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‘वो पन्द्रह’

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  • मिलिन्द रोंघे
Baldness has hope from politics

भारत द्वारा लोकतांत्रिक प्रणाली अपनाने के साथ संविधान निर्माण के लिए 6 दिसम्बर 1946 को संविधान सभा का गठन किया गया। संविधान सभा का मुख्यत: ऐतिहासिक कार्य लिखित संविधान का मसौदा निर्माण करना था, जो उसने लगभग तीन वर्ष में पूरा किया । संविधान सभा ने ही 22 जुलाई 1947 को राष्ट्रीय ध्वज को अपनाया, ब्रिटिश राष्ट्रमंडल में सदस्यता को मंजूरी दी, डॉ. राजेन्द्र प्रसाद को राष्ट्रपति के रूप में चुना गया और राष्ट्रगान और राष्ट्रगीत को भी अपनाया। 26 जनवरी 1950 को संविधान लागू होने के बाद 1952 के पहले आम चुनाव तक अंतरिम संसद के रूप में कार्य किया। संविधान सभा के पहले सभापति सच्चिदानंद सिन्हा थे किंतु बाद में डॉ. राजेन्द्र प्रसाद को निर्वाचित किया। सभा की 22 समितियां थी जिसमें सबसे प्रमुख मसौदा समिति के प्रमुख डॉ. भीमराव अम्बेडकर थे। 389 लोगों की संविधान सभा में भारत विभाजन के बाद 299 (229 निर्वाचित और 70 मनोनीत इनमें अनुसूचित जाति के 26 एवं अनुसूचित जनजाति के 33 थे) रह गये थे।

संविधान सभा के सदस्यों में पन्द्रह महिलाऐं थी जिनमें श्रीमती सरोजिनी नायडू (हैदराबाद से जिन्हें ‘भारत कोकिला’ या नाइटिंगल आफ इंडिया के नाम से भी जाना जाता है।) राजकुमारी अमृत कौर (उत्तर प्रदेश), सुचेता कृपलानी (अंबाला), रेणुका राय (पश्चिम बंगाल) दुर्गाबाई देशमुख (राजमुंदरी आंध्रप्रदेश ) हंसा मेहता (बड़ौदा) बेगम ऐजाज रसूल (मालरकोट) अम्मु स्वामीनाथन (पालघाट केरला), दक्षयानी वेलायुधान (दलित समाज की प्रतिनिधि कोचीन केरल) मालती चौधरी (ओडि़सा) विजयालक्ष्मी पंडित (इलाहाबाद) पूर्णिमा बेनर्जी (इलाहाबाद), लीला राय (गोलपाड़ा, आसाम) कमला चौधरी (प्रसिद्ध लेखिका, लखनऊ) एवं एनी मास्करैन (तिरूअनंतपुरम) थी ।

श्रीमती सरोजिनी नायडू : (जिन्हें ‘भारत कोकिला’ या नाइटिंगल आफ इंडिया के नाम से भी जाना जाता है।) सरोजिनी नायडू का जन्म 13 फरवरी 1879 को हैदराबाद में अघोरनाथ चट्टोपाध्याय एवं बराडा सुंदरी देवी के यहां हुआ। 13 वर्ष की आयु से ही कविता लिखने वाली सरोजिनी को काव्य संग्रह गोल्डन थ्रेशोल्ड, बर्ड आफ टाइम, ब्रोकन विंग ने उन्हें कवि के रूप में मान्यता दी। हिन्दी, अंग्रेजी, बांग्ला और गुजराती भाषाओं पर एकाधिकार रखने वाली एवं अंग्रेजी सत्ता के खिलाफ अनेक आंदोलन में सक्रिय रहीं सरोजिनी ने स्वतंत्रता संग्राम के दौरान ब्रिटिश राज में घूम-घूम कर देश में अलख जगाई। वे 1925 में भारतीय महिला कांग्रेस की पहली अध्यक्ष बनी। संविधान सभा की सदस्य रही सरोजिनी नायडू को देश की पहली महिला राज्यपाल (उत्तरप्रदेश) होने का भी गौरव मिला। उनकी मृत्यु 2 मार्च 1949 को लखनऊ में हुई।

