- श्री द्वारिकाधीश बड़ा मंदिर में भव्य कलश यात्रा के साथ शुरू हुई संगीतमय श्रीराम कथा
इटारसी। तुलसी चौक स्थित श्री द्वारिकाधीश बड़ा मंदिर में रविवार से अधिक मास की आखिरी चतुर्थ श्रीराम कथा का भव्य शुभारंभ हुआ। सुबह लकड़गंज स्थित श्री दुर्गा नवग्रह मंदिर से विशाल कलश यात्रा निकाली गई, जिसके बाद दोपहर में यजमान अशोक गुप्ता एवं परिवार द्वारा व्यास पूजन के साथ ‘कथा रघुनाथ की’ प्रारंभ हुई।
शंकराचार्य स्वामी स्वरूपानंद के शिष्य व नर्मदा अंचल के प्रख्यात प्रवचनकर्ता आचार्य नरेंद्र शास्त्री ने कथा को विस्तार देते हुए कहा कि रघुनाथ की कथा लोक कल्याणकारी है। गोस्वामी तुलसीदास जी द्वारा रचित रामचरितमानस का अध्ययन हम सभी को करना चाहिए। तुलसीदास जी ने कथा के प्रारंभ में दुष्टों सहित सभी की वंदना की है। आचार्य श्री ने कहा कि भगवान श्रीराम का जीवन हमें व्यावहारिक जीवन जीने की शिक्षा देता है।
राजपरिवार में जन्म लेने के बाद भी उन्होंने सहर्ष वनवास स्वीकार किया, क्योंकि इसके पीछे आसुरी शक्तियों का वध करना निहित था। कथा के प्रथम दिन उन्होंने शिव-सती विवाह और राजा दक्ष के यज्ञ की कथा का विस्तार से वर्णन करते हुए बताया कि भगवान शिव के मना करने पर भी सती पिता के घर गईं और अपमानित होने पर उन्हें यज्ञ की आहुति में समाना पड़ा। सात दिवसीय इस कथा में प्रभु श्रीराम के जन्म से लेकर राज्याभिषेक तक के प्रसंगों का रसपान कराया जाएगा।











