डर के आगे भावनात्मक थैरेपी से जीतना सिखा रहे हैं ये युवा

डर के आगे भावनात्मक थैरेपी से जीतना सिखा रहे हैं ये युवा

इटारसी। कहते हैं डर के आगे जीत है, और इसी डर को कोरोना पॉजिटिव मरीजों के मन से निकालकर जीत की राह आसान कर रहे हैं, इटारसी शहर के कुछ युवा। शहर ऐसे युवाओं को प्रणाम कर रहा है।
किसी भी रोग को खत्म करने में जहां चिकित्सा मदद करती है, वही अपनों का सहयोग भी काफी मायने रखता है। यदि मरीज को भावनात्मक सहयोग मिले तो उसके ठीक होने की दर तेज हो जाती है। इसे भावनात्मक थेरेपी (Emotional therapy) कहा जाए तो गलत नहीं होगा। इस कोरोना काल में शहर के कुछ युवा इसी थैरेपी के सहारे मरीजों का संबल बढ़ा रहे हैं और उन्हें कोविड-19 के दर्द से निजात दिलाने में अपनी महत्वपूर्ण भूमिका अदा कर रहे हैं। ऐसे युवाओं में 2 नाम प्रमुखता से सामने आते हैं, इनमें हॉकी खिलाड़ी कन्हैया गुरियानी और युवा नेता हिमांशु अग्रवाल बाबू (Hockey player Kanhaiya Guryani and Himanshu Aggarwal Babu)शामिल हैं। यह दोनों युवा कोविड-19 (Covid-19) मरीजों से लगातार संपर्क करके उनका हौसला बढ़ा रहे हैं। उन्हें बता रहे हैं कि डर के आगे जीत है। उनके डर को खत्म करके हौसला अफजाई करते हुए ठीक होने में मदद करते हैं। लगातार टेलीफोन के जरिए उनके संपर्क में होते हैं और जरूरी सलाह दी देते हैं। ये युवा कोरोनावारियर की महत्वपूर्ण भूमिका अदा कर रहे हैं।
शहर के कुछ युवा जो कोरोना से ठीक हो गए हैं, उन्होंने प्लाज्मा दान करके दूसरे मरीजों की जान बचाने में महत्वपूर्ण योगदान दिया है। इनमें जिम्मी दीवान और याह्या खान का नाम प्रमुखता से लिया जा सकता है।
स्वयं को संक्रमण के खतरे में डालते हुए मरीज और उसके परिजनों की मदद, उनकी हौसला अफजाई, उनके साथ खड़े होना,उनके परिजनों से मिलना-जुलना,उनके इलाज में भरसक मदद करने जैसा कार्य करके इन युवाओं ने मानवीयता का परिचय दिया है। इटारसी नगर के ये युवा सीधे बीमार और उसके परिजनों से सम्पर्क करते हैं और उनके डर को दूर भगाना, उनके बेहतरीन इलाज के लिए यथासम्भव व्यवस्था करने सारे प्रयास करते हैं।

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