राजकुमारी अमृत कौर आहलुवालिया (उत्तर प्रदेश) :- 16 वर्ष तक गांधीजी की सचिव रही राजकुमार अमृत कौर का जन्म 2 फरवरी 1887 को लखनऊ में कपूरथला राजघराने के राजा हरनाम सिंह और रानी प्रिंसीला कौर साहिबा के यहां हुआ। ऑक्सफोर्ड विश्वविद्यालय से स्नातक उपरांत वह भारत में आकर पहले गोपाल कृष्ण गोखले और उसके बाद महात्मा गांधी के संपर्क में आयी। जलियांवाला हत्याकांड के बाद सक्रियरूप से कांग्रेस से जुड़ गयी। सामाजिक सुधार सहित पर्दाप्रथा, निरक्षरता, बाल विवाह और देवदासी प्रथा की विरोधी अमृत कौर ने इसके लिए अभियान भी चलाया। दांडी मार्च के बाद वह जेल में भी रहीं। 1947 में टाइम पत्रिका द्वारा ‘वूमन आफ द ईयर’ से नामित किया। वह देश की पहली स्वास्थ्य मंत्री (1947 से 1957 तक) रही और एम्स की स्थापना में उनका बड़ा योगदान है। उनकीं मृत्यु 6 फरवरी 1964 को नईदिल्ली में हुई।

सुचेता कृपलानी (अंबाला) : 25 जून 1908 को जन्म अंबाला में एचएस मजूमदार के यहां हुआ था। उनका प्रारंभिक शिक्षण अनेक स्थानों पर हुआ और स्नातक उन्होंने इन्द्रप्रस्थ कालेज दिल्ली से किया बाद में कांग्रेस की सदस्य बनी और 1942 में भारत छोड़ो आंदोलन में सक्रिय भूमिका निभायी और एक वर्ष तक जेल में भी रहीं। 1946 में संयुक्त प्रांत से संविधान सभा के लिए निर्वाचित सुचेता आजादी/विभाजन के समय गांधीजी के साथ बंगाल में रहकर पुनर्वास में अहम भूमिका निभायी। पहली और दूसरी लोकसभा की सदस्य रही सुचेता कृपलानी 1948 से 1960 तक भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस की महासचिव रही। गांधीजी के विरोध के बाद भी उन्होंने 1936 में गांधीवादी नेता आचार्य कृपलानी से विवाह किया। आजादी के कुछ समय बाद सुचेता कांग्रेस में शामिल हो गयी लेकिन आचार्य कृपलानी समाजवादी पृष्ठभूमि के कारण आजीवन कांग्रेस विरोध की राजनीति करते रहे। आचार्य कृपलानी ने भारत चीन युद्ध के बाद संसद के अधिवेशन में लगभग 42 मिनट तक नेहरूजी की तीखी आलोचना की, नेहरूजी सहित समूचा सत्तापक्ष उनकी आलोचना शांति से सुनता रहा। उस समय दर्शक के समय सुचेता कृपलानी भी उपस्थित थी। देश की पहली महिला मुख्यमंत्री (अक्टूबर 1963-मार्च 1967) बनने वाली सुचेता कृपलानी का निधन 1 दिसम्बर 1974 को दिल्ली में हुआ।

रेणुका रे (पश्चिम बंगाल) : आईसीएस अधिकारी सतीश चन्द्र मुखर्जी और चारूलता मुखर्जी की बेटी रेणुका रे का जन्म 4 जनवरी 1904 को हुआ। 16 वर्ष की आयु में गांधीजी के संपर्क में आई और उन्हीं के आव्हान पर 1921 में लंदन स्कूल आफ इकोनामिक्स में दाखिला लिया। वो सक्रिय सामाजिक कार्यकर्ता और प्रसिद्ध स्वतंत्रता संग्राम सेनानी, राजनीतिज्ञ थी। उनका विवाह सत्येन्द्रनाथ रे से हुआ। 1943 में उन्हें महिलाओं के प्रतिनिधि के रूप में केन्द्रीय विधान सभा के लिए मनोनित किया। वह संविधान सभा की महिला निर्वाचित सदस्यों में से एक थी जिन्होंने सतत् महिला अधिकारों के लिए आवाज बुलंद की। वे बंगाल सरकार में मंत्री रही उसके बाद 1957 से 1967 तक मालदा से सांसद भी रही । 1988 में उन्हें पद्य भूषण से सम्मानित किया। 11 अप्रैल 1997 को मालदा बंगाल में उनका देहांत हुआ।

