विवाह प्रसंग के साथ महिलाओं ने गाए मंगलगीत

विवाह प्रसंग के साथ महिलाओं ने गाए मंगलगीत

श्रीमद् भागवत कथा में श्रीकृष्ण-रुकमणी विवाह का आयोजन

इटारसी। नयी गरीबी लाइन(Gabribi Line) में यजमान कैलाश रैकवार के यहांं आयोजित श्रीमद् भागवत कथा(Bhagwat Katha) ज्ञान यज्ञ सप्ताह के छठे दिन कथावाचक पं. उपेन्द्र व्यास(Pandit Updendra Vyas) उज्जैन वालों ने श्रीकृष्ण-रुकमणि विवाह प्रसंग सुनाया। श्रीकृष्ण-रुकमणि विवाह में महिलाओं ने मंगल गीत गाकर उपहारों की सौगात दी। कथावाचक ने बताया कि रुकमणि कुंडिनपुर नरेश राजा भीष्म की पुत्री और साक्षात लक्ष्मी का अवतार थी।

श्रीमद् भागवत कथा में शनिवार को श्रीकृष्ण व रुक्मणि विवाह का आयोजन हुआ। कथावाचक पंडित उपेन्द्र व्यास ने कहा कि आज भी समाज में कंस और रावण जैसे राक्षसी प्रवृत्ति के लोग घूम रहे हैं, इनसे सावधान रहने की जरूरत है। उन्होंने कहा कि रावण और कंस जैसे आचरण से बचना चाहिए। गुरु की महिमा बताते हुए उन्होंने कहा कि गुरु हमेशा जानकर ही बनाना चाहिए।

उन्होंने सांदीपनी गुरुजी से श्रीकृष्ण और बलराम का शिक्षा ग्रहण करने का प्रसंग सुनाया। उन्होंने कहा कि सांदीपनी जैसे सच्चे गुरु जीवन में तभी मिलेंगे जब आप माता-पिता की सच्चे मन से सेवा करेंगे और फिर गुरु मिलेंगे जो ईश्वर से आपको मिलाएंगे। उन्होंने कहा कि सच्चा गुरु भी वही होता है जो जीवन से तृष्णा का नाश कर दे, जो खुद से मिला दे। जिस दिन खुद से जुड़ जाएंगे सारी समस्या का अंत हो जाएगा। श्री व्यास ने कहा कि स्वच्छ विचार रखें, अपने संस्कार में स्वच्छता लाएं, अपने आसपास का वातारण साफ-सुथरा रखें, चाहे इसके लिए एक टीम बनाकर ही क्यों न काम करना पड़े, उसे अवश्य ही करें।

केवल धर्म साथ जाएगा
उन्होंने कहा कि खाने में, देखने में, बोलने में, सुनने में, मन से, तन से धर्म इक_ा करो क्योंकि धर्म ही साथ जाएगा शेष सब यहीं रह जाएगा। धन जाए तो जाए, धर्म नहीं जाना चाहिए। उन्होंने कहा कि जबसे हमने धन का महत्व बढ़ा लिया है, धर्म घट गया है। सात्विक जीवन जीएं, संगठित परिवार, संस्कारित परिवार रहे, एकता रहे तो भगवान भी साथ रहते हैं। सत्संग हमेशा करते रहना चाहिए क्योंकि सत्संग जीवन में आक्सीजन के समान काम करता है। जीवन में प्रेम उत्पन्न करो, दुनिया के लिए आप कितने ही विद्वान बन जाओ, यदि जीवन में प्रेम नहीं तो सब बेकार है।

 

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