---Advertisement---
mayank mehto (2)
PlayPause
previous arrow
next arrow
1003320064 (1)
previous arrow
next arrow

मौत का मांझा और नींद में सोया प्रशासन, इटारसी में ‘चाइना डोर’ पर लगाम कब?

By
On:
Follow Us
Bachpan play school advertisement
  • मंजूराज ठाकुर
manju thakur

इटारसी शहर के बाजारों में आजकल एक जानलेवा सत्य धड़ल्ले से बिक रहा है, ‘चाइना डोर’। प्रतिबंध के बावजूद, नायलॉन और कांच के घातक मिश्रण से बना यह सिंथेटिक मांझा, जो आम बोलचाल में ‘चाइनीस मांझा’ कहलाता है, अब केवल पतंगबाजी का शौक नहीं, बल्कि एक सामाजिक त्रासदी का सबब बन चुका है।

यह विडंबना है कि जिस वस्तु को प्रशासन ने स्पष्ट रूप से प्रतिबंधित कर रखा है, वह चोरी-छिपे नहीं, बल्कि लगभग खुलेआम, अवैध बिक्री के नेटवर्क के जरिए हमारे युवाओं तक पहुंच रही है। इसकी सस्ती कीमत और धातु की तरह की तेज धार ने किशोरों और युवाओं को एक ऐसी लत में धकेल दिया है, जिसका सीधा परिणाम अस्पताल या श्मशान हो सकता है।

जानलेवा आकर्षण की कीमत

यह मांझा सामान्य सूती धागे से कई मायनों में अलग और खतरनाक है। इसमें पिसे हुए कांच और केमिकल्स का लेप होता है, जो इसे तलवार की धार जितनी तीक्ष्णता प्रदान करता है। बाइक सवारों के गले, कान और हाथों पर इसकी एक रगड़ भी गंभीर रक्तस्राव और कई मामलों में मौत का कारण बन चुकी है। सूती धागे के विपरीत, यह नायलॉन का धागा बिजली का संवाहक होता है। बिजली के तारों के संपर्क में आने पर, यह पतंग उड़ाने वाले के लिए तत्काल मौत का वारंट बन जाता है। यह आसानी से नष्ट नहीं होता। पेड़ों पर फंसा हुआ यह मांझा निरीह पक्षियों के लिए धीमा जाल बन जाता है, जिससे उनकी दर्दनाक मौत होती है और पर्यावरण को भी दीर्घकालिक नुकसान पहुंचता है। सवाल यह है कि जब खतरा इतना स्पष्ट और परिणाम इतना भयानक है, तो प्रशासन कब तक मौन रहेगा?

प्रशासन की सख्त पाबंदी कागजों तक ही सीमित दिखाई देती है, क्योंकि यह जानलेवा व्यापार बेखौफ फल-फूल रहा है। क्या पुलिस और नगर पालिका प्रशासन कुछ चंद मुनाफेखोर विक्रेताओं पर लगाम नहीं लगा सकता, जो लोगों की जान को जोखिम में डालकर यह जहर बेच रहे हैं? यह केवल कानून-व्यवस्था का नहीं, बल्कि सामाजिक जिम्मेदारी का भी विषय है। अब जागने का समययह समय सब ठीक है मानकर आंखें मूंदने का नहीं है। तत्काल और सख्त निगरानी की आवश्यकता है।

दुकानों, घरों और ऑनलाइन चल रही इस अवैध बिक्री के अड्डों पर सघन छापेमारी की जाए और दोषियों पर न केवल जुर्माना, बल्कि कानूनी रूप से कठोर कार्रवाई की जाए। सबसे बड़ी जिम्मेदारी माता-पिता की है। उन्हें अपने बच्चों को इस खतरनाक मांझे के इस्तेमाल के परिणामों के बारे में शिक्षित करना होगा और उन्हें इससे दूर रखना होगा। सस्ता या जीतने वाला मांझा, जान से ज़्यादा कीमती नहीं हो सकता।

यदि आप कहीं भी इस मांझे की बिक्री देखते हैं, तो तुरंत पुलिस को सूचित करें। सामूहिक प्रयास ही इस मौत के मांझे को इटारसी के बाजारों से बाहर निकाल सकते हैं। इटारसी को हादसों से बचाने के लिए, प्रशासन को अपनी गहरी नींद त्यागनी होगी। चाइना डोर सिर्फ एक धागा नहीं है, यह लापरवाही और लचर कानून प्रवर्तन का प्रतीक है, जिस पर तुरंत सर्जिकल स्ट्राइक की आवश्यकता है।

Rohit Nage

रोहित नागे वरिष्ठ पत्रकार एवं समाचार संपादक हैं, जिन्हें प्रिंट, इलेक्ट्रॉनिक और डिजिटल मीडिया में तीन दशक से अधिक का अनुभव है। उन्होंने माखनलाल चतुर्वेदी राष्ट्रीय पत्रकारिता विश्वविद्यालय, भोपाल से पत्रकारिता में स्नातक किया है तथा लोक प्रशासन में स्नातकोत्तर उपाधि प्राप्त की है। अपने पत्रकारिता जीवन में उन्होंने दैनिक भास्कर, दैनिक जागरण, राज एक्सप्रेस, पीपुल्स समाचार, नवभारत सहित अनेक प्रतिष्ठित समाचार संस्थानों में रिपोर्टर, उप-संपादक, ब्यूरो प्रमुख एवं न्यूज़ इंचार्ज के रूप में कार्य किया है। वे Narmadanchal.com के रिपोर्टर, उप-संपादक, एवं न्यूज़ इंचार्ज के रूप में कार्य कर रहे हैं और नर्मदांचल क्षेत्र की निष्पक्ष, तथ्यपरक एवं जनहित से जुड़ी पत्रकारिता के लिए जाने जाते हैं। वर्तमान में वे मध्य प्रदेश की राजनीति, प्रशासन, सामाजिक मुद्दों और स्थानीय समाचारों पर विशेष रूप से लेखन एवं संपादन कार्य कर रहे हैं।

For Feedback - info[@]narmadanchal.com
Join Our WhatsApp Channel

Advertisement

[adrotate banner="5"]

Narmadanchal News
Privacy Overview

This website uses cookies so that we can provide you with the best user experience possible. Cookie information is stored in your browser and performs functions such as recognising you when you return to our website and helping our team to understand which sections of the website you find most interesting and useful.