दुर्गाबाई देशमुख (राजमुंदरी आंध्रप्रदेश) : 15 जुलाई 1909 को राजमुंदरी में बीवीएन रामाराव और श्रीमती कृष्णवेनम्मा के यहां जन्मी दुर्गाबाई ने महिला अधिकारों और शोषण से मुक्ति के लिए 1937 में आंध्र महिला सभा की स्थापना की। संविधान सभा की महिला निर्वाचित सदस्यों में से एक श्रीमती दुर्गाबाई केन्द्रीय समाज कल्याण मंडल की संस्थापक अध्यक्ष रहीं। स्वतंत्रता के दौरान चार वर्ष जेल में रही दुर्गा बाई संविधान सभा की अध्यक्षीय तालिका में एकमात्र महिला सदस्य थीं। मद्रास से निर्वाचित होने के बाद भी उन्होंने हिन्दुस्तानी भाषा (हिन्दी एवं उर्दू) को राष्ट्रभाषा बनाने की मांग रखी। हत्या के प्रकरण में बहस करने वाली पहली अधिवक्ता मानी जाने वाली दुर्गा बाई ने 1953 में देश के रिजर्व बैंक के पहले गर्वनर और वित्तमंत्री सीडी देशमुख से विवाह किया। उन्होंने ‘द स्टोन दॅट स्पीकेथ’ और ‘चिंतामन एण्ड ऑय’ पुस्तक भी लिखी। उनका निधन 09 मई 1981 को नारासनापेता में हुआ।

हंसा मेहता (बड़ौदा) : स्वतंत्रता संग्राम सेनानी, शिक्षाविद्, समाज सुधारक और लेखिका हंसा जीवराज मेहता का जन्म 3 जुलाई 1897 को मनुभाई मेहता और हर्षदा गौरी के यहां हुआ। इंग्लैंड से उच्च शिक्षा प्राप्त कर भारत लौटी हंसा मेहता को बड़ौदा विश्वविद्यालय की वाइस चांसलर बनाया गया। संविधान सभा की मौलिक अधिकारों की उप समिति की सदस्य रही हंसा मेहता ने सदैव महिलाओं के लिए समानता और न्याय की वकालत की। उनका विवाह जीवराज नारायण मेहता (गुजरात के पहले मुख्यमंत्री) से हुआ । 1950 में संयुक्त राष्ट्र संघ के मानवाधिकार आयोग की उपाध्यक्ष रही हंसा मेहता ने गुजराती में बच्चों के लिए अनेक किताबें लिखीं और अनेक कहानियों का अनुवाद कार्य कर साहित्य के क्षेत्र में अनुकरणीय कार्य किया उन्हें 1959 में पद्यभूषण दिया गया उनका निधन 4 अप्रेल 1995 को मुंबई में हुआ।

