इटारसी। जब नन्हे हाथों ने देश की मिट्टी के रंग उकेरे और उनकी जुबां से अलग-अलग प्रदेशों की बोलियां फूटीं, तो लगा मानों पूरा हिंदुस्तान एक ही छत के नीचे सिमट आया हो। मौका था वर्धमान पब्लिक स्कूल में आयोजित भव्य सांस्कृतिक उत्सव ‘भारत के रंग – वर्धमान के संग’ का। इस आयोजन ने न केवल बच्चों की प्रतिभा को मंच दिया, बल्कि भारत की ‘अनेकता में एकता’ की गौरवशाली परंपरा को भी जीवंत कर दिया।
केरल की ‘मलयालम’ और कर्नाटक की ‘कन्नड़’ ने जीता दिल
कार्यक्रम की सबसे बड़ी विशेषता कक्षा पहली से छठी तक के विद्यार्थियों द्वारा तैयार की गई विभिन्न प्रदेशों की जीवंत झांकियां रहीं। बच्चों ने केवल स्टॉल ही नहीं सजाए, बल्कि उस क्षेत्र की आत्मा को भी आत्मसात किया।
- भाषाई संगम : कर्नाटक के स्टॉल पर बच्चों ने अभिभावकों का स्वागत ‘कन्नड़’ में किया, तो केरल की संस्कृति समझा रहे बच्चों ने ‘मलयालम’ में संवाद कर सबको मंत्रमुग्ध कर दिया।
- सांस्कृतिक झलक : प्रत्येक स्टॉल पर उस राज्य के लोक नृत्य, पारंपरिक भजन, त्यौहार और खान-पान की विस्तृत जानकारी दी गई।
- मंचीय वैभव : एक तरफ स्टॉल्स पर ज्ञान की गंगा बह रही थी, वहीं दूसरी तरफ मंच पर लोक नृत्यों की रंगारंग प्रस्तुतियों ने समां बांध दिया। बच्चों के आत्मविश्वास ने साबित कर दिया कि वे देश की विरासत के सच्चे संवाहक हैं।
अभिभावकों ने की सराहना
कार्यक्रम में पहुंचे अभिभावकों ने बच्चों के प्रयासों की मुक्त कंठ से प्रशंसा की। उन्होंने न केवल विभिन्न राज्यों की जानकारी ली, बल्कि बच्चों के उत्साहवर्धन के लिए उनकी छोटी-छोटी प्रस्तुतियों में भी रुचि दिखाई। संस्कारों के साथ शिक्षा का संगम कार्यक्रम के समापन पर विद्यालय प्रबंधन से प्रशांत जैन, रचना प्रशस्ति, पूजा पटेल और आर. रेजी ने सभी का आभार व्यक्त किया।
प्रबंधन ने संदेश दिया कि इस आयोजन का मूल उद्देश्य नई पीढ़ी को भारत की समृद्ध सांस्कृतिक विविधता से जोडऩा है। जब बच्चा अलग भाषा और परंपरा को सम्मान देता है, तभी ‘एकता में विविधता’ का भाव मजबूत होता है। यह आयोजन मनोरंजन से परे एक ऐसी पाठशाला साबित हुआ, जहां बच्चों ने किताबी पन्नों से बाहर निकलकर असल हिंदुस्तान को महसूस किया।










