इटारसी। कला साहित्यिक सांस्कृतिक मंच इटारसी के तत्वावधान में सूरजगंज स्थित लाल मैदान में विराट अखिल भारतीय कवि सम्मेलन का आयोजन किया। हास्य-व्यंग्य कवि बीके पटेल के संचालन और राजकुमार दुबे के संयोजन में आयोजित इस गरिमामयी कार्यक्रम में देर रात 1 बजे तक रसिक श्रोता काव्य रस में सराबोर रहे।
कवि सम्मेलन में जहां श्रोताओं ने हास्य-व्यंग्य की रचनाओं पर जमकर ठहाके लगाए, वहीं मार्मिक और वीर रस की प्रस्तुतियों पर देशप्रेम और संवेदनाओं की अविरल धारा बह निकली।
कार्यक्रम से जुड़ी मुख्य बातें
साइकिल चालकों और कवियों का सम्मान : कार्यक्रम के दौरान कला साहित्य संस्कृति मंच के सदस्यों द्वारा पर्यावरण एवं ईंधन संरक्षण का संदेश दे रहे स्थानीय साइकिल चालकों को अंगवस्त्र भेंट कर सम्मानित किया गया। वहीं मंचासीन सभी कवियों को पुष्पहार, शाल, श्रीफल एवं सम्मान पत्र देकर सम्मानित किया गया।
सरस्वती वंदना से शुरुआत : कवि सम्मेलन का शुभारंभ कवियत्री सरिता सरोज नागपुर की प्रस्तुत मां सरस्वती की मधुर वंदना से हुआ। इसके बाद संचालन जितेंद्र राजवंशी ने किया और अंत में आभार प्रदर्शन मनीष ठाकुर ने किया।
मंच से गूंजीं कवियों की प्रमुख रचनाएं
- धर्मेन्द्र सोलंकी (भोपाल) : अभी भगवान का अवतार तो मुमकिन नहीं लोगों, उठो तुम भी किसी रावण की खातिर राम हो जाओ। गीतकार की इस प्रस्तुति पर पांडल तालियों से गूंज उठा।
- बीके पटेल (इटारसी) : हारा थका बाप दिन भर की थकान भूल जाता है, देख कर बेटी की मुस्कान, आगे क्या होगा भगवान।
- सरिता सरोज (नागपुर) : सर छुपाने का ठिकाना चाहिए, धूप को भी शामियाना चाहिए, जिनके पर हैं वो तो खुद ही उड़ जाएंगे, बेपेरों को भी उड़ाना चाहिए।
- सुनील तन्हा (करेली) : कभी उनको भी मुड़कर देख लिया करो जो वक्त पर काम पड़े थे, पौंछे थे तुम्हारी आंखों के आंसू लेकिन उनके पांव में छाले पड़े थे।
- मुकेश शांडिल्य (टिमरनी) : मांग भरने की सजा कुछ ऐसी पाई मैंने, मांग कर खा रहा हूं मैं जवानी में, झाड़ू पोछा करते हैं पूरा काम करते हैं कोई सुख नहीं यार मेरी जिंदगानी में।
- दिनेश देहाती (बालाघाट) : दिल दिमाग दुनिया सुलग रहे हैं आग में, खाक हो जाएगा तब मल्हार गाकर क्या करोगे?
- विजय बारूद (समस्तीपुर) : वीर रस के कवि ने वाग्देवी सरस्वती मां, धार की आजाद हो गई, आत्मा प्रसन्न एवं भोजराज भोपाल की पढ़कर श्रोताओं में जोश भर दिया।










