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बॉलीवुड में VFX का जादू: जब सपने सच होने लगे

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अखिलेश शुक्ल, सेवा निवृत्त प्राचार्य, लेखक, ब्लॉगर

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अखिलेश शुक्ला

क्या आपने कभी सोचा है कि आमिर खान ‘पीके’ में बिना पंखों के कैसे उड़ सकते थे? या फिर हृतिक रोशन ‘कृष’ में इमारतों के बीच कैसे छलांग लगा सकते थे? इसका जवाब है VFX यानी विजुअल इफेक्ट्स। आज के बॉलीवुड में VFX ने वह कर दिखाया है, जो कभी सिर्फ सपनों में ही संभव था। आइए जानते हैं, कैसे VFX ने भारतीय सिनेमा को नई ऊंचाइयां दी हैं। उन फिल्मों के बारे में जिन्होंने इस क्षेत्र में मिसाल कायम की, और यह भी कि जब तकनीक नहीं थी, तब एक्शन सीन कैसे बनाए जाते थे। तो तैयार हो जाइए, VFX के इस रोमांचक सफर पर चलने के लिए।

VFX का उपयोग क्यों और कैसे किया जाता है?

VFX का सबसे बड़ा काम है, असंभव को संभव बनाना। जब कोई दृश्य वास्तविक दुनिया में शूट नहीं किया जा सकता – जैसे अंतरिक्ष यात्रा, विशाल विस्फोट, प्रागैतिहासिक जीव, या सुपरहीरो की उड़ान – तब VFX ही एकमात्र रास्ता होता है। दूसरा कारण सुरक्षा और लागत है। किसी ऊंची इमारत से गिरते हुए स्टंट का रियल शूटिंग करना खतरनाक और महंगा होता है, जबकि VFX से उसे सुरक्षित और कम कीमत पर बनाया जा सकता है। तीसरा कारण है नियंत्रण। VFX से आप हर फ्रेम को बार-बार एडिट कर सकते हैं, रंग, बनावट, मौसम सब बदल सकते हैं।

VFX को मुख्यतः तीन चरणों में बनाया जाता है:

1. प्री-प्रोडक्शन – यहां पूरे दृश्य की योजना बनाई जाती है। स्टोरीबोर्ड बनते हैं, और तय किया जाता है कि कौन सा शॉट VFX से बनेगा।

2. प्रोडक्शन (शूटिंग) – अभिनेता ग्रीन स्क्रीन (हरे कपड़े से ढकी दीवार) या ब्लू स्क्रीन के सामने अभिनय करते हैं। कैमरे भी खास तकनीक से चलाए जाते हैं, जैसे मोशन कंट्रोल कैमरा ताकि हर शॉट एक जैसा हो।

3. पोस्ट-प्रोडक्शन – यह असली जादू होता है। कंप्यूटर पर CG (कंप्यूटर जनरेटेड) इमेजरी बनाई जाती है। सॉफ्टवेयर जैसे Autodesk Maya, Adobe After Effects, Nuke का उपयोग होता है। ग्रीन स्क्रीन को हटाकर उसकी जगह CG बैकग्राउंड रखा जाता है। 3D मॉडलिंग से जीव, विस्फोट, पानी, आग सब बनाए जाते हैं। फिर सब कुछ मिलाकर रेंडर किया जाता है।

VFX से पहले: जब स्टंट मास्टर्स ही हीरो थे

क्या आप जानते हैं कि 1990 से पहले बॉलीवुड में VFX का चलना न के बराबर था? तब एक्शन सीन बनाने के लिए प्रैक्टिकल इफेक्ट्स (वास्तविक प्रभाव) का इस्तेमाल होता था। आइए जानें कैसे:

गिरने के सीन – अभिनेता वास्तव में ऊंचाई से नीचे गद्दों या कार्डबोर्ड बॉक्स पर गिरते थे। कैमरा एंगल से वह चोटिल लगता था। स्पाइडर-मैन के स्टंट की तुलना में यह बहुत जोखिम भरा था।

आग और विस्फोट – असली पेट्रोल और फ्यूज का इस्तेमाल होता था। ‘शोले’ के विस्फोट दृश्यों में असली बम जैसे प्रभाव बनाए गए थे। अभिनेताओं को बस भागना होता था, और स्टंट डबल्स जलते कपड़ों के साथ लुढ़कते थे।

कार का पीछा – कारों को असली चट्टानों से टकराया जाता था। धमाकों के लिए कारों में छोटे विस्फोटक लगाए जाते थे। ‘खलनायक’ जैसी फिल्मों में असली कारों को नष्ट किया गया।

लड़ाई के दृश्य – कोरियोग्राफी पहले से साधी जाती थी। तलवार, मारपीट सब वास्तविक होती थी। अक्सर अभिनेताओं को चोटें आती थीं। ‘अमर अकबर एंथनी’ के एक्शन सीन में फाइटर जैसे कलाबाजियां देखने को मिलती थीं।

जादू या सुपरनैचुरल – डबल एक्सपोजर तकनीक से भूत दिखाए जाते थे। ‘नागिन’ जैसी फिल्मों में सांप रूपी प्रभावों के लिए असली सांप या डमी इस्तेमाल होते थे।

