर केंद्रित किया, जिसने तेजी से विकास को बढ़ावा दिया है। एस्ट्रोटर्फ ने एस्ट्रोफ्लेक्ट एक गर्मी कम करने वाली तकनीक और फील्ड प्रीफैब्रिकेशन इनडोर, जलवायु-नियंत्रित इनलेइंग सहित नई उत्पाद सुविधाओं और स्थापना विधियों को प्रस्‍तुत किया । एस्ट्रोटर्फ ने “रूटजोन” नामक एक उत्पाद भी पेश किया, जिसमें क्रिम्प्ड फाइबर शामिल थे, जिन्हें इनफिल को घेरने के लिए डिज़ाइन किया गया था।

2016 में, स्पोर्टग्रुप होल्डिंग ने घोषणा की वह एस्ट्रो टर्फ को अपनी संबद्ध विनिर्माण सुविधाओं के साथ खरीदेगा। एस्ट्रोटर्फ ब्रांड अब उत्तरी अमेरिका में एस्ट्रो टर्फ कॉर्पोरेशन के रूप में काम करता है।

अगस्त 2021 में, एस्ट्रोटर्फ यूनाइटेड सॉकर लीग के लिए कृत्रिम टर्फ का आधिकारिक आपूर्तिकर्ता बन गया। जो यूएस पुरुषों के सॉकर पिरामिड के दूसरे, तीसरे और चौथे स्तर और यूएस महिला सॉकर पिरामिड के दूसरे स्तर पर सॉकर लीग चलाते हैं ।

एस्ट्रो टर्फ मैदान क्‍या होते हैं 

यह इस तरह के मैदान होते हैं जिसमें आर्टिफिशियल प्लास्टिक घास संपूर्ण मैदान में लगी होती है. इसके अंदर चारों तरफ स्प्रिंगलड़ के जरिए मैच से पूर्व पानी का छिड़कावकर इसे मैच खेलने के लिए तैयार किया जाता है।

इस मैदान के अंदर खिलाड़ियों एवं बॉल की स्पीड नेचुरल खेल मैदान से 3 गुना अधिक हो जाती है। इससे खिलाड़ियों में शारीरिक क्षमता बढ़ने के साथ ही तकनीकी तौर पर प्रदर्शन में व्यापक सुधार आता है

एस्ट्रो टर्फ मैदान की खासियत 

एस्ट्रो टर्फ मैदान की खास बात यह होती है, कि यह पूरी तरह समतल होता है। इसमें क्रत्रिम(Artificial) घास उगाई जाती है, जो साधारण घास की अपेक्षा अधिक मजबूत होती है। इस घास की मिट्टी के अंदर पकड़ मजबूत होती है, जिससे खेल के दौरान यह उखड़ती नहीं है। यही नहीं, खेल के दौरान मैदान पर गड्ढे हो जाने की समस्या से छुटकारा मिल जाता है।

एक समय ऐसा भी था जब विश्व में भारत का डंका बजा करता था लेकिन पिछली शताब्दी के सत्तर के दशक में जब से एस्ट्रो टर्फ (कृत्रिम घास) के मैदान में घुसा, करता था । एस्ट्रो टर्फ और विश्व संस्था में ढीली पकड़ की वजह से भारत का दबदबा धीरे-धीरे कमजोर पड़ता चला गया। एक समय ये हालात हो गए थे कि भारतीय टीमें ओलंपिक मेडल से बहुत दूर हो गई थी, क्वालीफाई करने तक के लिए तरसने लगी थी।

एस्ट्रो टर्फ से पहले भारत  

ऐस्ट्रो टर्फ पर खेलने का नियम अनिवार्य होने से पहले भारतीय  पूरी दुनिया पर राज करती थी, बस उसे अपने नये-नेवले पड़ोसी पाकिस्तान से थोड़ी-बहुत चुनौती मिला करती थी। भारत ने अपने आठ ओलम्पिक स्वर्ण पदकों (1928, 1932, 1936, 1948, 1952, 1956, 1964 और 1980) में से सात घास के मैदान पर दबदबा बनाते हुए जीते थे।

भारत एस्ट्रो टर्फ के आने से पहले साल 1928, 1932, 1936, 1948, 1952, 1956 और 1964 के ओलंपिक में स्वर्ण विजेता था। भारत घास के मैदान पर खेले गए 1966 के एशियन गेम्स और 1975 के वर्ल्ड कप का भी विजेता बना।

1960 के रोम ओलम्पिक में रजत पदक विजेता बनने के बाद भारत ने 1968 और 1972 के ओलम्पिक में दो बार कांसा जीता।

एस्ट्रो टर्फ मैदान से खिलाड़ियों को मिलेगा फायदा 

एस्ट्रोर्टफ मैदान बनने से इसका सीधा फायदा भारत के उन सभी खिलाड़ियों को होगा, जो एस्ट्रोटर्फ की प्रैक्टिस के चलते राष्ट्रीय व अंतराष्ट्रीय खेलों में वंचित रह जाते हैं। भारत में ऐसे खिलाड़ियों की संख्या  बहुत अधिक है, जो राष्ट्रीय व अंतर्राष्ट्रीय प्रतियोगिता में भाग ले चुके हैं।

CATEGORIES
Share This

COMMENTS

error: Content is protected !!