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एसटीआर से बाहर भी बाघ की दहाड़, भैंस का किया शिकार

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  • – डांडीवाड़ा और सिलवानी पंचायत के गांवों में दहशत का माहौल
  • – एसटीआर की टीम जुटा रही है बाघ के विषय में ज्यादा जानकारी
  • – वन विभाग तैयार कर रहा है ग्रामीण को मुआवजा दिलाने प्रकरण

इटारसी। सतपुड़ा टाइगर रिजर्व से सटे गांव में बाघ ने कुछ पालतू जानवरों का शिकार किया है। टाइगर की आमद से गांव के लोग दहशत में हैं और रात भी जागकर काट रहे हैं। गांव की सड़कों पर टाइगर के पगचिह्न दिखाई देने से और जानवरों का शिकार होने से गांव के लोगों ने एसटीआर और वन विभाग सामान्य को इसकी सूचना दी और टाइगर के खौफ से निजात दिलाने की मांग की है।

सतपुड़ा टाइगर रिजर्व के एसडीओ विनोद वर्मा का कहना है कि बाघ के मूवमेंट की सूचना मिली है, बाघ ने बारदारैयत में दो भैंस का शिकार किया है। एसटीआर की टीम ने मौके पर जाकर ग्रामीणों से बातचीत की है। सामान्य वन के अधिकारियों ने भी मौके पर जाकर स्थिति देखी है। वन विभाग ने ग्रामीण को हुए नुकसान पर प्रकरण बनाकर निर्धारित मुआवजा दिलाने के लिए आश्वस्त किया है।

खौफजदा हैं ग्रामीण

ग्रामीणों के अनुसार बाघ का मूवमेंट होने से दांडीवाड़ा पंचायत के बारधारैयत, बासनिया और सिलवानी पंचायत के गांव में ग्रामीण खौफजदा हैं। वन विभाग और सतपुड़ा टाइगर रिजर्व का एक दल गांवों का दौरा कर चुका है, एसटीआर की टीम इस बात की जानकारी जुटा रही है कि आखिर बाघ तवा बांध के इस तरफ आया कि एसटीआर के बाहर का कोई बाघ यहां पहुंचा है। तवा के आसपास बाघ के फुट प्रिंट तलाशे जा रहे हैं।

बाघ पता नहीं कहां से आया

फिलवक्त यह ठीक तरह से नहीं कहा जा सकता है कि बाघ आखिर आया कहां से है। यदि तवा को पार करके आया होगा तो उसके फुट प्रिंट तवा किनारे मिल जाएंगे। यदि नहीं मिले तो माना जाएगा कि बाघ एसटीआर से नहीं कहीं बाहर से आया है। रिजर्व से बाहर का बाघ भी हो सकता है। फिलहाल सतपुड़ा टाइगर रिजर्व की टीम इसका पता लगाने में जुटी हुई है। एसटीआर प्रबंधन ने ग्रामीणों से सतर्कता बरतने की अपील भी की है।

भैंस और गाय पर भी हमला

ग्रामीणों का कहना है कि बाघ ने भैंस तो मारी, और गाय पर भी हमला किया है। कुछ भैंस घायल भी हुई हैं। ग्रामीण दिनेश यादव की भैंस मारी हैं, उनको मुआवजा के लिए विभाग कार्रवाई कर रहा है। ग्रामीणों का कहना है कि बाघ के मूवमेंट से गांव में दहशत है, आज जानवरों पर हमला किया, कल कहीं किसी इनसान पर हमला न कर दे, इसी डर के साये में ग्रामीण जी रहे हैं। वे चाहते हैं एसटीआर प्रबंधन बाघ को जल्द वापस ले जाये।

गांव में मिलता आसान शिकार

बाघ को जंगल में शिकार के लिए काफी मेहनत करनी पड़ती है, जबकि गांव में यदि किसी तरह से आ गया तो उसे यहां आसान शिकार मिल जाता है, ऐसे में ग्रामीणों को डर है कि बाघ आसपास ही कहीं न हो। यदि एक बार वह पानी में तैरकर इस तरफ आया है तो वह फिर दोबारा भी यहां आ सकता है। बाघ एक कुशल तैराक होता है, जो पानी में तैरकर अपने शिकार की तलाश में गांवों में भी घुस सकता है, यही डर ग्रामीणों को सता रहा है।

इनका कहना है…

  • जिस ग्रामीण के मवेशी मारे हैं, वन विभाग उनका प्रकरण बनाकर मुआवजा की कार्रवाई कर रहा है। एसटीआर की टीम पता कर रही है कि बाघ एसटीआर से गया है या फिर कहीं बाहर से आया है। ग्रामीणों को फिलहाल सतर्क रहना चाहिए।

विनोद वर्मा, एसडीओ, एसटीआर

Rohit Nage

Rohit Nage has 30 years' experience in the field of journalism. He has vast experience of writing articles, news story, sports news, political news.

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