इटारसी। वर्धमान विद्यालय में आयोजित दो दिवसीय ‘मिट्टी के गणेश बनाने’ की कार्यशाला का सफलतापूर्वक समापन हो गया। इस अनूठी पहल में छात्रों के साथ-साथ उनके अभिभावकों ने भी उत्साहपूर्वक भाग लिया, जिसका उद्देश्य बच्चों को अपनी संस्कृति और पर्यावरण से जोडऩा था।
कार्यशाला के पहले दिन कक्षा 1 से 6 तक के विद्यार्थियों और उनके अभिभावकों ने हिस्सा लिया, जबकि दूसरे दिन नर्सरी से यूकेजी तक के नन्हे-मुन्ने बच्चों और उनके माता-पिता ने इस आयोजन में अपनी रचनात्मकता का प्रदर्शन किया।
पर्यावरण और संस्कृति से जुड़ाव का संदेश
कार्यशाला का उद्घाटन डॉ. अतुल पारे, वर्धमान ग्रुप के चेयरमैन प्रशांत जैन और मूर्तिकार विवेक सनातनी ने दीप प्रज्वलित कर किया। चेयरमैन प्रशांत जैन ने कहा कि इस आयोजन का मुख्य उद्देश्य बच्चों और अभिभावकों को एक साथ समय बिताने का मौका देना है, साथ ही उन्हें अपनी समृद्ध परंपरा, संस्कृति और सभ्यता से जोड़े रखना है।
उन्होंने जोर देकर कहा कि मिट्टी से गणेश जी की प्रतिमा बनाना न केवल हमें अपनी जड़ों से जोड़ता है, बल्कि यह पर्यावरण संरक्षण का भी एक महत्वपूर्ण संदेश देता है। यह पहल प्लास्टर ऑफ पेरिस और प्लास्टिक से बनी मूर्तियों का एक बेहतर विकल्प है, जो हमारी भावनाओं, संस्कृति और प्रकृति, तीनों की रक्षा करता है।
अतिथियों ने किया मार्गदर्शन
इस अवसर पर, डॉ. अतुल पारे ने भी अपने विचार साझा किए और सभी को पर्यावरण संरक्षण के महत्व के बारे में बताया। दूसरे दिन मूर्तिकार विवेक सनातनी ने भी बच्चों और अभिभावकों को मार्गदर्शन दिया। इस पूरी कार्यशाला को सफल बनाने में वर्धमान जूनियर की सभी शिक्षिकाओं का महत्वपूर्ण योगदान रहा।








