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राज्य सायबर सेल ने सिम कार्ड खरीदते समय रखने वाली सावधानियां बतायीं

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इटारसी। राज्य सायबर सेल ने आमजन को सायबर अपराधों से बचाने सिम कार्ड खरीदते समय रखी जाने वाली सावधानियां बतायी हैं, क्योंकि मोबाइल आम आदमी की जिंदगी का अनिवार्य हिस्सा हो गया है। मोबाइल ने हमको जितनी सुविधा दी है, उतनी ही जोखिम की आशंका भी बढ़ा दी है।

भारतीय पुलिस सेवा, अतिरिक्त पुलिस महानिदेशक, राज्य सायबर पुलिस मुख्यालय भोपाल योगेश देशमुख ने बताया कि सोचिए, क्या हो अगर आपके नाम की सिम कुख्यात अपराधी के हाथ लग जाए और उसका इस्तेमाल गंभीर अपराधों में किया जाने लगे। यह सिर्फ कल्पना ही नहीं हकीकत भी है। पुलिस ने ऐसे कई मामलों का भंडाफोड़ किया है, जहां नागरिकों के नाम पर सिम कार्ड इश्यू कराकर उसे अपराधियों के हाथ पहुंचाया जा रहा है। दरअसल, पुलिस से बचने और क्राइम करने के लिए अपराधी अक्सर फर्जी सिम का सहारा लेते हैं।

ऐसे होता है फर्जीवाड़ा

  • मोबाइल सिम को लेकर फर्जीवाड़ा करने वाले लोग गांवों में जाकर लोगों को सरकारी योजनाओं का झांसा देते हैं और उनसे आधार की डीटेल लेकर या बायोमेट्रिक थंब/अंगूठा लगवाकर उनके नाम से सिम कार्ड एक्टिवेट करा लेते हैं। फिर इस सिम को पैसे लेकर अपराधारियों को बेच दिया जाता है।
  • दूसरा तरीका ये है कि जब आप दुकान या स्टोर पर सिम खरीदने जाते हैं तो दुकानदार आपके आधार पर एक सिम एक्टिवेट करके आपको दे देता है, फिर पुन: किसी बहाने से आपका अंगूठा लगवाकर 2-3 और सिम एक्टिवेट करके अपराधियों या धोखाधड़ी करने वालों को बेच देता है।

ऐसे रखें सावधानियां

  • सिम खरीदने के लिए ऑफिशियल स्टोर पर ही जाएं।
  • सिम कार्ड को हमेशा पैकेट बंद ही खरीदें और पहले से एक्टिवेट सिम को खरीदने से बचें।
  • अपनी सिम के नाम-पते का संबंधित टेलीकॉम कंपनी के ऐप से वेरिफिकेशन जरूर करें। किसी दुकान, होटल आदि को जो भी डॉक्यूमेंट दें, उसमें उपयोग का उद्देश्य लिखकर डॉक्यूमेंट में लगी फोटो पर क्रॉस साइन कर दें, इससे डॉक्यूमेंट का दूसरा इस्तेमाल नहीं हो सकेगा।
  • यदि सरकारी योजनाओं के नाम से कोई आपकी निजी जानकारी या बायोमेट्रिक धंब/अंगूठा ले रहे हों तो पंचायत सरपंच, सचिव या वार्ड मेंबर आदि से उनकी वास्तविकता का पता लगा लें।
  • अपने आधार पर जारी की गई सिमों की संख्या का पता https://sancharsaathi.gov.in Website पर – “KNOW YOUR MOBILE CONNECTIONS” विकल्प के माध्यम से लगाया जा सकता है और जो भी नंबर आप उपयोग नहीं कर रहे हैं उसे ब्लॉक करवा सकते हैं।
  • यदि आपके साथ भी कोई सायबर अपराध घटित होता है या आपको किसी तरह के सायबर अपराध की जानकारी मिलती है तो उसकी शिकायत अपने नजदीकी पुलिस थाने में या www.cybercrime.gov.in या Cyber Crime Help Line (Toll Free) नम्बर 1930 पर करें।

Rohit Nage

रोहित नागे वरिष्ठ पत्रकार एवं समाचार संपादक हैं, जिन्हें प्रिंट, इलेक्ट्रॉनिक और डिजिटल मीडिया में तीन दशक से अधिक का अनुभव है। उन्होंने माखनलाल चतुर्वेदी राष्ट्रीय पत्रकारिता विश्वविद्यालय, भोपाल से पत्रकारिता में स्नातक किया है तथा लोक प्रशासन में स्नातकोत्तर उपाधि प्राप्त की है। अपने पत्रकारिता जीवन में उन्होंने दैनिक भास्कर, दैनिक जागरण, राज एक्सप्रेस, पीपुल्स समाचार, नवभारत सहित अनेक प्रतिष्ठित समाचार संस्थानों में रिपोर्टर, उप-संपादक, ब्यूरो प्रमुख एवं न्यूज़ इंचार्ज के रूप में कार्य किया है। वे Narmadanchal.com के रिपोर्टर, उप-संपादक, एवं न्यूज़ इंचार्ज के रूप में कार्य कर रहे हैं और नर्मदांचल क्षेत्र की निष्पक्ष, तथ्यपरक एवं जनहित से जुड़ी पत्रकारिता के लिए जाने जाते हैं। वर्तमान में वे मध्य प्रदेश की राजनीति, प्रशासन, सामाजिक मुद्दों और स्थानीय समाचारों पर विशेष रूप से लेखन एवं संपादन कार्य कर रहे हैं।

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