बेगम ऐजाज रसुल (मालरकोट) : 2 अप्रैल 1909 को मालेरकोट में सर जुल्फीकार अली खान और महमुदा सुल्तान के यहां जन्मी बेगम एजाज रसूल संविधान सभा की एकमात्र मुस्लिम सदस्य थीं। उनका विवाह 1929 में नवाब ऐजाज रसूल से हुआ । वे 1937 में गैर आरक्षित क्षेत्र से चुनाव जीतने वाली बेगम ऐजाज प्रारंभ में मुस्लिम लीग की सदस्य रही। 1946 से 1950 तक मुस्लिम लीग की ओर से संविधान सभा की सदस्य रहीं। इस दौरान मसौदा समिति की बैठक में मुस्लिमों के लिए पृथक निर्वाचन क्षेत्र का विरोध किया। लीग के भंग होने पर वे कांग्रेस में सम्मिलित हो गयी। जमींदार परिवार से आने के बाद भी जमींदार प्रथा की समाप्ति के प्रबल समर्थक, अनेक बार विधायक एवं कुछ समय मंत्री एवं राज्यसभा सदस्य रही बेगम एजाज 20 वर्ष तक अखिल भारतीय महिला हॉकी संघ की अध्यक्ष भी रही। संविधान पर सबसे पहले हस्ताक्षर करने वालों में उनका अंकित है। उन्हें पद्य भूषण से सम्मानित किया। उनका निधन 1 अगस्त 2001 को लखनऊ में हुआ।

अम्मु स्वामीनाथन (पालघाट केरला) : पालघाट में 22 अप्रैल 1894 को गोविंदन नायर और नारायणी अम्मा के साधारण परिवार में जन्मी अम्मु ने 1934 में कांग्रेस की सदस्यता ग्रहण करने के पहले से ही से महिला अधिकारों और सामाजिक कार्या में सक्रिय रहीं। डॉ. सुब्बाराम स्वामीनाथन से विवाह उपरांत उन्हीं के मार्गदर्शन में उनकी विधिवत पढ़ाई प्रारंभ हुई। भारत छोड़ो आंदोलन में एक वर्ष जेल में बंद रही अम्मु 1952 में लोकसभा के लिए ओर बाद में राज्यसभा सदस्य के रूप में कार्य किया। भारत स्काउट गाइड के अध्यक्ष के रूप में 1960-65 के मध्य कार्य किया। 1975 में वे ‘मदर आफ ईयर’ के लिए भी चुनी गई। कानूनविद् गोविंद स्वामीनाथन, आजाद हिन्द फौज की सिपाही लक्ष्मी सहगल और नृत्यांगना मृणालिनी साराभाई की वे मां थी। 4 जुलाई 1978 को पलक्कड (केरल) में उन्होंने अंतिम सांस ली।

दक्षयानी वेलायुधान (दलित समाज की प्रतिनिधि कोचीन केरल) : 4 जुलाई 1912 को एर्नाकुलम जिले में कल्लाचम्मुरी कुंजन और मानी के यहां जन्मी दक्षयानी ने 1935 में स्नातक की डिग्री के बाद अनेक वर्ष शिक्षिका के रूप में कार्य किया। उनका विवाह आर. वेलायुधान से सेवाग्राम वर्धा में हुआ। उन्हें 1945 में कोचीन विधान परिषद के लिए नामित किया। संविधान सभा की एक मात्र दलित समाज (केरल के पुलयार समाज की प्रतिनिधि ) थीं। वे दलित समाज की महिलाओं के उत्थान के लिए संविधान सभा में सतत सक्रिय रहीं। उन्हें संविधान सभा में सबसे युवा नेता के रूप में सम्मिलित होने के अतिरिक्त अनुसूचित जाति की पहली महिला स्नातक होने गौरव प्राप्त हुआ। उनका निधन 20 जुलाई 1978 को हुआ। उनकी स्मृति में केरल सरकार द्वारा 2019 से महिला सशक्तिकरण हेतु पुरस्कार भी दिया जाता है।

मालती चौधरी (ओडि़सा) : 26 जुलाई 1904 को कलकत्ता में बैरिस्टर कुमुद नाथ सेन एव स्नेहलता सेन के यहां मालती देवी का जन्म हुआ। रविन्द्रनाथ टैगोर और गांधीजी के विचारों के पल्लवित मालती की शिक्षा शांति निकेतन में हुई उनका विवाह नवकृष्ण चौधरी से हुआ जो कालांतर में ओडिसा के मुख्यमंत्री भी बने। स्पष्टवक्ता और वंचितों के अधिकारों के लिए लडऩे वाली स्वतंत्रता आंदोलन में अनेक बार जेल भी गई। आजादी के बाद वे राजनीति से दूर हो हो गयीं लेकिन आपातकाल का विरोध किया ओर जेल भी गई। देश के गृहमंत्री रहे इन्द्रजीत गुप्ता उनके भाई लगते थे। जमनालाल बजाज पुरस्कार उन्होंने तत्कालीन प्रधानमंत्री राजीव गांधी से इसलिए लेने से मना कर दिया क्यों कि उनकी मान्यता थी कि राजीव गांधी ने गांधीवादी मूल्यों को बढ़ाने के लिए कुछ नहीं किया। मालती चौधरी की 93 वर्ष की आयु में 15 मार्च 1998 को मृत्यु हुई।

