- स्वातंत्र्यवीर सावरकर के नाम पर बनाए जा रहे स्टेडियम में हुआ कार्यक्रम
- नगरपालिका अध्यक्ष सहित भाजपा कार्यकर्ताओं ने दी श्रद्धाजंलि
इटारसी। नगरपालिका अध्यक्ष पंकज चौरे सहित भाजपा कार्यकर्ताओं ने स्वातंत्र्य वीर सावरकर की पुण्यतिथि पर उन्हें श्रद्धांजलि दी। पुरानी इटारसी सूखा सरोवर मैदान जो अब वीर सावरकर मैदान हो गया है वहां श्रद्धाजंलि कार्यक्रम आयोजित हुआ। नगरपालिका अध्यक्ष श्री चौरे ने सावरकर को त्याग और तप की प्रतिमूर्ति बताया।
नपाध्यक्ष श्री चौरे ने कहा कि मातृभूमि की सेवा में समर्पित उनका जीवन देशवासियों के लिए हमेशा प्रेरणास्रोत बना रहेगा। वीर सावरकर का निधन 26 फरवरी 1966 को मुंबई में हुआ था। नगरपालिका अध्यक्ष पंकज चौरे ने वीर सावरकर के जीवन पर प्रकाश डालते हुए कहा कि वे इतने बडे राष्ट्रवादी क्रांतिकारी थे कि उनसे अंग्रेजो के साथ ही कांग्रेस भी डरी हुई थी। श्री चौरे ने कहा कि आजादी के पहले और बाद में वीर सावरकर का नाम इसलिए इतिहास से गुम कर दिया गया क्योंकि कांग्रेस को प्यारे बच्चे को प्रधानमंत्री बनाना था। श्री चौरे ने कहा कि वीर सावरकर से बड़ा चिंतक, राष्ट्रवादी व्यक्ति कांग्रेस में नहीं था, इसलिए उन्होंने एक साजिश के तहत वीर सावरकर का नाम इतिहास में दर्ज नहीं होने दिया।
श्री चौरे ने कहा कि भारत का प्रत्येक क्रांतिकारी उन्हें आदर्श मानता था, उन्होंने बम, बारुद, पिस्टल कैसे बनती है, इसकी जानकारी क्रांतिकारियों को पहुंचाने वाले वीर सावरकर थे। वे पहले ऐसे व्यक्ति थे जिनकी दो पुस्तकें प्रकाशन के पहले ही पूरे विश्व में प्रतिबंधित कर दी गई। उनकी हर बार, हर लाइन क्रांति की ओर लोगों को बढ़ाती थी। श्री चौरे ने कहा कि 2014 में प्रधानमंत्री बनने के बाद श्री नरेंद्र मोदी ने संसद भवन में उनके चित्र पर माल्यार्पण कर उनके बलिदान को देश के सामने लगाने के लिए गंभीर प्रयास किए।
यहां भाजपा पिछडा वर्ग मोर्चा जिला अध्यक्ष जयकिशोर चौधरी, भाजपा मंडल अध्यक्ष पुरानी इटारसी मंयक मेहतो, भाजपा सैनिक प्रकोष्ठ के जिलाध्यक्ष मेजर डॉ पंकज मणी पहाडिया ने वीर सावरकर के जीवन पर प्रकाश डाला।
इस अवसर पर राजकुमार गालर, विनोद लोंगरे, अशोक मालवीय, नरेश माझी, मुकेश राय, बबिता चौहान, शशांक मालवीय, अतुल शुक्ला, राहुल प्रधान, सतीश पटेल, रौनक मालवीय, राहुल चौरे, रूपेश शर्मा, अवधेश मालवीय, गौरव कोरी, शुभम पटेल, गोविंद मेहतो, मनीष गालर सहित अन्य मौजूद थे।
कांग्रेस पार्षदों की मजबूरी थी, जश्न में साथ थे
नपाध्यक्ष श्री चौरे ने कहा कि परिषद के सम्मेलन में कुछ कांग्रेस पार्षदों की मजबूरी थी कि वे सूखा सरोवर का नाम वीर सावरकर जी के नाम पर करने के विरोध में रहे। लेकिन जब पुरानी इटारसी के नागरिकों ने हमारा सम्मान किया तो वे इस दौरान इस जश्न में शामिल हुए, इसकी तस्वीर व फोटो देखे जा सकते हैं। श्री चौरे ने कहा कि वे इसलिए खुशी में शामिल हुए क्योंकि उन्हें पता कि वीर सावरकर राष्ट्रवादी थे, लेकिन पार्टी लाइन के कारण विरोध करना उनकी मजबूरी थी।









