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महासागर तट पर भागवत कथा का महत्व कई गुना होता है

महासागर तट पर भागवत कथा का महत्व कई गुना होता है

– रामेश्वरम (Rameshwardham) में कलश यात्रा के साथ शुरू हुई भागवत कथा
इटारसी। देश की प्रसिद्धि तीर्थ स्थल रामेश्वरधाम में इटारसी (Itarsi) से पहुंचे लगभग 200 श्रद्धालुओं के साथ हनुमान धाम (Hanuman Dham) के पंडित नरेंद्र तिवारी ने महासागर तट पर भागवत कथा की शुरुआत की कथा के प्रथम दिन महासागर तट से 51 कलशों में जल भरकर कलश यात्रा शुरू हुई जो रामेश्वरम के मुख्य मार्गों से होती हुई रामेश्वरम ज्योतिर्लिंग मंदिर (Rameshwaram Jyotirlinga Temple) पहुंची यहां पूजा आरती के बाद कथा स्थल गुजराती भवन (Gujarati Bhavan) पहुंची यहां पूजा अर्चना के बाद श्रीमद् भागवत कथा (Shrimad Bhagwat Katha) शुरू हुई।
सात दिवसीय भागवत कथा के प्रथम दिन पंडित नरेंद्र तिवारी ने भागवत कथा के महत्व को समझाते हुए कहा कि, कथा का अलग जगहों पर अलग महत्व होता है, घर में कराई जा रही कथा से मंदिर में की जा रही कथा का महत्व अधिक होता है ,उससे अधिक महत्व किसी धार्मिक या तीर्थ स्थल में की जा रही कथा का होता है। लेकिन महासागर ओर धाम में की जा रही कथा का महत्व लाखों गुना होता है। यहां किए दान और स्नान का भी बड़ा महत्व है। श्री नरेंद्र तिवारी लघु कथाओं के माध्यम से भागवत कथा से मिलने वाले पुण्य लाभ का वर्णन किया ।
कथा के दूसरे दिन पंडित नरेंद्र तिवारी ने राजा परीक्षित को सुकदेव जी महाराज द्वारा सुनाई कथा का वर्णन किया। उन्होंने कहा कि देवताओं ओर ऋषि मुनियों ने सुकदेव जी से पूछा कि कलयुग में प्राणी समस्त प्रकार के पापो से केसे मुक्त होगा उनके निवेदन पर सुकदेव जी ने बताया की प्राणियों के पापो ओर दुष्कर्मों से मुक्त होने का एक मात्र उपाय है भागवत कथा ,जिसके सुनने मात्र से प्राणियों को सभी पाप कष्ट,दुष्कर्मों से मुक्ति मिल जाएगी, यही नहीं भागवत कथा से प्रेतआत्माओं को भी मुक्ति मिल जाती है । उन्होंने कहा भागवत कथा कराने ओर श्रद्धा पूर्वक सुने से पूर्वजों को भी शांति मिलती है उन्हें मोच्छ की प्राप्ति होती। कथा के तीसरे दिन अमर गुफा में भगवान शिव द्वारा माता पार्वती को अमर कथा श्रवण कराने एवं सुकदेव जी के जन्म की कथा का वर्णन किया ।
कथा के मुख्य यजवान श्रीमती बीना सीरिया, डॉ विनोद सीरिया ,श्रीमती सरोज रामविलास मालवीय,सह यजमान राजेंद्र अग्रवाल भोरा वाले ,लखन वेस,ने व्यास गादी की पूजा अर्चना की ।



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AUTHORRohit

I am a Journalist who is working in Narmadanchal.com.

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