विजयालक्ष्मी पंडित (इलाहाबाद) : मोतीलाल नेहरू और स्वरूप रानी के यहां प्रयागराज में 18 अगस्त 1900 को जन्मी विजया लक्ष्मी पंडित देश के पहले प्रधानमंत्री जवाहरलाल नेहरू की बहन थीं। 1937 में वे प्रांतीय विधानसभा के लिए चुनी गईं। आजादी के आंदोलन के दौरान वह अनेक बार जेल गईं। वे 1937 में प्रांतीय विधानसभा में निर्वाचित होने के बाद मंत्री बनायी गयी। उनका विवाह रंजीत सीताराम पंडित से हुआ। वह 1953 में संयुक्त राष्ट्रसंघ की पहली महिला अध्यक्ष बनायी गयीं। उन्होंने अमेरिका, सोवियत संघ और आयरलैंड में राजदूत के रूप में भी कार्य किया। मान्यता है कि विजया लक्ष्मी पंडित का उनकी भतीजी श्रीमती इंदिरा गांधी से अनेक पारिवारिक कारणों को लेकर विवाद था। सक्रिय राजनीति से संन्यास के बाद उन्होंने आपातकाल का विरोध किया और जनता दल में शामिल हुई इंदिरा गांधी के खिलाफ 1977 में चुनाव प्रचार किया। उनकी ‘द इवॉल्यूशन ऑफ इंडिया’ और ‘द स्कोप आफ हैप्पीनेस: ए पर्सनल मेमोयर’ उनकी चर्चित पुस्तकें हैं। उनकी मृत्यु 1 दिसंबर 1990 को देहरादून में हुई।

पूर्णिमा बेनर्जी (इलाहाबाद) : उपेन्द्रनाथ गांगुली और अम्बालिका देवी के यहां पूर्णिमा बेनर्जी का जन्म 1911 में कालका (पंजाब) में हुआ था। उन्हें इलाहाबाद में भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस समिति का सचिव चुनाव गया। 1930 के दांडी मार्च और 1942 के भारत छोड़ो आंदोलन में सक्रियता से भाग लेने वाली पूर्णिमा 1946 में उत्तरप्रदेश विधानसभा की सदस्य बनी। समाजवादी विचारधारा के लिए प्रतिबद्ध पूर्णिमा बेनर्जी को संयुक्त प्रांत से संविधान सभा में नामित किया था जहां उन्होंने शिक्षा और आजीविका को मौलिक अधिकारों में सम्मिलित करने की वकालत की । 24 जनवरी 1950 को ‘जन गण मन’ को राष्ट्रगान को अधिकारिक रूप से मान्यता देने के बाद पहली बार गाने वाले में वे भी सम्मिलित थी। उनकी 1951 में नैनीताल में मृत्यु हो गयी।