इन सबमें सुरक्षा की कमी और रिस्क थी। कई स्टंटमैन को गंभीर चोटें आईं, यहां तक कि मौतें भी हुईं। इसलिए VFX का आना वरदान साबित हुआ।

VFX के बेहतरीन इस्तेमाल वाली 5 बॉलीवुड फिल्में

1. कृष (2006) – राकेश रोशन

बॉलीवुड की पहली सुपरहीरो फिल्मों में से एक। इसने VFX को मुख्यधारा में लाया। हृतिक रोशन का उड़ना, सिंगापुर में केबल कार एक्शन, और खलनायक के अदृश्य होने के दृश्य – सब कुछ क्रांतिकारी था। रेड चिलीज VFX ने करीब 600 शॉट्स बनाए। फिल्म का सबसे मशहूर दृश्य जहां कृष बस को रोकते हैं – उसके लिए रियल बस का CG कंपोजिट मॉडल बनाया गया था।

2. रा.वन (2011) – अनुराग कश्यप

शाहरुख खान की यह फिल्म शायद अपने समय की सबसे महंगी थी (लगभग 130 करोड़)। इसके VFX पर 35 करोड़ खर्च हुए। जहां हीरो सुपरहीरो RA.ONE और विलेन G.ONE के बीच मैच होता है – पूरी तरह से CG कैरेक्टर बनाए गए थे। विशेष बात यह थी कि शाहरुख ने अपने शरीर पर 150 से अधिक मोशन कैप्चर सेंसर लगाए थे। इसने भारत में मोशन कैप्चर तकनीक को पहचान दिलाई।

3. बाहुबली (2015) – एस.एस. राजामौली

हालांकि यह तेलुगु फिल्म है, लेकिन बॉलीवुड में डब होकर ब्लॉकबस्टर रही। इसे VFX का महाकाव्य कहें तो गलत नहीं होगा। कल्पवृक्ष विलेज, 100 फीट ऊंची सुनहरी मूर्ति, विशाल जलप्रपात – सब CG में बने थे। फिल्म में करीब 2000 VFX शॉट्स थे। ‘बाहुबली: द कॉन्क्लूजन’ का 100 मिनट से अधिक का रनटाइम सिर्फ VFX से भरा था। तीरों की बारिश, युद्ध के हाथी और उड़ता हुआ काला तीर – यह भारतीय VFX के लिए मील का पत्थर है।

4. फैन (2016) – मनीष शर्मा

शाहरुख खान ने यहां दोहरी भूमिका निभाई – एक यंग स्टारफैन और एक एजिंग सुपरस्टार। लेकिन असली कमाल यह था कि दोनों का एक साथ स्क्रीन पर होना पूरी तरह VFX से बनाया गया। फैन के यंग रूप (जिसे रियल में शाहरुख ने ही मोशन कैप्चर से अभिनय दिया) के लिए उनके चेहरे का 3D स्कैन किया गया था। डी-एजिंग तकनीक का बेहतरीन उदाहरण। एक दृश्य में दोनों शाहरुख एक साथ लड़ते हैं – वह शॉट देखते ही बनता है।

5. ब्रह्मास्त्र (2022) – अयान मुखर्जी

सबसे हालिया फिल्म, जिसने भारतीय VFX को हॉलीवुड के करीब लाकर खड़ा कर दिया। अग्नि अस्त्र, वायु अस्त्र, नंदी बैल, और अंतिम युद्ध – सब कुछ शानदार था। लगभग 4500 से अधिक VFX शॉट्स! इसे DNEG (द ग्रे मैन, टेनेट जैसी हॉलीवुड फिल्में करने वाली कंपनी) ने किया था। फिल्म का सबसे महंगा सीन था ‘जल मंदिर’ – जिसका पूरा वातावरण CG में बनाया गया था। इसने साबित किया कि भारत फैंटेसी एक्शन में अब पीछे नहीं है।

निष्कर्ष

VFX ने बॉलीवुड को सिर्फ तकनीकी रूप से ही नहीं, बल्कि कहानी कहने के तरीके में भी बदल दिया है। जहां पहले निर्देशक सोच-समझकर लिखते थे कि “यह सीन नहीं हो सकता”, अब वह सोचते हैं “यह होगा कैसे?”। VFX का अगला दशक और भी रोमांचक होगा – वर्चुअल प्रोडक्शन, आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस और रियल-टाइम रेंडरिंग से फिल्मों की लागत घटेगी और गुणवत्ता बढ़ेगी।

लेकिन एक चीज़ याद रखें – VFX एक उपकरण है, न कि कहानी। जैसे ‘तारे ज़मीन पर’ की सच्चाई ने स्पेशल इफेक्ट्स की बजाय दिल छू लिया था। इसी तरह VFX को कहानी को समृद्ध करना चाहिए, हावी नहीं होना चाहिए। अब ‘पुष्पा 2’ हो या ‘आरआरआर’, VFX के बिना अधूरे हैं। आप जब अगली बार कोई फिल्म देखें जहां हीरो 10 कारें उड़ा दे, तो याद रखना – किसी कंप्यूटर जीनियस ने बैठे-बैठे वह चमत्कार बनाया है।

Rohit Nage

Rohit Nage has 30 years' experience in the field of journalism. He has vast experience of writing articles, news story, sports news, political news.

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