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सावन का पावन आगमन: भक्ति, प्रकृति और रूहानियत का महापर्व

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  • मंजू ठाकुर, 9424482884
Itarsi's soil and New Year's resolutions: Now it's time to look ahead

हिंदू पंचांग के अनुसार सावन (श्रावण) का महीना केवल एक तिथि का बदलना भर नहीं है, बल्कि यह प्रकृति, मानवीय चेतना और आत्मिक बोध के पुनर्जागरण का पर्व है। जेठ और आषाढ़ की भीषण तपन के बाद जब सावन की पहली फुहारें धरती पर गिरती हैं, तो पूरी सृष्टि एक नए उत्साह के साथ खिल उठती है।

आध्यात्मिक चेतना और शिव साधना

शास्त्रों में सावन को भगवान शिव का सबसे प्रिय मास माना गया है। पौराणिक मान्यताओं के अनुसार, इसी महीने में समुद्र मंथन के दौरान निकले हलाहल (विष) को महादेव ने संपूर्ण सृष्टि की रक्षा के लिए ग्रहण किया था।

  • जलाभिषेक की परंपरा: विष की ज्वाला को शांत करने के लिए देवताओं ने शिवजी पर जल अर्पित किया था। इसी स्मृति में सावन में शिवलिंग पर जल, दूध और बेलपत्र चढ़ाने का विशेष महत्व है।
  • साधना और कांवड़ यात्रा: सावन के सोमवार का व्रत संयम और आत्म-शुद्धि का माध्यम है। वहीं, पवित्र नदियों से जल लेकर चलने वाले ‘कांवड़ियों’ की यात्रा अटूट श्रद्धा और संकल्प का अनूठा उदाहरण है।

प्राकृतिक सौंदर्य और नवसृजन

सावन प्रकृति के श्रृंगार का महीना है।

  • धरती का नवजीवन: वर्षा से सूखी धरती हरी-भरी हो जाती है। यह समय कृषि, बीजारोपण और जल निकायों के पुनर्भरण का आधार बनता है।
  • जीव-जगत का संतुलन: तपिश से व्याकुल पशु-पक्षी और वनस्पतियां इस ऋतु में नया जीवन प्राप्त करती हैं।
  • कला, साहित्य और दर्शन का संगम: सावन का रूहानी रंगसावन केवल धार्मिक अनुष्ठानों का पर्व नहीं है, बल्कि यह इंसानी जज्बातों, इश्क़ और रूहानी अहसासों का भी पैगाम लाता है।
  • सिनेमा और गीतों में: भारतीय फिल्मों में सावन को प्रेम, मिलन और विरह (बिछड़ने) की सबसे खूबसूरत पृष्ठभूमि बनाया गया है। “सावन का महीना पवन करे सोर…” और “रिमझिम गिरे सावन…” जैसे सदाबहार नगमे दिल में उमंग और पुरानी यादों की एक मीठी ठंडक घोल देते हैं।
  • कवियों और शायरों की नज़र में: छायावादी कवियों (जैसे सुमित्रानंदन पंत) ने सावन को प्रकृति का अलौकिक सौंदर्य माना, तो वहीं उर्दू शायरों ने सावन की बूंदों को ‘दिल के तारों को छेड़ने वाला संगीत’ और ‘महबूब की यादों का पैगाम’ कहा है।
  • दार्शनिक और रूहानी दृष्टिकोण: दार्शनिकों और सूफियों की नज़र में सावन आत्मा (जीवात्मा) का परमात्मा से मिलन का प्रतीक है। जिस तरह सूखी प्यासी धरती गगन से बरसती बूंदों को अपने भीतर समेटकर तृप्त होती है, ठीक उसी तरह एक भटकती हुई रूह साधना और प्रेम के ज़रिए ईश्वर से जुड़कर शांत और परम आनंदित होती है।

सांस्कृतिक मिठास और वैज्ञानिक दृष्टिकोण

  • उत्सव और लोक-संस्कृति: हरियाली तीज, नाग पंचमी और रक्षाबंधन जैसे पर्व इसी महीने की शोभा बढ़ाते हैं। पेड़ों पर पड़े झूले और लोकगीत वातावरण में उल्लास घोल देते हैं।
  • ऋतुचर्या (स्वास्थ्य लाभ): आयुर्वेद के अनुसार वर्षा ऋतु में पाचन अग्नि मंद पड़ जाती है। इसीलिए सावन में सात्विक भोजन, व्रत और उपवास का विधान बनाया गया है, जो शरीर को स्वाभाविक रूप से डिटॉक्स (विषमुक्त) करता है।

सावन हमें सिखाता है कि जिस प्रकार शिव ने विष पीकर सृष्टि को जीवन दिया, उसी तरह हमें भी अपने भीतर की नकारात्मकता को त्यागकर संयम, भक्ति और पर्यावरण-संरक्षण का संकल्प लेना चाहिए।

Rohit Nage

रोहित नागे वरिष्ठ पत्रकार एवं समाचार संपादक हैं, जिन्हें प्रिंट, इलेक्ट्रॉनिक और डिजिटल मीडिया में तीन दशक से अधिक का अनुभव है। उन्होंने माखनलाल चतुर्वेदी राष्ट्रीय पत्रकारिता विश्वविद्यालय, भोपाल से पत्रकारिता में स्नातक किया है तथा लोक प्रशासन में स्नातकोत्तर उपाधि प्राप्त की है। अपने पत्रकारिता जीवन में उन्होंने दैनिक भास्कर, दैनिक जागरण, राज एक्सप्रेस, पीपुल्स समाचार, नवभारत सहित अनेक प्रतिष्ठित समाचार संस्थानों में रिपोर्टर, उप-संपादक, ब्यूरो प्रमुख एवं न्यूज़ इंचार्ज के रूप में कार्य किया है। वे Narmadanchal.com के रिपोर्टर, उप-संपादक, एवं न्यूज़ इंचार्ज के रूप में कार्य कर रहे हैं और नर्मदांचल क्षेत्र की निष्पक्ष, तथ्यपरक एवं जनहित से जुड़ी पत्रकारिता के लिए जाने जाते हैं। वर्तमान में वे मध्य प्रदेश की राजनीति, प्रशासन, सामाजिक मुद्दों और स्थानीय समाचारों पर विशेष रूप से लेखन एवं संपादन कार्य कर रहे हैं।

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