लीला राय (गोलपाडा, आसाम) : गिरीशचन्द्र नाग एवं कुंजलता नाग के यहां 2 अक्टूबर 1900 को जन्मी लीला राय ने 1921 में अंग्रेजी में आनर्स और ढाका विश्वविद्यालय से 1923 में एमए की उपाधि प्राप्त की। महिला सशक्तिकरण की सशक्त पक्षधर लीला राय ने सामाजिक और राजनैतिक मुद्दों में महिलाओं की भागीदारी और असीमित भूमिका को लेकर 1923 में ‘दीपाली संघ’ की स्थापना की। वह उन्होंने ‘जयश्री’ नामक पत्रिका प्रारंभ की तो, क्रांतिकारी संगठन ‘श्रीसंघ’की सदस्य बनी, 1928 के कांग्रेस अधिवेशन में बंगाल में महिला आंदोलन पर अपना शोध पत्र प्रस्तुत किया। उनका विवाह अनिल चन्द्र राय से हुआ। अनेक वर्ष जेल में रही लीलाराय बाद में नेताजी सुभाषचंद्र बोस के फारवर्ड ब्लाक में शामिल हुई। दिसंबर 1946 में संविधान सभा के लिए चुनी गई। कोलकाता के 1946 के दंगों में उन्होंने अनेक राहत शिविरों में पीडि़तों की मदद की। 1962 में सक्रिय राजनीति से संन्यास के बाद उनका कोलकाता में 11 जून 1970 को उनका निधन हो गया।

कमला चौधरी (प्रसिध्द लेखिका, लखनऊ) : 22 फरवरी 1908 को डिप्टी कलेक्टर मनमोहन दयाल के यहां जन्मी कमला चौधरी सविनय अवज्ञा आंदोलन के दौरान कांग्रेस में शामिल हुई। पंजाब विश्व विद्यालय से रत्न और प्रभाकर की उपाधि लेने वाली कमला चौधरी महिलाओं का जीवन स्तर में सुधार लाने हेतु सतत प्रयत्नशील रही। प्रसिद्ध स्वतंत्रता संग्राम सेनानी एवं राष्ट्रवादी महिला के रूप में उनकी पहचान थी। लैंगिक भेदभाव, किसानों के शोषण और विधवाओं के शोषण की मुखर विरोधी कमला चौधरी संविधान अपनाये जाने के बाद उ.प्र. समाज कल्याण बोर्ड की सदस्य भी रही। संविधान की निर्वाचित सदस्यों में से एक कमला चौधरी 1962 में हापुड़ से सांसद भी रही। उनके चार कहानी संग्रह क्रमश: अनहद, पिकनिक, यात्रा और बेलपत्र नाम से प्रकाशित हुए। 1970 को उनका निधन हुआ।

एनी मास्करैन (तिरूअनंतपुरम) : 6 जून 1902 को तिरूअनंतपुरम के कैथालिक परिवार में गेब्रियल मस्कारेन के यहां जन्मी एनी ने 1925 में इतिहास और अर्थशास्त्र से एमए किया और उसके बाद कानून की डिग्री ली। फरवरी 1938 में पट्टाम थानू पिल्लई नेतृत्व में त्रावणकोर राज्य कांग्रेस गठित पहली कार्यसमिति की सदस्य थी। उन्होंने राज्य में निरंतर दौरे कर धुआंधार और आक्रामक भाषणों से नागरिकों को अंग्रेजी सत्ता के खिलाफ संघर्ष हेतु जागरूक किया। भारत छोड़ो आंदोलन के बाद उन्हें त्रावणकोर राज्य कांग्रेस का सचिव भी बनाया गया। अनेक बार जेल गई ऐनी त्रावणकोर-कोचीन राज्य के प्रतिनिधि के रूप में संविधान सभा की सदस्य थीं। आक्रामक भाषणों के लिए पहचानी जाने वाली एनी के बारे में गांधीजी उन्हीं को लिखते हैं ”वैसे भी मुझे पता है कि आपका आपकी जीभ पर कोई नियंत्रण नहीं है।” वे पहले आम चुनावों में तिरूअनंतपुरम से स्वतंत्र उम्मीद्वार के रूप में विजयी होकर केरल की पहली महिला सांसद के पहले उन्हें राज्य की पहली महिला मंत्री होने का भी गौरव मिला । 19 जुलाई 1963 में उनकी मृत्यु हुई।

मिलिन्द रोंघे, द ग्रेंड एवेन्यु,

इटारसी 9425646588

Rohit Nage

Rohit Nage has 30 years' experience in the field of journalism. He has vast experience of writing articles, news story, sports news, political news.

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